वेनेजुएला पर अब एक तरह से अमेरिका का कब्जा हो गया है। राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सीलिया फ्लोरेस अब न्यूयॉर्क की ब्रुकलिन जेल में हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अब कुछ समय तक वेनेजुएला को अमेरिका ही चलाएगा।
निकोलस मादुरो के पकड़े जाने के बाद अब डेल्सी रोड्रिग्स भले ही वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति बन गईं हों लेकिन अब बहुत संभावना है कि उन्हें ट्रंप की बात माननी ही पड़ेगी। क्योंकि ट्रंप ने धमकी दी है कि अगर डेल्सी रोड्रिग्ज अमेरिका के हिसाब से नहीं चलती हैं तो उनका हश्र मादुरो से भी बुरा होगा।
खैर, वेनेजुएला में जो कुछ हुआ, उसकी एक बड़ी वजह वहां का 'तेल का खजाना' है। वेनेजुएला के पास 303 अरब बैरल तेल का भंडार है। ट्रंप भी यही चाहते हैं कि वेनेजुएला के तेल भंडार तक अमेरिका की पहुंच हो। मादुरो के रहते ऐसा हो नहीं पा रहा था।
सीधी बात है कि ट्रंप अमेरिका का फायदा देख रहे हैं। मगर वेनेजुएला में जो कुछ हुआ, क्या उसमें भारत के लिए भी कुछ फायदे का सौदा छिपा है?
यह भी पढ़ें-- तेल मिल नहीं रहा, अब बिजली भी कटने लगी; क्यूबा में शुरू हो गया ट्रंप का खेल?

क्या भारत को फायदा होगा?
माना जा रहा है कि इससे भारत को भी फायदा हो सकता है। क्योंकि अब तेल को लेकर भारत और वेनेजुएला के बीच कारोबार में तेजी आ सकती है।
2012 में भारतीय अरबपति मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज और वेनेजुएला की पेट्रोलियोस डी वेनेज़ुएला (PdVSA) के बीच समझौता हुआ था। एक वक्त भारत सबसे ज्यादा तेल वेनेजुएला से ही खरीदता था। मगर बाद में जब अमेरिका ने प्रतिबंध लगाने शुरू किए तो भारत ने वेनेजुएला से तेल खरीदना बहुत कम कर दिया।
कैपिटल मार्केट फर्म जेफरीज का कहना है कि वेनेजुएला के तेल पर अमेरिकी कब्जे से रिलायंस इंडस्ट्रीज और सरकारी तेल कंपनी ONGC को फायदा हो सकता है।
न्यूज एजेंसी PTI ने एनालिस्ट के हवाले से बताया है कि इससे वेनेजुएला पर लंबे समय से बकाया 1 अरब डॉलर भी भारत को वापस मिल सकते हैं।
भारत पहले वेनेजुएला से हर दिन 4 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदता था। मगर अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण यह सप्लाई बंद हो गई। अब यह सप्लाई फिर से बढ़ सकती है। साथ ही कच्चे तेल का उत्पादन भी बढ़ सकता है।
ONGC विदेश लिमिटेड (OVL) पूर्वी वेनेजुएला में सैन क्रिस्टोबल ऑयलफील्ड को जॉइंट रूप से ऑपरेट करती है। मामले की जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने कहा कि एक बार प्रतिबंधों में ढील मिलने के बाद OVL गुजरात में अपनी पेरेंट कंपनी ONGC से सैन क्रिस्टोबल में रिग्स और अन्य उपकरण ले जा सकती है ताकि उत्पादन को फिर से शुरू किया जा सके जो घटकर 5,000-10,000 बैरल प्रति दिन हो गया है।
यह भी पढ़ें-- 'मैं एक शरीफ आदमी हूं', कोर्ट में पेश हुए निकोलस मादुरो तो क्या-क्या हुआ?

कैसे हो सकता है फायदा?
वेनेजुएला से अमेरिकी प्रतिबंध हटते हैं तो इससे भारत उसके कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बन सकता है।
केपलर के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट निखिल दुबे ने लिंक्डइन पर एक पोस्ट में कहा, 'अगर प्रतिबंधों में ढील दी जाती है, जैसे कि 1990 में पनामा से जनरल मैनुअल नोरिएगा को हटाने के तुरंत बाद व्यापार प्रतिबंध हटा दिए गए थे, तो कारोबार में फिर से तेजी आ सकती है। ऐसी परिस्थितियों में, वेनेजुएला का तेल फिर से भारतीय रिफाइनरियों में वापस आ सकता है।'
उन्होंने कहा कि इससे न सिर्फ रूसी तेल पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी, बल्कि भारत और अमेरिका के बीच रूसी तेल को लेकर जो तनाव बना है, उसमें भी सुधार आ सकता है।
उन्होंने कहा कि वेनेजुएला से प्रतिबंध हटते हैं या ढील मिलती है तो भारतीय रिफाइनरियों तक उसके कच्चे तेल की पहुंच आसान हो जाएगी।
2019 से पहले वेनेजुएला हर साल 70.7 करोड़ बैरल कच्चे तेल का निर्यात करता था, जिसमें से अमेरिका लगभग 32% और चीन और भारत 35% खरीदते थे। 2025 तक निर्यात घटकर 35.2 करोड़ बैरल हो गया, जिसमें 45% सिर्फ चीन खरीदता है।