ईरान युद्ध की वजह से देश में जारी संकट के बीच केंद्र सरकार ने बुधवार को दिल्ली में सर्वदलीय बैठक बुलाई। इस बैठक में सरकार ने विपक्षी दलों के वरिष्ठ नेताओं के साथ चिंताओं को लेकर मंथन किया। इसमें विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पाकिस्तान को लेकर बड़ा बयान दिया और युद्ध में भारत की भूमिका को लेकर बातें साफ कीं।
सरकार ने बैठक में इस बात को सिरे से खारिज कर दिया कि पाकिस्तान ने ईरान और अमेरिका के बीच बिचौलिए बनने का ऑफर देकर अपनी कूटनीति का फायदा उठाया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि पाकिस्तान झगड़ों में खुद को शामिल करने में माहिर रहा है।
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जयशंकर ने कहा क्या?
जयशंकर ने सरकार की तरफ से बैठक में कहा, 'भारत दलाल देश नहीं हो सकता।' उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को डोनाल्ड ट्रंप के साथ अपनी बातचीत में उनसे कहा था कि युद्ध से सभी को नुकसान हो रहा है और ट्रंप पर इस झगड़े को जल्दी सुलझाने की जरूरत पर जोर दिया था।
पश्चिमी एशिया में जगह बना रहा है पाकिस्तान?
क्या पाकिस्तान पश्चिमी एशियाई देशों के बीच अपनी जगह बना रहा है? इसपर विदेश मंत्री जयशंकर ने याद दिलाया कि वह 1971 में चीन और अमेरिका के बीच और फिर 1981 में अमेरिका और ईरान के बीच भी बिचौलिया की भूमिका में था।
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ईरान के साथ भारत के रिश्ते
उन्होंने कहा कि भारत एक बड़ा देश है और अपने राष्ट्रीय हितों को पूरा करने के लिए हर तरह से काम करता है। जयशंकर ने साथ ही इस बात पर जोर दिया कि ईरान के साथ उसके अच्छे रिश्ते बने हुए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका-ईरान बातचीत के फॉर्मेट और भविष्य के बारे में ज्यादा साफ जानकारी नहीं है और इस बात पर भी पक्का नहीं है कि ईरान की तरफ से कौन बातचीत करेगा।
सर्वदलीय बैठक रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में संसद भवन में हुई। कांग्रेस की तरफ से सांसद मुकुल वासनिक, सीपीएम के जॉन ब्रिटास, AIMIM के असदुद्दीन ओवैसी, एनसीपी की सुप्रिया सुले और आम आदमी पार्टी के संजय सिंह समेत आदि विपक्षी सांसद शामिल हुए। इसमें सरकार की तरफ से गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री जयशंकर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने हिस्सा लिया।
