बॉलीवुड के प्रसिद्ध गीतकार और लेखक जावेद अख्तर ने अफगानिस्तान में तालिबान द्वारा लागू की गई नई दंड संहिता की आलोचना की है। उन्होंने इसे धर्म के नाम पर इंसानियत का अपमान बताते हुए भारतीय मौलवियों और मुफ्तियों से बिना शर्त इसकी निंदा करने की अपील की है। जावेद अख्तर ने कहा कि इस तरह के कानून महिलाओं के अधिकारों को कुचलते हैं और धार्मिक आस्था को बदनाम करते हैं।
तालिबान की ओर से लागू की गई करीब 90 पन्नों की नई दंड संहिता में घरेलू हिंसा को सीमित शर्तों के साथ वैध ठहराया गया है। कानून के मुताबिक यदि पति पत्नी को इस तरह मारता है कि उसकी हड्डी न टूटे या कोई खुला घाव न हो तो इसे अपराध की श्रेणी में नहीं रखा जाएगा। इतना ही नहीं, यदि कोई महिला पति की अनुमति के बिना अपने मायके जाती है तो उसे तीन महीने तक की जेल की सजा हो सकती है।
मुफ्तियों और मुल्लाओं पर क्या बोल गए जावेद अख्तर?
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया में जावेद अख्तर ने लिखा, 'तालिबान ने पत्नी को पीटने को लीगल कर दिया है, लेकिन बिना किसी हड्डी के फ्रैक्चर के अगर कोई पत्नी पति की इजाजत के बिना अपने माता-पिता के घर जाती है, तो उसे तीन महीने की जेल होगी। मैं भारत के मुफ़्तियों और मुल्लाओं से गुजारिश करता हूं कि वे इसकी बिना शर्त बुराई करें क्योंकि यह सब उनके धर्म के नाम पर किया जा रहा है।' अपने दूसरे पोस्ट में लिखते है चाहे जो भी पॉलिटिकल फायदा हो, इन बत्तमीज तालिबानों को हमें कोई इज्जत नहीं देनी चाहिए। वे दुनिया के कूड़े हैं।
यह भी पढ़ें: 'हम चुप नहीं बैठेंगे' अफगानिस्तान पर क्यों भड़का पाक? ख्वाजा आसिफ ने दी चेतावनी
तालिबान की नई दंड संहिता
नई संहिता तालिबान के सर्वोच्च नेता हिबतुल्लाह अखुंदजादा के हस्ताक्षर से जारी की गई है और इसे जल्द ही अफगान अदालतों में लागू किया जाएगा। विश्लेषकों के अनुसार इस कानून में समाज को सामाजिक हैसियत के आधार पर विभाजित किया गया है, जहां धार्मिक नेताओं को शीर्ष स्थान दिया गया है, जबकि महिलाओं और निचले वर्गों को सबसे नीचे रखा गया है। सजा का निर्धारण भी व्यक्ति की सामाजिक स्थिति के अनुसार किए जाने का प्रावधान है।
यह भी पढ़ें: अफगानिस्तान-ताजिकिस्तान सीमा पर झड़प क्यों, क्या इसके पीछे चीन-पाकिस्तान?
2009 का EVAW कानून लगभग खत्म
महिला अधिकार संगठनों का कहना है कि यह कानून महिलाओं को लगभग गुलाम की स्थिति में धकेल देता है। पति को शारीरिक दंड देने की छूट देना मानवाधिकारों के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। इससे पहले वर्ष 2009 में लागू हुआ EVAW (एलिमिनेशन ऑफ वायलेंस अगेंस्ट वूमेन ) कानून महिलाओं के खिलाफ हिंसा को रोकने के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी ढांचा प्रदान करता था, लेकिन नई व्यवस्था के तहत वह लगभग अप्रभावी हो गया है।
