यूजीसी को लेकर बीजेपी के अंदर ही विरोध के स्वर मुखर हो गए हैं। लगभग पिछले दस दिनों से चल रहे विवाद के दौरान तमाम बीजेपी नेताओं ने विरोध किया और कुछ जिला स्तर के नेताओं ने तो अपने पद से इस्तीफा दे दिया, लेकिन अब बीजेपी के कद्दावर नेता और राजस्थान के पूर्व गवर्नर कलराज मिश्रा ने भी यूजीसी की इन गाइडलाइन्स का विरोध किया है।

 

कलराज मिश्रा ने इन गाइडलाइन्स को पूरी तरह से असंवैधानिक बताते हुए कहा कि इसे वापस लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पहले यह एससी एसटी के लिए था अब इसमें ओबीसी को भी जोड़ा गया है लेकिन इसमें जाति के आधार पर करना ठीक नहीं है बल्कि इसमें सभी जाति के लोगों को मौका देना चाहिए ताकि जिनके साथ भी भेदभाव हो रहा है वह शिकायत कर सके।

झूठी शिकायत पर भी हो नियम

इसके अलावा उन्होंने कहा कि झूठी शिकायतों को लेकर भी इसमें प्रावधान करना चाहिए। कलराज मिश्रा ने कहा, 'जो लोग झूठी शिकायत करते हैं उनके खिलाफ दंड का प्रावधान होना चाहिए, साथ ही शिकायत निवारण समिति में भी समय सीमा को निर्धारित करना चाहिए और उनके अधिकार क्या हैं यह भी निर्धारित करना चाहिए।'

सभी छात्र समान

कलराज मिश्रा ने कहा कि कॉलेज या विश्वविद्यालय परिसर में सभी छात्र समान में उनके खिलाफ किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए इसलिए जातिगत भेदभाव करके छात्रों को बिरादरी में बांटना काफी खतरनाक है।


क्या है मामला

दरअसल, यूजीसी गाइडलाइन्स के तहत प्रावधान किया गया है कि अगर एससी, एसटी या ओबीसी वर्ग का कोई भी छात्र किसी सामान्य वर्ग के छात्र के खिलाफ जातिगत भेदभाव की शिकायत करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, लेकिन सामान्य वर्ग के छात्रों की चिंता यह है कि उनके खिलाफ झूठी शिकायतें करके भी उन्हें टारगेट किया जा सकता है। क्योंकि, इसमें झूठी शिकायत करने वालों के खिलाफ किसी भी तरह की सजा का प्रावधान नहीं किया गया है।

 

साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि यह संविधान के समानता के अनुच्छेद उल्लंघन है क्योंकि सामान्य और अन्य वर्ग के छात्रों के खिलाफ इसमें एक जैसा व्यवहार नहीं किया जा रहा है। हालांकि, अब यह मामला राजनीतिक रंग ले चुका है और सरकार ने अभी तक इस पर लगभग चुप्पी साध रखी है। यहां 

घरों से उतारे झंडे

बीजेपी समर्थक इस गाइडलाइन से इतने नाराज हैं कि अपने घरों से, छतों से और दफ्तरों से बीजेपी के झंडे उतार रहे हैं। गांव, गली और मोहल्लों से लेकर महानगरों तक, बीजेपी के समर्थकों की नाराजगी बढ़ती जा रही है। अगर आप सोशल मीडिया साइट पर ऐसे रील और वीडियोज की भरमार है।

 

लोग मुखर होकर कह रहे हैं कि जिस भारतीय जनता पार्टी को लोगों ने हिंदुत्व के लिए चुना था, उसने जातीय नजरिए से ऐसी नियमावली बना ली, जिसकी वजह से सवर्णों को अपराधी मान लिया गया है। दिलचस्प तथ्य यह है कि ऐसे भी वीडियोज वायरल हो रहे हैं, जिन्हें पता नहीं है कि इस नियम में क्या है लेकिन वे भी इस नियमावली के विरोध में हैं। हिंदुत्व, राष्ट्रवाद और विकास की बात करने वाली जातिवाद पर बुरी तरह से घिर गई है।

प्रतीक भूषण ने किया विरोध

इसके पहले बीजेपी के मशहूर नेता बृजभूषण शरण सिंह के बेटे और गोण्डा से विधायक प्रतीक भूषण ने भी इसका विरोध किया था। उन्होंने कहा था,  'इतिहास के दोहरे मापदंडों पर अब गहन विवेचना होनी चाहिए। जहां बाहरी आक्रांताओं और उपनिवेशी ताकतों के भीषण अत्याचारों को ‘अतीत की बात’ कहकर भुला दिया जाता है जबकि भारतीय समाज के एक वर्ग को निरंतर ‘ऐतिहासिक अपराधी’ के रूप में चिह्नित कर वर्तमान में प्रतिशोध का निशाना बनाया जा रहा है।'