लोकसभा ने गुरुवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के संसद के संयुक्त सत्र में दिए गए अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव को बिना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जवाब के मंजूर कर लिया। यह 2004 के बाद पहला ऐसा मौका है जब प्रधानमंत्री ने इस प्रस्ताव पर अपनी बात नहीं रखी।  विपक्षी सांसदों ने लगातार हंगामा किया और नारे लगाए, जिसके कारण लोकसभा की कार्यवाही बाधित रही। प्रधानमंत्री मोदी को बुधवार को इस प्रस्ताव पर जवाब देना था, लेकिन विपक्ष के विरोध और नारेबाजी के चलते स्पीकर ओम बिरला ने सदन को स्थगित कर दिया।

गुरुवार को भी सदन की शुरुआत के साथ ही INDIA गठबंधन के सांसदों ने प्रधानमंत्री मोदी और केंद्र सरकार के खिलाफ नारे लगाए। विपक्ष के एक धड़े का कहना है कि नेता विपक्ष राहुल गांधी को लोकसभा में बोलने का मौका नहीं दिया गया। साल 2020 में हुए भारत-चीन गतिरोध को लकेर वह जनरल एमएम नरवणे की अप्रकाशित किताब का जिक्र कर रहे थे, जिसे रोके जाने पर हंगामा बरपा है। 

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हंगामे की भेंट चढ़ा है संसद का यह सत्र

मंगलवार को 8 कांग्रेस सांसदों को शीतकालीन सत्र के बाकी दिनों के लिए निलंबित कर दिया गया था, जिससे तनाव और बढ़ गया। 2004 में भी ऐसा ही हुआ था, जब भारतीय जनता पार्टी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के जवाब देने से रोका था। 

कांग्रेस ने दिलाई पुरानी याद

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मनमोहन सिंह के 2005 के एक वीडियो को साझा कर इसकी याद दिलाई है। इस बार धन्यवाद प्रस्ताव को वॉइस वोट से पास किया गया, जबकि विपक्ष नारे लगाता रहा। 

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कांग्रेस ने क्या आरोप लगाया है?

कांग्रेस ने लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पारित होने के बाद हंगामा किया है। कांग्रेस का कहना है कि चार दिनों तक लोकसभा में राहुल गांधी को जानबूझकर बोलने नहीं दिया गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी उनकी बात सुनना नहीं चाहते थे। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह दावा भी किया कि विपक्ष में रहते हुए भारतीय जनता पार्टी ने 10 जून, 2004 को तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सदन में बोलने से रोका गया था, जबकि उस वक्त राष्ट्रपति अभिभाषण पर चर्चा पूरी हुई थी।

लोकसभा में पारित हुआ धन्यवाद प्रस्ताव

मणिकम टैगोर, सांसद:-
सदन में दो आवाजें हैं, एक आवाज सत्तापक्ष की और दूसरी विपक्ष की है। लेकिन विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास हो रहा है। सरकार नहीं चाहती कि विपक्ष की आवाज को मौका मिले। यह सरकार की मन की बात वाली सोच है। मन की बात रेडियो पर हो सकती है, लेकिन संसद मन की बात के लिए नहीं है। संसद में विपक्ष के नेता बोलते हैं और फिर प्रधानमंत्री जवाब देते हैं। यह पहली बार है जब प्रधानमंत्री नहीं बोले हैं। यह दुखद है।

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हंगामे के बीच राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव को ध्वनिमत से पारित कर दिया। न्यवाद प्रस्ताव पर सदन में हुई चर्चा का प्रधानमंत्री द्वारा सदन में जवाब देने की परंपरा है, लेकिन गतिरोध की स्थिति के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जवाब लोकसभा में नहीं हुआ और प्रस्ताव को पारित कर दिया गया।

जयराम रमेश, महासचिव, कांग्रेस:-
नेता प्रतिपक्ष को लोकसभा में बोलने से चार दिनों तक रोका गया। वह राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा नीति को लेकर कुछ बुनियादी बात करने वाले थे, लेकिन उन्हें जनाबूझकर रोक दिया गया क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ये बातें सुनना नहीं चाहते थे।

राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने राहुल गांधी पर हुए बवाल का जिक्र किया। उन्होंने कहा, 'संसद के दो स्तंभ होते हैं, एक लोकसभा और दूसरा राज्यसभा। जब एक स्तंभ पर आक्रमण होता है दूसरा स्तंभ भी कमजोर होता है।'