मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर रणनीति तेज कर दी है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्पष्ट किया है कि देश LPG गैस की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए हर संभव विकल्प तलाश रहा है। सरकार का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में किसी एक क्षेत्र पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है, इसलिए भारत अपने सोर्स को अलग-अलग करने पर काम कर रहा है।
MEA के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने गुरुवार को साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि सरकार का प्राथमिक लक्ष्य आम जनता की जरूरतों को पूरा करना है। उन्होंने जोर देकर कहा, 'हम हर उस जगह से LPG खरीदने की कोशिश कर रहे हैं जहां यह उपलब्ध है। अगर रूस से आपूर्ति संभव है तो हम वहां भी जाएंगे। वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में हमें यह सुनिश्चित करना है कि हमारे नागरिकों की ईंधन संबंधी आवश्यकताएं हर हाल में पूरी हों।'
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MEA के अनुसार भारत को बांग्लादेश, श्रीलंका और मालदीव समेत कई पड़ोसी देशों से ऊर्जा आपूर्ति के लिए अनुरोध मिले हैं। भारत पहले से ही 2007 से बांग्लादेश को डीजल की आपूर्ति कर रहा है और मौजूदा समय में भी अपनी क्षमता और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पड़ोसी देशों की मदद जारी रखे हुए है।
होर्मुज स्ट्रेट पर संकट का असर
मिडिल ईस्ट में होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे जरूरी समुद्री रास्तों में से एक है, जो दुनिया भर में LPG शिपमेंट का एक बड़ा कवर करता है। हाल के तनावों ने इस रास्ते पर शिपिंग में रुकावट डाली है, जिससे सप्लाई चेन पर काफी दबाव पड़ा है। भारत अपनी LPG जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इसी इलाके से इंपोर्ट करता है, इसलिए दूसरे रास्ते और नए पार्टनर ढूंढना भारत के लिए एक जरूरत बन गई है।
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सरकार ने लोगों से की अपील
सरकार ने आम लोगों से LPG का उपयोग सोच-समझकर करने और जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक ईंधनों का इस्तेमाल करने की अपील की है। वहीं, कई राज्यों में कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं, जिनमें छापेमारी और निगरानी बढ़ाना शामिल है। सरकार की कोशिश है कि देश में रसोई गैस की कोई कमी न हो और आम जनता को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
