भारत के पूर्व आर्मी चीफ जनरल एमएम नरवणे की अप्रकाशित किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी (Four Stars of Destiny)’ के ऑनलाइन सर्कुलेशन के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने सोमवार को एफआईआर दर्ज कर लिया। पुलिस यह पता लगाने के लिए जांच कर रही है कि इस किताब की PDF कॉपी ऑनलाइन वायरल कैसे हो गई।
दरअसल, यह वही किताब है, जिसका हवाला देते हुए लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 2 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऊपर संसद में हमला बोला था। कांग्रेस सांसद लोकसभा में 'द कारवां मैगजीन' का एक आर्टिकल साथ लेकर आए थे। इस आर्टिकल में आगे 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' किताब के कुछ हिस्सों का जिक्र था, जो रक्षा मंत्रालय के पास मंजूरी के लिए अभी भी विचाराधीन है।
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राहुल का प्रधानमंत्री मोदी पर हमला
संसद में राहुल गांधी ने कहा था कि किताब के कुछ हिस्सों से पता चलता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 'अपनी जिम्मेदारी से भाग गए' जब जनरल नरवणे ने उन्हें बताया कि 2020 में कुछ चीनी टैंक भारतीय इलाके में आ रहे थे। इसी दौरान गलवान घाटी में चीन के साथ हुई झड़प के कुछ हफ्ते बाद जिसमें 20 भारतीय सैनिक मारे गए थे।
दिल्ली पुलिस के अनुसार, इस किताब के पब्लिकेशन के लिए अभी संबंधित अधिकारियों से आवश्यक मंजूरी नहीं मिली है। पुलिस जांच में सामने आया कि इसी शीर्षक वाली एक टाइप-सेट किताब की PDF कॉपी कुछ वेबसाइट्स पर उपलब्ध थी।जनरल एमएम नरवणे ने दिसंबर 2019 से अप्रैल 2022 तक भारत के आर्मी चीफ के तौर पर काम किया।
जांच कर रही पुलिस ने क्या कहा?
दिल्ली पुलिस ने सोमवार की शाम को कहा कि जनरल नरवणे की अप्रकाशित ऑटोबायोग्राफी की सॉफ्ट कॉपी यानी PDF फॉर्मेट में के सर्कुलेशन की जांच शुरू कर दी गई है।
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पुलिस ने कहा 'दिल्ली पुलिस ने अलग-अलग ऑनलाइन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और न्यूज फोरम पर मिली जानकारी का संज्ञान लिया, जिसमें दावा किया गया था कि फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी किताब की प्री-प्रिंट कॉपी सर्कुलेट की जा रही है।' आगे कहा कि इस किताब के पब्लिकेशन के लिए अभी संबंधित अधिकारियों से जरूरी मंजूरी मिलनी बाकी है।
पुलिस के प्रवक्ता का बयान
पुलिस के प्रवक्ता ने आगे कहा, 'जांच करने पर पता चला कि इसी शीर्षक वाली एक टाइप-सेट किताब की PDF कॉपी, जो शायद M/s पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने तैयार की है, कुछ वेबसाइटों पर उपलब्ध है और कुछ ऑनलाइन मार्केटिंग प्लेटफॉर्म ने तैयार किताब के कवर को ऐसे दिखाया है जैसे वह खरीदने के लिए उपलब्ध हो।'
बता दें कि इस पूरे मामले की जांच के लिए दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने केस दर्ज किया है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि अप्रकाशित और बिना मंजूरी वाली किताब की सामग्री कैसे सार्वजनिक हुई और इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं।
