logo

ट्रेंडिंग:

ट्रंप के साथ ट्रेड डील से खुश नहीं, सतर्क रहने की जरूरत, द. कोरिया को मिला सबक

डोनाल्ड ट्रंप पर भरोसा करना बेहद मुश्किल है। वे अपनी बात पर कब तक टिके रहेंगे, यह भी कोई नहीं बता सकता है। ऐसे में अमेरिका के साथ भारत की होने वाली ट्रेड डील पर खुश रहने से अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।

Donald Trump and PM Modi

पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप। ( Photo Credit: X@narendramodi)

शेयर करें

संबंधित खबरें

Advertisement
Group2

कुछ दिन पहले अमेरिका के वाणिज्य मंत्री हावर्ड लुटनिक ने भारत के साथ ट्रेड डील न होने की वजह बता रहे थे। माना जा रहा था कि यह अमेरिका की भारत को दबाव में लेने की चाल थी। मगर इसी बीच भारत ने यूरोप के साथ एक बड़ी ट्रेड डील करके उल्टा अमेरिका पर ही दबाव बना लिया।

 

यूरोप और भारत के बीच हुई 'मदर ऑफ ऑल डील्स' ने ट्रंप को इतना बेचैन कर दिया कि उन्हें आनन-फानन भारत के साथ ट्रेड डील पर सहमति देनी पड़ी। जबकि कुछ दिन पहले ही लीक हुई रिपब्लिकन सीनेटर की एक कॉल रिकॉर्ड में खुलासा हुआ था कि ट्रंप और जेडी वैंस ने कई मौकों पर भारत के साथ होने वाली ट्रेड डील को रोका था।

 

पिछले छह महीने में दोनों देशों के बीच अविश्वास इतना बढ़ गया है कि जल्द भरोसा कायम होना आसान नहीं है। खासकर ट्रंप जैसी हस्ती के सामने। क्या, कब और कैसे बोलना है? इससे ट्रंप का कोई नाता नहीं है। ट्रंप को अक्सर अपने फैसले से हटते देखा गया है। भारत के साथ अभी अमेरिका ने ट्रेड डील नहीं किया है, सिर्फ प्रारंभिक सहमति बनी है। ऐसे में इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि ट्रंप अपने फैसले से नहीं पलटेंगे।

 

यह भी पढ़ें: मलेशिया यात्रा में PM मोदी ने भारत के लिए क्या हासिल किया? अहम समझौते पर नजर

 

कहां फंस सकता है भारत की गाड़ी?

  • ट्रंप ने डील पर कई बड़े-बड़े दावे किए हैं। इनका पूरा होना इतना भी आसान नहीं है। अमेरिका ने कहा कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद करेगा, जबकि भारत ने अभी तक ऐसी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। भविष्य में यह मुद्दा दोबारा भी उठ सकता है, क्योंकि भारत अपने विश्वसनीय मित्र रूस से सिर्फ अमेरिकी दवाब के कारण तेल खरीदना नहीं बंद करेगा।

 

  • ट्रंप ने यह भी कहा कि भारत 500 अरब डॉलर का अमेरिका सामान और सेवाओं को खरीदेगा, लेकिन यह कहना आसान है, करना नहीं। हालांकि ट्रंप ने इस खरीद की टाइमलाइन नहीं बताई है। साल 2024 में भारत ने अमेरिका से 41.5 अरब डॉलर का सामान खरीदा था। वहीं 41.8 अरब डॉलर की सेवाओं का निर्यात किया गया। कुल मिलाकर भारत ने अमेरिका से 83 अरब डॉलर की वस्तुओं और सेवाओं का निर्यात किया था। इसे 500 अरब डॉलर तक ले जाना बेहद मुश्किल है।

 

  • भारत सरकार अमेरिका के साथ होने वाली ट्रेड डील की खूब तारीफ करने में जुटी है। उसका मानना है कि अमेरिका ने पड़ोसी देशों की तुलना में भारत पर सबसे कम यानी 18 फीसद टैरिफ लगाया है। जबकि सच यह है कि पिछले छह महीने तक दुनिया में सबसे अधिक अमेरिकी टैरिफ भारत पर ही थोपी गई थी। अधिकांश आसियान देशों पर 19 फीसद टैरिफ है। बांग्लादेश पर 25 और पाकिस्तान पर 19 फीसद टैरिफ लागू है। वियतनाम पर 20 फीसद टैरिफ है। विश्लेषकों का मानना है कि एक-दो फीसद टैरिफ कम या ज्यादा होने से बहुत अधिक लाभ की गुंजाइश कम है।

ट्रंप का बार-बार बदला ही सबसे बड़ी चुनौती

डोनाल्ड ट्रंप का सबसे पसंदीदा शब्द टैरिफ है। वे इसे हर जगह इस्तेमाल करना चाहते हैं। व्यापार, विवाद और धमकी में भी टैरिफ को घुसा देते हैं। ट्रंप का कोई भरोसा नहीं है कि उन्होंने जो आज समझौता किया है, भविष्य में भी वे उस पर टिके रहेंगे।

 

वे नए मुद्दों को आधार बनाकर टैरिफ की धमकी देते हैं। सबसे बड़ा उदाहरण दक्षिण कोरिया है। पिछले साल दक्षिण कोरिया ने अमेरिका के साथ ट्रेड डील की। 26 जनवरी को ट्रंप ने अपनी नई धमकी में मोटर वाहनों और अन्य दक्षिण कोरियाई आयात पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी दी।

 

यह भी पढ़ें: गलवान झड़प के 7 दिन बाद चीन ने किया था न्यूक्लियर टेस्ट, 6 साल बाद खुलासा

 

व्यापार डील के तहत दक्षिण कोरिया ने अमेरिका में 350 अरब डॉलर के निवेश की बात कही थी। ट्रंप ने दक्षिण कोरिया पर निवेश और ट्रेड डील को मंजूरी देने में देरी करने का आरोप लगाया और इसी आधार पर टैरिफ की धमकी दी। अमेरिका और कनाडा के बीच भी ट्रेड डील हो रखी है। बावजूद इसके ट्रंप अलग-अलग मुद्दों पर टैरिफ की धमकी कई बार दे चुके हैं।


और पढ़ें

design

हमारे बारे में

श्रेणियाँ

Copyright ©️ TIF MULTIMEDIA PRIVATE LIMITED | All Rights Reserved | Developed By TIF Technologies

CONTACT US | PRIVACY POLICY | TERMS OF USE | Sitemap