नई दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान एक अहम टिप्पणी की। कोर्ट ने ऑनलाइन मैचमेकिंग वेबसाइट को लेकर कहा कि अगर इन प्लेटफॉर्म के जरिए शादी होती है और बाद में पति-पत्नी के बीच कोई विवाद हो जाता है, तो ऐसी स्थिति में वेबसाइट की जिम्मेदारी कितनी बनती है, यह सवाल अहम है। यह टिप्पणी उस समय की गई जब सुनवाई के दौरान यह सामने आया कि संबंधित पति-पत्नी की मुलाकात इसी वेबसाइट के जरिए हुई थी।
कोर्ट ने साफ किया कि शादी के बाद होने वाले विवादों में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की भूमिका और जिम्मेदारी पर विचार करना जरूरी है। जस्टिस जेबी पारदीवाला ने सवाल उठाया कि 'आखिर इन शादी डॉट कॉम जैसी वेबसाइटों का क्या किया जाए?' अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जोड़े को एक बार फिर सुलह की कोशिश करने को कहा है।
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मित्तल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई
यह मामला उस समय और भी जरूरी हो गया जब हाल ही में इसी प्लेटफॉर्म के फाउंडर अनुपम मित्तल को एक धोखाधड़ी के केस में कोर्ट से राहत मिली है। दरअसल, हैदराबाद की एक महिला ने वेबसाइट के जरिए मिले एक व्यक्ति पर ठगी का आरोप लगाया था, जिसके बाद अनुपम मित्तल के खिलाफ कानूनी कार्यवाही शुरू हुई थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल अनुपम को 8 हफ्तों के लिए गिरफ्तारी या किसी भी सख्त कार्रवाई से सुरक्षा दे रखी है।
प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी
सुप्रीम कोर्ट अब इस कानूनी पहलू की जांच कर रहा है कि क्या मैचमेकिंग वेबसाइटों को उनके यूजर्स के किए गए फ्रॉड के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। इससे पहले तेलंगाना हाई कोर्ट ने अनुपम मित्तल के खिलाफ केस खत्म करने से मना कर दिया था लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट को इस पर दोबारा और बारीकी से विचार करने के निर्देश दिए हैं।
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अनुपम मित्तल ने क्या कहा?
इस पूरे विवाद पर अनुपम मित्तल ने दलील दी है कि उनका प्लेटफॉर्म सिर्फ लोगों को आपस में मिलाने का जरिया है। उनका कहना है कि अगर दो लोग मिलने के बाद निजी तौर पर (जैसे व्हाट्सएप आदि पर) बात करते हैं और वहां कुछ गलत होता है, तो इसके लिए कंपनी को दोषी नहीं माना जाना चाहिए।
