डिजिटल इंडिया के युग में भी देश की ज्यादातर ग्राम पंचायतें अभी भी पुरानी फाइलों और कागजी रिकॉर्ड पर निर्भर हैं। आर्थिक सर्वे 2025-26 की रिपोर्ट बताती है कि देश की करीब 66 प्रतिशत पंचायतों के पास 100 फीसीदी डिजिटल रिकॉर्ड नहीं हैं, जबकि 34 प्रतिशत से भी कम पंचायतों में ही डिजिटल रिकॉर्ड प्रभावी रूप से उपलब्ध हैं।
आर्थिक सर्वे की रिपोर्ट बताती है कि जमीनी स्तर पर डिजिटाइजेशन की स्थिति अभी भी संतोषजनक नहीं है। ग्रामीण और आकांक्षी जिलों के पंचायत भवनों में डिजिटल सुविधाएं समान रूप से नहीं पहुंची हैं। डिजिटल रिकॉर्ड की कमी के कारण पंचायतों में पारदर्शिता, जवाबदेही और योजना को जमीन पर लागू कराने को लेकर दिक्कतें सामने आती हैं।
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आर्थिक सर्वे की रिपोर्ट क्या कहती है?
सिर्फ 34 प्रतिशत से पंचायतों में डिजिटल रिकॉर्ड और फाइलें मौजूद हैं। देश की कुल 2.68 लाख ग्राम पंचायतों में से सिर्फ 2.54 लाख पंचायतों ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए e-ग्राम स्वराज पोर्टल पर ग्राम पंचायत डेवलेपमेंट प्लान (GPDP) अपलोड किया है। हालांकि e-Gram स्वराज और सेंट्रल प्लान स्कीम मॉनिटरिंग सिस्टम (PFMS) इंटीग्रेशन जैसे कई पहल किए जा रहे हैं।
डिजिटल नहीं तो कैसे हो रहा है कामकाज?
आर्थिक सर्वे 2025-2026 में कहा गया है कि कई राज्यों में पंचायतें अभी भी मैन्युअल रजिस्टर, फाइलों और हाथ से लिखे हिसाब-किताब पर निर्भर हैं। कई पंचायत मित्रों और अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल सिस्टम न होने की वजह से भ्रष्टाचार की आशंका बनी रहती है और विकास कार्यों की निगरानी मुश्किल हो जाती है।
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सरकार किन टूल्स का इस्तेमाल कर रही है?
आर्थिक सर्वे में कहा गया है कि सभासार (SabhaSaar) जैसे AI टूल्स, मैन्युअल डॉक्यूमेंटेशन में लगने वाले समय और मेहनत को कम करने में मददगार साबित हो रहे हैं। नवंबर 2025 तक, 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लगभग 1 लाख ग्राम पंचायतों (GPs) ने 1.38 लाख ग्राम सभाएं आयोजित कीं।
सभासार के जरिए बैठकों का ऑटोमैटिक मिनट्स तैयार किया गया। सरकार e-पंचायत मिशन मोड प्रोजेक्ट पर जोर दे रही है। जानकारों का कहना है कि जब तक पंचायतें आत्मनिर्भर नहीं होंगी और पूरी तरह डिजिटल नहीं होंगी, पारदर्शिता को लेकर सवाल भी बने रहेंगे।
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डिजिटल इंडिया के लिए क्या कर रही है सरकार?
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी सचिव एस कृष्णन के मुताबिक देश में अब इंटरनेट कनेक्शन 107 करोड़ से ज्यादा हो गए हैं। UPI के जरिए रोजाना करीब 75 करोड़ ट्रांजेक्शन हो रहे हैं। ब्रॉडबैंड यूजर्स की संख्या भी करीब 100 करोड़ तक पहुंच गई है। सरकार का डिजिटल दस्तावेज प्लेटफॉर्म डिजीलॉकर अब 70 करोड़ से ज्यादा लोगों द्वारा इस्तेमाल किया जा रहा है।
UPI को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने दुनिया का सबसे बड़ा रीयल-टाइम पेमेंट सिस्टम बताया है। सरकार उन क्षेत्रों में जोर दे रही है, जहां इंटरनेट की पहुंच अभी पूरी तरह नहीं हो पाई है। पंचायतों का डिजिटलीकरण आज भी सरकार के लिए चुनौती बनी हुई है।


