मिडिल ईस्ट में तेजी से बदलते हालात के बीच भारत ने अपनी कुटनीतिक बातचीत बढ़ा दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक और कुवैत के क्राउन प्रिंस शेख सबा अल-खालिद अल-हमद अल-मुबारक अल-सबाह से फोन पर बात की। बता दें कि एक दिन पहले उन्होंने सऊदी अरब, बहरीन और जॉर्डन के टॉप नेताओं से भी बातचीत की थी।
ईरान और अमेरिका के बीच शुरू हुआ संघर्ष अब पूरे खाड़ी इलाके में फैलता दिख रहा है। कई देशों ने एहतियात के तौर पर अपने एयरस्पेस बंद कर दिए हैं। तेल की सप्लाई और एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर भी खतरे में हैं। इस संवेदनशील माहौल में भारत सरकार की सबसे बड़ी चिंता इन इलाके में रहने वाले भारतीय नागरिकों की सुरक्षा है।
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ओमान-कुवैत नेताओं से क्या बात हुई?
ओमान और कुवैत के नेताओं के साथ अपनी बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इलाके की सुरक्षा की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने खाड़ी देशों में हो रहे हमलों पर चिंता जताई और उनसे वहां रहने वाले भारतीय समुदाय की सुरक्षा पक्का करने की अपील की। भारत ने यह साफ कर दिया है कि इलाके में शांति और स्थिरता जल्द से जल्द वापस आना जरूरी है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, लगभग 1 करोड़ भारतीय मिडिल ईस्ट के अलग-अलग देशों में काम और व्यापार में लगे हुए हैं। इसलिए, मौजूदा संकट का सीधा असर बड़ी संख्या में भारतीय परिवारों पर पड़ सकता है। मंत्रालय ने कहा कि सरकार स्थिति पर करीब से नजर रख रही है और जरूरत के हिसाब से सभी जरूरी कदम उठाएगी।
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इन देशों के नेताओं से भी हुई बातचीत
सोमवार को PM Modi ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और बहरीन के किंग हमाद बिन ईसा अल खलीफा से भी बात की। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने हमलों की निंदा की, इलाके में शांति की जरूरत पर जोर दिया और इस मुश्किल समय में भारतीय समुदाय का ध्यान रखने के लिए सऊदी लीडरशिप को धन्यवाद दिया। इसी क्रम में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सऊदी अरब, कुवैत, बहरीन, कतर, संयुक्त अरब अमीरात, ईरान और इजरायल के अपने समकक्ष नेताओं से भी संपर्क किया है।
