अमेरिका-इजरायल के साथ जंग के बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने तीसरी बार ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से बात की। शुक्रवार को दोपहर जयशंकर ने अपने एक्स अकाउंट पर लिखा, 'कल रात ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के साथ एक बार और बात हुई। द्विपक्षीय मामलों के साथ-साथ ब्रिक्स से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई।  


28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद एस. जयशंकर ने 5 मार्च को अराघची से बात की थी। तब उन्होंने सिर्फ इतना लिखा था, आज दोपहर ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के साथ बात हुई।'

 

पांच दिन बाद यानी 10 फरवरी को दोबारा बातचीत हुई। इस बार मैसेज का आकार थोड़ा बड़ा हो गया। जयशंकर ने एक्स पर लिखा, आज शाम ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के साथ चल रहे संघर्ष से जुड़े नए डेवलपमेंट पर डिटेल में बातचीत हुई। हम संपर्क में रहने पर सहमत हुए हैं।' तीसरी बार बातचीत शुक्रवार यानी 12 मार्च को तीसरी बार बातचीत हुई।

 

 

 

 

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खाड़ी देशों के नेताओं से पीएम ने कब की बात?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक मार्च को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद से फोन पर बात की। पीएम मोदी ने यूएई पर हुए हमलों की निंदा की। अगले दिन उन्होंने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बात की। 2 मार्च को ही पीएम मोदी ने बहरीन के किंग हमाद बिन ईसा अल खलीफा, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला II से फोन पर बात की। वहां हुए हमले की निंदा की।

 

 

 

 

तीन मार्च को पीएम मोदी ने ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक और कुवैत के क्राउन प्रिंस शेख सबा अल-खालिद अल-हमद अल-मुबारक अल-सबाह को फोन मिलाया। थोड़ी ही देर में कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी के साथ हुई बातचीत का अपडेट आ गया। सभी नेताओं के साथ बातचीत में पीएम मोदी ने कहा कि भारत वहां के लोगों के साथ खड़ा है। बातचीत और कूटनीति से शांति और स्थिरता पर जोर दिया। 

 

 

 

 

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14 दिन बाद ईरान से पीएम मोदी ने की बात

जंग शुरू होने के करीब 14 दिन बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से फोन पर बात की। भारत में गैस संकट और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बाद होने के बाद पीएम मोदी की यह बातचीत बेहद अहम हो जाती है। गुरुवार की रात प्रधानमंत्री मोदी ने अपने एक्स अकाउंट पर लिखा, 'ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेशकियन से क्षेत्र के गंभीर हालात पर चर्चा हुई। बढ़ते तनाव और आम लोगों की जान जाने के साथ-साथ नागरिक ढांचे को हुए नुकसान पर गहरी चिंता जताई। भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, सामान और ऊर्जा के बिना रुकावट आने-जाने की जरूरत भारत की मुख्य प्राथमिकता है। शांति और स्थिरता के लिए भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया और बातचीत और कूटनीति की अपील की।'