पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में पहले चरण के मतदान से ठीक 24 घंटे पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सुप्रीम कोर्ट से कड़ी फटकार मिली। सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी में I-PAC के सह-संस्थापक प्रतीक जैन के घर पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की रेड के दौरान मुख्यमंत्री के दखल को लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा बताया। कोर्ट ने कड़े शब्दों में कहा कि संवैधानिक पद पर बैठा कोई व्यक्ति इस तरह से जांच प्रक्रिया में रुकावट नहीं डाल सकता। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि डॉ. भीमराव आंबेडकर ने भी ऐसा नहीं सोचा होगा कि एक मुख्यमंत्री ऐसा काम करेंगी।
मामला जनवरी 2026 का है, जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम चुनावी रणनीतिकार प्रतीक जैन के घर पर छापेमारी कर रही थी। इस दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद मौके पर पहुंच गईं और जांच में दखल दिया। सुप्रीम कोर्ट ने इस आचरण को असाधारण बताते हुए ममता सरकार के कामकाज के तरीके पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
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जस्टिस पीके मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए ऐतिहासिक टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा, 'यह एक ऐसे व्यक्ति की कार्रवाई है जिसने मुख्यमंत्री होते हुए भी लोकतंत्र को खतरे में डालने के लिए पूरे सरकारी तंत्र का इस्तेमाल किया।' बेंच ने आगे कहा कि हमारे संविधान निर्माताओं और डॉ. बीआर आंबेडकर ने भी कभी यह नहीं सोचा होगा कि आजाद भारत में ऐसी स्थिति आएगी जब एक मौजूदा मुख्यमंत्री किसी आपराधिक जांच को रोकने के लिए खुद परिसर में दाखिल हो जाएगा।
सबूतों के साथ छेड़छाड़ का गंभीर आरोप
गौरतलब है कि 8 जनवरी को कोयला तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में ED प्रतीक जैन के घर तलाशी ले रही थी। ED का आरोप है कि ममता बनर्जी ने रेड के बीच घुसकर वहां से महत्वपूर्ण दस्तावेज और कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस हटा दिए, जिससे जांच के सबूत प्रभावित हुए। हालांकि, ममता बनर्जी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने केवल अपनी पार्टी (TMC) से संबंधित दस्तावेज लेने गई थीं और यह पूरी कार्रवाई राजनीतिक बदले से प्रेरित है।
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सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल की वर्तमान परिस्थितियों को असाधारण करार देते हुए कहा कि यह कोई साधारण कानूनी लड़ाई नहीं है। कोर्ट ने तल्ख लहजे में कहा, 'बंगाल में जो कुछ भी हो रहा है, उससे हम अपनी आंखें बंद नहीं कर सकते। राज्य की व्यावहारिक स्थिति पर गौर करना जरूरी है।' फिलहाल, अदालत ED की उस याचिका पर सुनवाई कर रही है जिसमें ममता बनर्जी और उनके सहयोगियों के खिलाफ CBI जांच की मांग की गई है।
