शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती एक बार फिर चर्चा में हैं। उन्होंने वाराणसी में एक बड़ी घोषणा की है। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि चतुरंगिणी सेना का गठन किया गया है। इसके लिए श्रीशंकराचार्य ने 27 सदस्यीय एक चतुरंगिणी सभा का गठन किया है। उन्होंने इस सेना के काम करने के तरीके के बारे में बात करते हुए कहा कि रोको टोको और ठोको की तर्ज पर काम करेगी। यह सेना आगे चलकर गोरक्षा के लिए काम करेगी। उन्होंने बताया कि यह पहल हिंदू समाज में फैले भय को दूर करने और सत्य के साथ खड़े होने का साहस पैदा करने के लिए की जा रही है।

 

इस सेना का ड्रेस कोड पीला वस्त्र और हाथ में परशु होगा।  शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने बताया कि चतुरंगिनी सेना में सैनिकों की संख्या 2 लाख 18 हजार के करीब होगी, जिसमें महिलाओं की भागीदारी भी होगी। इस सेना के पास अस्त्र-शस्त्र भी होंगे।  शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती  ने कहा कि इस सेना में हर एक सनातनी की भागीदारी होगी। सेना के सैनिक फरसे,लाठी, तलवार और एयर बंदूकों से लैस होंगे, जो साधु-संतों के साथ-साथ सामान्य सनातनी हिन्दुओं के अधिकारों की रक्षा करेगी।

 

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10 महीने में बन जाएगी सेना

 शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती इस सेना का एलान करते हुए बताया कि यह सेना 10 महीने में धरातल पर उतर जाएगी। इसके लिए उन्होंने 2 लाख 18 हजार 700 सदस्य बनाने का टारगेट रखा है। उन्होंने कहा कि 27 सदस्यों वाली चतुरंगिणी सभा अगले 10 महीनों के भीतर विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय रूप से काम करती हुई नजर आएगी और लोगों के बीच विश्वास व सुरक्षा की भावना को मजबूत करेगी। 

गौ रक्षा के लिए करेगी काम

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अपने प्लान के बारे में बताते हुए कहा कि इस सेना का आगे विस्तार किया जाएगा और यह सेना गौरक्षा के लिए काम करेगी। उन्होंने कहा कि चतुरंगिणी सेना को गौ रक्षा के लिए विस्तारित करने की योजना है। 

टोको, रोको और ठोको पर क्या बोले?

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि आज के समय में हिंदू समाज में कई लोग भय के कारण सच का साथ नहीं दे पाते और मजबूरी में गलत का समर्थन करने लगते हैं। ऐसे में चतुरंगिनी सेना का मुख्य उद्देश्य निर्बलों का बल बनना और समाज में न्याय स्थापित करना होगा। उन्होंने बताया कि संगठन के काम करेने का तरीका 'टोको, रोको और ठोको होगा।' हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि पहले किसी गलत काम को टोका जाएगा और फिर उसको रोकने की कोशिश की जाएगी। अगर फिर भी कोई गलत काम करेगा तो उसे ठोका जाएगा और ठोकने का मतलब उसे मारना नहीं है। उन्होंने कहा कि ठोकने का मतलब उसकी शिकायत करना और कानूनी कार्रवाई करना है। 

 

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फरसे को लेकर क्या बोले?

फरसा को लेकर जब अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि यह भगवान परशुराम जी ने धारण किया था। उन्होंने कहा कि भगवान परशुराम ने पहले वेदों का अध्ययन किया और पपस्या में जीवन बिताया। उनके आश्रम में गाये थीं और जब सहस्त्रार्जुन नामक राजा ने उन पर आक्रमण कर गायों को कष्ट पहुंचाया, तब उन्होंने उनकी रतक्षा के लिए फरसा धारण किया।