ओडिशा हाई कोर्ट में एक बिजली कनेक्शन का ऐसा मुद्दा पहुंचा, जिसे स्थानीय स्तर पर ही निपटाया जा सकता था। एक शख्स, बिजली कनेक्शन कटने से इतना प्रताड़ित हुआ कि उसे मजबूरी में हाई कोर्ट में अर्जी दायर करनी पड़ी।
भद्रक जिले के बालासोर में एक शख्स के घर की बिजली गांव वालों ने काट दी। शख्स ने दुर्गा पूजा के लिए चंदा में 5000 रुपये नहीं दे पाया था। ओडिशा हाईकोर्ट ने इस मामले में गांव वालों को फटकारा और बिजली सुविधाएं बहाल करने का तत्काल निर्देश दिया।
जस्टिस सावित्री राठो ने कहा कि बिजली एक बुनियादी सुविधा है, जिसे किसी को भी नहीं रोका जा सकता। कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया कि दो हफ्तों के अंदर बिजली कनेक्शन बहाल कराया जाए। कोर्ट ने कहा है कि शांतिपूर्ण तरीके से इस विवाद का हल निकाला जाए।
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कोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस सावित्री राठो ने 20 मार्च को सुनवाई के दौरान कहा कि बिजली बुनियादी जरूरत है। गांव वाले बिजली के अधिकारियों को चंदा न चुकाने की वजह से शख्स को बिजली कनेक्शन देने से रोक नहीं सकते हैं। यह गैरकानूनी है। कोर्ट ने साफ कहा कि गांव वाले याचिकाकर्ता दैतारी साहू के घर की बिजली लाइन जोड़ने से बिना किसी वजह के रोक रहे हैं। उन्हें न तो कोई अधिकार है कि वे बिजली बहाल करने से रोकें। सामाजिक दबाव बुनियादी अधिकारों से ऊपर नहीं हो सकता।
'2 हफ्ते के भीतर जुड़ेगा कनेक्शन'
बालासोर के एसपी को निर्देश दिया गया है कि पर्याप्त पुलिस बल लेकर गांव जाएं। पुलिस बल में महिला पुलिसकर्मी भी शामिल हों। उनकी तैनाती के दो हफ्तों में बिजली कनेक्शन बहाल कराएं। कोर्ट ने कहा कि एसपी पहले गांव वालों और याचिकाकर्ता के बीच बातचीत के जरिए विवाद हल कराने की कोशिश करना चाहिए, क्योंकि याचिकाकर्ता को गांव में ही रहना है।
दो साल से बिजली के लिए तरस रहा शख्स
दैतारी साहू का घर इंदिरा आवास योजना के तहत बना था। अक्टूबर 2023 में दुर्गा पूजा चंदे के 5000 रुपये न देने पर गांव वालों ने उसकी बिजली काट दी। उसके बाद दो साल से ज्यादा समय से घर बिना बिजली का रहा।
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अधिकारियों की कोशिश बार-बार हुई फेल
सितंबर 2024 में साहू ने बिजली जोड़ने के लिए अर्जी दी। फरवरी 2025 में हाईकोर्ट ने अधिकारियों को विचार करने को कहा। अप्रैल-मई 2025 में इंजीनियर और पुलिस कई बार गांव गए, लेकिन हर बार गांव वालों के विरोध की वजह से लौट आए। सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर ने पत्र लिखकर बताया कि ग्रामीण महिलाओं ने ऐसा विरोध किया, हिंसा होने की आशंका में काम नहीं हो पाया और लौटना पड़ा।
190 रुपये जमा करने के बावजूद बिजली नहीं मिली है। दैतारी साहू ने बिजली जोड़ने के 190 रुपये पहले ही जमा कर दिए थे, फिर भी चंदे के दबाव की वजह से बिजली नहीं मिल पाई। ग्रामीण कनेक्शन जोड़ने का बार-बार विरोध किया। हिंसक विरोध के डर से अधिकारी वहां जाने से कतराते रहे।
अब आगे क्या?
हाई कोर्ट में एक और रिट याचिका, 30 मार्च 2026 को सुनवाई के लिए लंबित है। याचिका में बिजली सुविधा बहाल करने की मांग की गई है। अभी स्थानीय स्तर पर ग्रामीण पंचायतें ऐसे फैसले लेती हैं। हाई कोर्ट ने कहा है कि त्योहार के नाम पर कानून की उपेक्षा नहीं की जा सकती है। बिजली बुनियादी जरूरत है।