बॉलीवुड के मशहूर फिल्म निर्देशक विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी भट्ट को 30 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी वाले मामले में सुप्रीम कोर्ट ने नियमित जमानत दे दी है। यह पूरा मामला उदयपुर के एक बड़े डॉक्टर, अजय मुर्डिया से जुड़ा है, जो अपनी स्वर्गवासी पत्नी की यादों को पर्दे पर जिंदा रखने के लिए विक्रम भट्ट के साथ मिलकर चार फिल्में बनाना चाहते थे। राजस्थान हाई कोर्ट से राहत न मिलने के बाद, अब देश की सबसे बड़ी अदालत ने इस फिल्मी जोड़े को जमानत देकर बड़ी राहत दी है।

 

नवंबर 2025 में उदयपुर के भूपालपुरा पुलिस स्टेशन में एक एफआईआर दर्ज हुई थी। डॉक्टर मुर्डिया का आरोप है कि उन्होंने फिल्मों और डॉक्युमेंट्री के लिए विक्रम भट्ट की कंपनी के साथ समझौता किया था। विक्रम ने वादा किया था कि 7 करोड़ की शुरुआती फंडिंग और कुल 47 करोड़ में चार फिल्में तैयार हो जाएंगी।

 

शिकायत के मुताबिक, लगभग 30 करोड़ लेने के बाद भी काम पूरा नहीं हुआ और पैसे हड़प लिए गए। पुलिस जांच में यह भी कहा गया कि पैसों की हेराफेरी के लिए फर्जी बिलों और कागजों का सहारा लिया गया, जिस वजह से दिसंबर 2025 में राजस्थान पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार किया था।

 

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विक्रम भट्ट का पक्ष

विक्रम भट्ट ने शुरू से ही इन सभी आरोपों को गलत बताया है। उनका कहना है कि यह कोई आपराधिक मामला नहीं बल्कि सिर्फ पैसो के लेनदेन का झगड़ा है। उनके वकील ने दावा किया कि सारे भुगतान दोनों पक्षों की जानकारी में हुए थे और कोई भी फर्जी बिल इस्तेमाल नहीं हुआ था।

 

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उनका कहना है कि पुलिस ने उन्हें अपना पक्ष रखने का कोई मौका ही नहीं दिया और बिना किसी नोटिस के सीधे कार्रवाई करके उन्हें फंसाया गया है। हाई कोर्ट ने उनकी एफआईआर खत्म करने की अर्जी पहले ही खारिज कर दी थी, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत के बाद उन्हें बड़ी राहत मिली है। इस मामले की कानूनी जांच आगे चलती रहेगी।