तेलंगाना हाई कोर्ट ने पति की हत्या की दोषी एक महिला पर 500 रुपये का जुर्माना लगाया। निचली अदालत से मिली चार साल की कारावास की सजा को खत्म कर दिया। हाई कोर्ट ने पाया कि यह हमला सुनियोजित नहीं था। न ही जानबूझकर चाकू से हमला किया। महिला ने आवेश में आकर पति पर चाकू से हमला किया। इस कारण यह हत्या की श्रेणी में नहीं आता है। 

 

दरअसल, तेलंगाना में एक शख्स बच्चों को खजूर देने की खातिर अपनी ससुराल पहुंचा। यहां उसकी ससुराल वालों से बहस हुई। बाद में वह चला गया। मगर कुछ देर बाद नग्न अवस्था में दोबारा ससुराल पहुंचा। ससुराल वालों के साथ गाली-गलौच की और परिवार को धमकाया भी। कहासुनी अधिक बढ़ने पर पत्नी ने अचानक चाकू से हमला कर दिया। अधिक चोट लगने की खातिर व्यक्ति की मौत हो गई।  

 

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अदालत ने क्यों दी सजा से राहत? 

मामला जब कोर्ट पहुंचा तो पहले इसे आईपीसी यानी भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत अपराध माना गया। हालांकि बाद में निष्कर्म निकाला गया कि घटना आवेश और त्वरित प्रतिक्रिया का परिणाम थी। इसमें जानबूझकर मारने या साजिश रचने जैसा कुछ नहीं है। निचली अदालत ने आईपीसी की धारा 304 भाग II के तहत महिला को दोषी ठहराया। अदालत ने चार साल की सजा और 500 रुपये का जुर्माना लगाया। 

 

निचली अदालत के फैसले के बाद महिला ने तेलंगाना हाई कोर्ट का रुख किया। अदालत ने पाया कि महिला ने आवेश में और बहस के दौरान यह कदम उठाया है। घटना सोची-समझी रणनीति का हिस्सा नहीं है। अदालत ने उसकी दोषसिद्धि को बरकरार रखा। परिस्थितियों के लिहाज से हाई कोर्ट ने चार साल की कारावास की सजा से राहत दी और निचली अदालत के 500 रुपये जुर्माने को बरकरार रखा। हालांकि महिला यह जुर्माना राशि पहले ही अदा कर चुकी है।

 

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हाई कोर्ट ने किस अपवाद का लिया सहारा

तेलंगाना हाई कोर्ट ने इस मामले में आईपीसी की धारा 300 के अपवाद 4 का सहारा लिया। इसके तहत किसी हत्या को तब तक मर्डर नहीं माना जाएगा, अगर वह अचानक हुई लड़ाई, आवेश में आकर और बिना किसी पूर्व साजिश के हुई है। आरोपी ने कोई अनुचित लाभ न उठाया हो या क्रूर अथवा असामान्य तरीके से न हुई हो।