UGC बिल बीजेपी के गले की फांस बनता जा रहा है। सोशल मीडिया से शुरू हुई सरकार के खिलाफ लड़ाई अब जमीन पर उतरती हुई दिखाई दे रही है। जहां इस मामले में सरकार और विपक्ष दोनों ही चुप हैं, वहीं तमाम संगठन और छात्र जगह जगह पर सड़कों पर भी उतर रहे हैं।
हालांकि, कुछ मामलों में बीजेपी के अपनी ही पार्टी के नेता भी पार्टी का विरोध करने पर उतारू हो गए हैं। जहां एक तरफ बीजेपी नेता और गोण्डा से बीजेपी विधायक ने यूजीसी बिल के विरोध में अपनी आवाज़ उठाई है, वहीं रायबरेली के बीजेपी नेता रमेश बहादुर सिंह और गौरक्षा दल अध्यक्ष महेंद्र पाण्डेय ने बीजेपी के सवर्ण नेताओं को चूडियां भेजी हैं।
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इसी तरह से सोशल मीडिया पर एक और वीडियो भी वायरल हो रहा है जिसमें पीएम मोदी और अमित शाह के पोस्टर पर लोग स्याही फेंक कर अपना विरोध जता रहे हैं। अभी यह नहीं पता है कि यह वीडियो कहां का है, लेकिन यह बात जाहिर है कि लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है।
अलंकार अग्निहोत्री ने दिया था इस्तीफा
इसके पहले पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने भी यूजीसी बिल के विरोध में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने राज्यपाल को लिखी अपनी चिट्ठी में यूजीसी के अपने नियमों को रोलेट ऐक्ट जैसा बताया था। उनका यह भी कहना था कि ब्राह्मण जनप्रतिनिधियों ने इस पर कोई विरोध नहीं जताया जिससे यह वर्ग अनाथ महसूस कर रहा है।
उन्होंने अपनी चिट्ठी में लिखा था, 'ब्राह्मण और सजातीय जन प्रतिनिधि अपने सजातीय समाज के प्रति जवाबदेह न होकर किसी कॉरपोरेट कंपनी के सेवक बनकर रह गए हैं। अब समय आ गया है कि ब्राह्मण और संपूर्ण सामान्य वर्ग के प्रतिनिधित्व के लिए वैकल्पिक राजनीतिक व्यवस्था का निर्माण हो जिससे कि सामान्य वर्ग के हितों की रक्षा की जा सके और केंद्र सरकार और राज्य सरकार में उपस्थित भ्रम की स्थिति दूर की जा सके।'
कुमार विश्वास ने पोस्ट की कविता
जानेमाने कवि कुमार विश्वास ने भी स्वर्गीय रमेश रंजन की पंक्तियों को एक्स पर पोस्ट करते हुए बीजेपी पर तंज कसा। उन्होंने लिखा, 'चाहे तिल लो या ताड़ लो राजा, राई लो या पहाड़ लो राजा, मैं अभागा ‘सवर्ण’ हूं मेरा,
रौंया-रौंया उखाड़ लो राजा ..।'
क्या बोले प्रतीक भूषण
वहीं गोण्डा से बीजेपी विधायक और बृजभूषण शरण सिंह के बेटे ने कहा, 'इतिहास के दोहरे मापदंडों पर अब गहन विवेचना होनी चाहिए। जहां बाहरी आक्रांताओं और उपनिवेशी ताकतों के भीषण अत्याचारों को ‘अतीत की बात’ कहकर भुला दिया जाता है जबकि भारतीय समाज के एक वर्ग को निरंतर ‘ऐतिहासिक अपराधी’ के रूप में चिह्नित कर वर्तमान में प्रतिशोध का निशाना बनाया जा रहा है।'
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सोमवार को पहलवान योगेश्वर दत्त ने भी इसका विरोध किया था और पांडवों का उदाहरण देकर अपनी बात को सरकार तक पहुंचाने की कोशिश की थी। इसके अलावा यूपी विधान परिषद के सदस्य देवेंद्र प्रताप सिंह ने इसी मुद्दे को लेकर यूजीसी को चिट्ठी लिखी है। उन्होंने इसे लिखा है कि इससे उच्च शिक्षण संस्थानों में पठन-पाठन का माहौल समाप्त हो जाएगा। देवेंद्र सिंह ने अपील की है कि नियम बनाते समय संतुलन का ध्यान दिया जाए ताकि दलित और पिछड़े वर्ग के साथ अन्याय न हो और सामान्य वर्ग के छात्र असुरक्षित न हों।
