उन्नाव से भारतीय जनता पार्टी के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की सजा निलंबित नहीं होगी। पीड़िता का पिता की पुलिस हिरासत में मौत हुई थी, जिसके आरोप कुलदीप सेंगर पर लगे थे। कुलदीप सेंगर को हिरासत में मौत मामले में भी सजा सुनाई गई थी। कोर्ट के फैसले को रद्द करने के लिए सेंगर ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। दिल्ली हाई कोर्ट ने यह याचिका रद्द कर दी है।
कुलदीप सिंह सेंगर, पीड़िता के पिता की मौत का दोषी है। दिल्ली हाई कोर्ट ने ही उसे 10 साल की सजा सुनाई थी। इसी सजा को निलंबित करने के लिए कुलदीप सिंह ने कोर्ट में अपील दायर की थी। कोर्ट ने अपील रद्द कर दी है।
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किस मामले में खारिज हुई है याचिका?
अप्रैल 2018 में नाबालिग बच्ची के पिता उन्नाव जिला अदालत में सुनवाई के लिए जा रहे थे। रास्ते में उन्हें गाड़ी से खींचकर दिनदहाड़े पीटा गया, अधमरी हालत में छोड़ दिया गया। अगले दिन पुलिस ने पीड़िता के घायल पिता को ही गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने दावा किया कि उसके पास अवैध हथियार थे, इसलिए गिरफ्तार किया गया है। पुलिस हिरासत में भी उन्हें पीटा गया, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उसके शरीर पर गहरे जख्म के कई निशान मिले।
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2019 में मिली थी उम्रकैद की सजा
अगस्त 2019 में इस केस में 5 अलग-अलग मामलों में सुनवाई हुई। पीड़िता के पिता की मौत के मामले पर भी कोर्ट ने सुनवाई की। सारे मामलों को यूपी से दिल्ली ट्रांसफर कर दिया गया। कुलदीप सिंह सेंगर को दोषी पाया गया। उसने पीड़िता के साथ बलात्कार किया था। दिसंबर 2019 में उसे आजीवन कारावास की सजा मिला। 4 मार्च 2020 को पीड़िता के पिता की हत्या की साजिश रचने में भी उसके खिलाफ सजा सुनाई गई।
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कोर्ट ने क्या कहा है?
जून 2024 में दिल्ली हाई कोर्ट में उसने अपनी सजा रद्द करने की अर्जी दी थी, वह भी अदालत ने खारिज कर दी। जस्टिस रविंद्र डुडेजा ने कुलदीप सिंह सेंगर के इतिहास को देखते हुए याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता भले ही 7.5 साल की सजा काट चुका है लेकिन कई याचिकाओं में देरी सिर्फ इसलिए हुई क्योंकि याचिकार्ता ने सजा रद्द करने जैसी याचिकाएं पहले ही दायर की हैं। हाई कोर्ट की एक डिवीजन बेंच ने कुलदीप सिंह सेंगर सजा निलंबित की थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था।
