भारत सरकार ने अपनी पहली नेशनल काउंटर-टेररिज्म पॉलिसी प्रहार (PRAHAAR) जारी की है। इस नई स्ट्रेटेजी में साफ कहा गया है कि देश के अंदर मजबूत सुरक्षा उपायों के अलावा इंटरनेशनल और रीजनल सहयोग बढ़ाना भी जरूरी होगा। क्योंकि बॉर्डर पार के आतंकवादी संगठन हमलों की प्लानिंग करने के लिए लोकल नेटवर्क, लॉजिस्टिक सपोर्ट और इलाके की जानकारी का इस्तेमाल करते हैं।
पॉलिसी जारी करते हुए गृह मंत्रालय (MHA) ने कहा कि भारत लंबे समय से स्पॉन्सर्ड क्रॉस-बॉर्डर टेररिज्म का सामना कर रहा है। कई जिहादी टेररिस्ट ऑर्गेनाइजेशन और उनके साथी भारत में हमलों की प्लानिंग करते हैं, सहयोग करते हैं और उन्हें अंजाम देने की कोशिश करते हैं। सरकार के मुताबिक, टेररिस्ट नेटवर्क पड़ोसी इलाकों में समय-समय पर अस्थिरता और कमजोर गवर्नेंस का फायदा उठाकर फलते-फूलते हैं। कुछ देशों पर टेररिज्म को पॉलिसी के टूल के तौर पर इस्तेमाल करने का भी आरोप लगा है।
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हालांकि सरकार ने यह भी साफ किया कि भारत आतंकवाद को किसी धर्म, जाति या राष्ट्रीयता से नहीं जोड़ता और हर प्रकार की हिंसा की बिना शर्त निंदा करता है। देश की नीति जीरो टॉलरेंस पर आधारित रहेगी। यानी आतंकवाद के प्रति बिल्कुल भी ढील नहीं दी जाएगी।
किन संगठनों से खतरा?
सरकार ने चेतावनी दी कि भारत भी अल कायदा और इस्लामिक स्टेट जैसे ग्लोबल आतंकवादी संगठनों के निशाने पर रहा है। ये संगठन स्लीपर सेल, सोशल मीडिया प्रोपेगैंडा और ऑनलाइन भर्ती के जरिए हिंसा भड़काने की कोशिश करते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि विदेश से काम करने वाले आतंकवादी हैंडलर ड्रोन, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग, डार्क वेब और क्रिप्टो वॉलेट जैसी मॉडर्न टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके अपनी एक्टिविटी बढ़ा रहे हैं, खासकर पंजाब और जम्मू-कश्मीर जैसे सेंसिटिव इलाकों में। केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल या न्यूक्लियर मटीरियल तक उनकी पहुंच को रोकना भी एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बताई गई है।
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हमले के बाद सरकार की योजना
नई पॉलिसी में हमले के बाद राहत और रिहैबिलिटेशन पर भी खास जोर दिया गया है। इस पॉलिसी के तहत प्रभावित लोगों को डॉक्टर, साइकोलॉजिस्ट, वकील, सामाजिक संगठन, एनजीओ और धार्मिक के साथ सामुदायिक नेता मदद करेंगे। जबकि सिविल एडमिनिस्ट्रेशन फिर से बनाने और नॉर्मल हालात बहाल करने के लिए जिम्मेदार होगा। सरकार ने यह भी कहा कि इंटेलिजेंस शेयर करने के लिए एजेंसियों के बीच सहयोग बढ़ाया जाएगा और कानूनी मदद, एक्सट्रैडिशन एग्रीमेंट सहित दूसरे देशों के साथ जॉइंट वर्किंग ग्रुप जैसे सिस्टम को मजबूत किया जाएगा।
