प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को नई दिल्ली में नए भवन, 'सेवा तीर्थ' का औपचारिक उद्घाटन किया है। यह नया कॉम्प्लेक्स अब प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का नया पता बन गया है। आजादी के बाद ऐसा पहली बार हो रहा है, जब प्रधानमंत्री कार्यालय का पता बदला है।  पहले यह दक्षिण ब्लॉक में था, अब प्रधानमंत्री कार्यालय सेवा तीर्थ में शिफ्ट हो गया है।

सेवा तीर्थ में पीएमओ के अलावा राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और कैबिनेट सचिवालय भी स्थित हैं। इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने कर्तव्य भवन-1 और कर्तव्य भवन-2 का भी उद्घाटन किया। इन भवनों में कई महत्वपूर्ण मंत्रालय ट्रांसफर हुए हैं। 

 

नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक 1931 से सत्ता के केंद्र रहे हैं। देश के विकास की रूपरेखा यहां से तैयार होती रही है। सरकार की योजना नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक में इन प्रतिष्ठित इमारतों को 'युग युगीन भारत राष्ट्रीय संग्रहालय' में परिवर्तित करने की है। यह भारत की सभ्यतागत यात्रा को दर्शाने वाला एक विश्व स्तरीय संग्रहालय होगा।

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सेवा तीर्थ में किन मंत्रालयों को मिली जगह?

  • वित्त मंत्रालय
  • रक्षा मंत्रालय
  • स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय
  • शिक्षा मंत्रालय
  • संस्कृति मंत्रालय
  • कानून एवं न्याय मंत्रालय
  • कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय
  • कई अन्य मंत्रालयों को भी जगह मिली है

क्यों बनाया गया है सेवा तीर्थ?

पहले ये मंत्रालय सेंट्रल विस्टा इलाके में अलग-अलग जगहों पर थे। इमारतें पुरानी हो गईं थीं। नई जरूरतों की वजह से काम-काज में परेशानी होती थी। मंत्रालयों में आपसी तालमेल नहीं बन पाता था। अलग-अलग मंत्रालयों के भवनों पर ज्यादा खर्च होता था। काम-काज के तरीके भी प्रभावित हो रहे थे। अब ये नए आधुनिक भवन बनाए गए हैं, जो डिजिटल तरीके से जुड़े हुए हैं। 

सेवा तीर्थ में खास क्या है?

सेवा तीर्थ में अच्छी सुरक्षा व्यवस्था, स्मार्ट एक्सेस कंट्रोल, कैमरे और इमरजेंसी सिस्टम हैं। सेवा तीर्थ के भवन, दिल्ली के मौसम के अनुकूल बनाए गए हैं। सोलर एनर्जी, वाटर मैनेजमेंट और कचरा प्रबंधन की अच्छी सुविधाएं हैं। सरकार इसे प्रशासनिक ढांचे में बदलाव की बड़ी उपलब्धि बता रही है। प्रधानमंत्री इस प्रोजेक्ट को लेकर बेहद उत्साहित हैं। प्रधानमंत्री ने सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन 1 और 2 का उद्घाटन किया है। नई दिल्ली को औपचारिक रूप से भारत की आधुनिक राजधानी बनाए जाने के 95 साल भी पूरे हो गए हैं।

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इतिहास क्या है?

जब दिल्ली राजधानी बनी थी, तब उसका केंद्र रायसीना हिल कैंपस था। यहीं वायसरॉय हाउस है, जिसे दुनिया अब राष्ट्रपति भवन के नाम से जानती है।  नई राजधानी की आधारशिलाएं करीब एक शताब्दी पहले किंग जॉर्ज पंचम और क्वीन मैरी ने रखी थीं। इसका उद्घाटन 13 फरवरी, 1931 को वायसराय लॉर्ड इरविन ने किया था। तब उद्घाटन समारोह करीब एक सप्ताह तक चला था। इस दौरान तत्कालीन वायसराय ने 12 फरवरी को ऑल इंडिया वॉर मेमोरियल आर्च का उद्घाटन किया था। अब दुनिया इसे इंडिया गेट के तौर पर जानती है।

इंडिया गेट, साल 1914 से 1918 तक चले प्रथम विश्व युद्ध और तृतीय अंग्रेज-अफगान युद्ध 1919 में शहीद हुए सैनिकों की स्मृति में बनाया गया था। इसका नक्शा सर एडविन लुटियंस ने तैयार किया था। सर हर्बर्ट बेकर ने ब्रिटिश राज की नई राजधानी का निर्माण किया था। इस शहर की वास्तुकला, दुनिया के सबसे खूबसूरत शहरों को टक्कर देती थी। दिल्ली तब संवर रही थी, जब दुनिया विश्व युद्ध की विभीषिका से गुजर रही थी। इसे बनने में करीब 20 साल लग गए थे।