मेडिकल एंट्रेंस परीक्षा NEET (UG) 2026 का पेपर लीक होने और फिर परीक्षा रद्द होने के कारण राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) इन दिनों चर्चा में है। 250 से ज्यादा परीक्षाएं सफलतापूर्वक कराने का दावा करने वाली यह एजेंसी सिर्फ 8 साल पुरानी है लेकिन दो बार तो NEET (UG) का ही पेपर लीक हो चुका है। इंजीनियरिंग, मेडिकल, यूनिवर्सिटी एडमिशन, रिसर्च संस्थानों में एडमिशन और देश के कई अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों में एडमिशन के लिए परीक्षा आयोजित कराने वाली यह एजेंसी सिर्फ 8 साल में सैकड़ों करोड़ का मुनाफा कमाने वाली एजेंसी तो बनी है लेकिन कई घटनाओं ने यह साबित किया है कि वह लोगों का भरोसा नहीं कमा पाई है।
बीते कुछ साल में NEET (UG) के अलावा, UGC (NET) 2024, JEE Mains 2024, UGC (NET) 2021 और JEE Mains 2020 जैसी परीक्षाएं प्रभावित हुई हैं। ये सभी परीक्षाएं NTA ने आयोजित की थीं और इससे कम से कम 75 लाख छात्र-छात्राएं प्रभावित हुई हैं। अगर NTA की ओर से कराई गई परीक्षाओं में बैठे कुल छात्रों की संख्या देखें तो पता चलता है कि अब तक लगभग 13.6 प्रतिशत छात्र NTA की ओर से आयोजित परीक्षाओं के चलते प्रभावित हुए हैं।
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साल 2018 में सिर्फ 25 करोड़ रुपये के ग्रांट के साथ शुरू हुई यह एजेंसी अब मुनाफा कमा रही है। अगस्त 2024 में संसद में दिए गए एक जवाब से पता चला था कि NTA ने पहले ही साल यानी 2018-19 में कुल 101.51 करोड़ रुपये इन परीक्षाओं के फॉर्म की फीस से कमाए थे। पहले साल उसके 118.43 करोड़ रुपये खर्च हुए और उसे थोड़ा सा नुकसान उठाना पड़ा। हालांकि, अगले ही साल से जितने पैसे फॉर्म की फीस से मिले, उससे कम खर्च में परीक्षाओं का आयोजन करा लिया गया।
कितने लोग चलाते हैं NTA?
NTA को चलाने वाली एक गवर्निंग बॉडी है जिसके एक चेयरमैन होते हैं। इस पद पर पूर्व अधिकारियों या विद्वानों को नियुक्त किया जाता है। मौजूदा समय में रिटायर्ड प्रोफेसर प्रदीप कुमार जोशी NTA के चेयरमैन हैं जो पहले UPSC के चेयरमैन हैं। वरिष्ठ IAS अधिकारी अभिषेक सिंह NTA के डायरेक्टर जनरल (DG) हैं। इसके अलावा, ती IITs के डायरेक्टर, दो NITs के डायरेक्टर, IIMs के दो डायरेक्टर और कई अन्य चर्चित शैक्षणिक संस्थानों के मुखिया इस गवर्निंग बॉडी के सदस्य हैं।
22 जुलाई 2024 को DMK सांसद के कनिमोई ने लोकसभा में NTA के स्थायी और अस्थायी स्टाफ को लेकर सवाल पूछे थे। इस सवाल के जवाब में शिक्षा मंत्रालय में राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने जवाब दिया था। इस जवाब में उन्होंने बताया था कि NTA के निदेशक को केंद्र सरकार नियुक्त करती है और अन्य अधिकारी डेप्युटेशन पर नियुक्त किए जाते हैं। 22 जुलाई 2024 को मिली जानकारी के मुताबिक, NTA में कुल 22 कर्मचारी ऐसे थे जो डेप्युटेशन पर तैनात किए गए थे। वहीं, कॉन्ट्रैक्ट पर कुल 39 कर्मचारी तैनात थे और कुल 132 कर्मचारी ऐसे थे जिनसे आउटसोर्सिंग के जरिए काम लिया जा रहा था।
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एक्सपर्ट कमेटी के सुझाव पर क्या हुआ?
पेपर लीक जैसे मामलों को लेकर NTA पर पहले भी सवाल उठे हैं। यही वजह थी कि 22 जून 2024 को शिक्षा मंत्रालय ने एक हाई लेवल कमेटी ऑफ एक्सपर्ट्स (HLCE) बनाई और इस कमेटी ने 21 अक्तूबर 2024 को अपनी रिपोर्ट सौंपी। कमेटी ने सिफारिश की थी कि पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए नेशनल कॉमन एंट्रेंस टेस्टिंग में बदलाव करना होगा। इस कमेटी की सिफारिशें कितनी लागू हुईं, यह देखने के लिए ISRO के पूर्व चेयरमैन डॉ. के राधाकृषणन की अगुवाई में एक अलग कमेटी बनाई गई।
शिक्षा मंत्रालय ने संसद में बताया कि NTA को मजबूत करने के लिए 16 नए पद बनाए गए। इसके लिए 8 डायरेक्टर और 8 ज्वाइंट डायरेक्टर नियुक्त किए जाने हैं।
कितनों की परीक्षा ले चुका NTA?
साल 2018 में बनी NTA का मकसद उच्च शिक्षण संस्थानों में एडमिशन के लिए होने वाली परीक्षाएं कराना है। मार्च 2026 में राज्यसभा सांसद डॉ. जॉन ब्रिटास के एक सवाल के जवाब में शिक्षा मंत्रालय ने बताया था कि 11 मार्च 2026 तक NTA ने 275 से ज्यादा परीक्षाएं कराईं जिनमें कुल 6.61 करोड़ से ज्यादा अभ्यर्थी बैठे। इस जवाब में भी 16 नए पद बनाने की बात दोहराई गई। हालांकि, यह स्पष्टता नहीं है कि इन पदों पर किसी की नियुक्ति की गई या नहीं।
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साल दर साल परीक्षाओं के आयोजन और उनके फॉर्म की फीस से होने वाली कमाई में इजाफा होता गया है। इसी अनुपात में खर्च भी बढ़ा है। साल 2024 के अगस्त महीने में राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा के एक सवाल के जवाब से पता चलता है कि साल 2023-24 में NTA ने स्टूडेंट्स के फॉर्म की फीस से लगभग 1065 करोड़ रुपये कमाए और 1020 करोड़ रुपये खर्च किए।
इसी तरह 2022-23 में 873.20 करोड़, 2021-22 में 490.35 करोड़, 2020-21 में 494.46 करोड़ और 2019-20 में 488.08 करोड़ रुपये फीस से इकट्ठा हुए। 2018-19 को छोड़कर हर साल कमाई गए पैसों से कम खर्च करके ही परीक्षाओं का आयोजन किया गया।
