ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच छिड़ी जंग ने पश्चिम एशिया के साथ-साथ पूरी दुनिया का भविष्य अस्थिर कर दिया है। अमेरिका हो, चीन हो भारत या नेपाल, हर देश, संकट के मुहाने पर खड़ा है, तेल की कीमतें बेतहाशा बढ़ रही हैं। अर्थव्यवस्था के जानकारों का कहना है कि अगर यह संकट थम भी जाए तो कई साल, इस झटके से उबरने में लग जाएंगे।
भारत, इस जंग में किसी के साथ नहीं फिर भी बुरी तरह पिस रहा है। आर्थिक मुश्किलें, अब नरेंद्र मोदी सरकार की मुश्किलें बढ़ा रही हैं। 2027 में 7 राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, भारतीय जनता पार्टी की सरकार की चौतरफा आलोचना हो रही है।
किन राज्यों में है चुनाव, जहां घिर रही है बीजेपी?
उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गुजरात, गोवा, हिमाचल प्रदेश और मणिपुर। एक हिमाचल प्रदेश को छोड़ दिया जाए तो सभी राज्यों में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है। बीजेपी सरकार को यूपी से लेकर मणिपुर तक में अब सियासी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
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NDA के लिए गले की फांस बने मुद्दे कौन से हैं?
- पेट्रोल-डीजल का फंदा: ईरान और अमेरिका के युद्ध का असर, अब जमीन पर दिखने लगा है। लोग पेट्रोल पंप पर लंबी कतारों में लगते हैं, पेट्रोल नहीं मिल पाता है। पू्र्वांचल सीमाई जिलों में हालत पहले से खराब थी लेकिन अब धीरे-धीरे बड़े शहर भी इस किल्लत की चपेट में आ रहे हैं। भारत के पास एक-दो महीने भर का तेल रिजर्व होने का दावा तो किया जा रहा है लेकिन संकट इतना बड़ा है कि बीजेपी सरकार घिरती चली जा रही है। अब अचानक तेल के बढ़े दाम और मुश्किलें पैदा कर रहे हैं।
अखिलेश यादव, राष्ट्रीय अध्यक्ष, समाजवादी पार्टी:-
अर्थव्यवस्था का जो भाजपाई दावा सरपट दौड़नेवाली बुलट ट्रेन जैसा दिखाया जा रहा था, असल में तो वह बैलगाड़ी जैसा धक्कामार साबित हुआ। गैस, तेल, सिलेंडर की महंगाई और मारामारी में डबल इंजन का धुआं निकल गया है। जनता कह रही है कि भाजपाइयों पर निगाह रखो कि वो जब विदेश जा रहे हैं तो अपने साथ कितना लेकर जा रहे हैं और फिर वापस आ भी रहे हैं या वहीं ये अपनी नागरिकता त्याग दे रहे हैं।
- गैस संकट: नए कनेक्शन मिल नहीं रहे हैं। देश की एक बड़ी आबादी ऐसी है, जिसके पास गैस कनेक्शन नहीं है। पहले सहजता से उन्हें गैस सिलेंडर मिल जा रहा था, छोटे गैस भी उपलब्ध थे। अब लोग गैस के लिए परेशान हो रहे हैं। शहरों में एक बड़ी आबादी जो असंगठित सेक्टर में काम करती थी, घर लौट चुकी है। चाय और खाने की कीमतें अनियंत्रित तरीके से बढ़ रही हैं।
- बेरोजगारी: नई नौकरियों का सृजन नहीं हो रहा है। जो पद रिक्त हैं, उन पर भर्तियां नहीं हो पा रही हैं। बिहार से लेकर यूपी से लेकर उत्तराखंड तक, नीति आयोग ने माना है कि हजारों रिक्तियां सिर्फ शिक्षक के पद पर रिक्त हैं। सरकारी नौकरी के अलावा, वैश्विक संकट की वजह से कारोबारी रफ्तार भी सुस्त पड़ सकता है। खाड़ी के देशों में काम करने वाली एक बड़ी आबादी देश लौट आई है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के मुताबिक देश में 15 से 24 आयुवर्ग के करीब 16 प्रतिशत लोगों के पास कोई रोजगार नहीं है।
- पेपर लीक: सरकार पेपर लीक की वजह से विपक्ष के निशाने पर है। 10 साल में 70 से ज्यादा परीक्षाओं में पेपर लीक की घटना सामने आई है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्य प्रणाली इतनी संदिग्ध है, जिसे विपक्ष मुद्दा बना रहा है। राजस्थान में पेपर लीक कांड के पर्दाफाश के बाद NTA ने NEET PG की परीक्षा भले ही रद्द कर दी हो लेकिन पेपर लीक कैसे हो रहे हैं, किन राज्यों तक तार फैले हैं, इसे लेकर आक्रोश, जनता का नजर आ रहा है। लाखों अभ्यर्थी खुद को ठगा हुआ पाते हैं, जिन्हें विपक्ष मुद्दा बना चुका है।
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राहुल गांधी, नेता विपक्ष, लोकसभा:-
2015 से 2026 तक - 148 परीक्षा घोटाले। 87 परीक्षाएं रद्द, 9 करोड़ बच्चों का भविष्य प्रभावित। 148 घोटालों में सजा हुई सिर्फ 1 को। CBI ने 17 मामले लिए, ED ने 11, किसी को सजा नहीं। NEET, AIPMT और अन्य मेडिकल परीक्षाओं में अकेले 15 घोटाले। और सबसे शर्मनाक बात, इन घोटालों में जिम्मेदार किसी अधिकारी या मंत्री का इस्तीफा नहीं हुआ। हटाए जाते हैं। फिर चुपके से बड़े पद पर बैठा दिए जाते हैं। चोरी कराने वालों को इनाम मिलता है, और परीक्षा देने वाले बच्चे जान गंवाते हैं।
- महंगाई: पेट्रोल-डीजल और सीएनजी के दामों में हालिया बढ़ोतरी के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत विपक्षी पार्टियां कह रही हैं कि मोदी सरकार की गलत नीतियों और आर्थिक नाकामी की कीमत आम जनता चुकाने को मजबूर है। विपक्ष का आरोप है कि चुनाव बाद तुरंत ईंधन महंगा करके सरकार ने महंगाई की आग भड़का दी है, जिससे रसोई, परिवहन और रोजमर्रा की चीजों के दाम और बढ़ेंगे। राहुल गांधी ने इसे जनता पर बोझ बताया और कहा कि सरकार की गलतियों का खामियाजा गरीब और मध्यम वर्ग भुगत रहा है। दूध के दाम बढ़ गए हैं। महंगाई वह मुद्दा है, जिससे आम आदमी का सीधा नाता है। चुनावों में यह मुद्दा सरकार की मुश्किलें बढ़ा सकता है।
राहुल गांधी:-
गलती मोदी सरकार की, कीमत जनता चुकाएगी। ₹3 का झटका आ चुका, बाकी वसूली किस्तों में की जाएगी।
गिरता रुपया या सरकार की गिरती साख?
भारतीय रुपया रिकॉर्ड स्तर पर कमजोर हो रहा है। रुपया 96.05 प्रति डॉलर तक गिर गया, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है। ईरान युद्ध की वजह से कारण कच्चा तेल बहुत महंगा हो गया है, जिससे भारत को महंगा आयात करना पड़ रहा है। विदेशी निवेशक लगातार पैसा निकाल रहे हैं। इस वजह से देश का चालू खाता घाटा बढ़ गया है और रुपया एशिया का सबसे ज्यादा गिरने वाला मुद्रा बन गया है।
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क्या सरकार की गुहार से बनेगी बात?
सरकार और RBI रुपए को संभालने की कोशिश कर रहे हैं। रिजर्व बैंक विदेशी मुद्रा भंडार बेच रहा है, नियमों में बदलाव कर रहा है और विदेशी निवेशकों पर टैक्स कम करने का विचार चल रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने विदेशी मुद्रा बचाने की अपील की है और सोने-चांदी के आयात पर टैरिफ बढ़ा दिया गया है। थोक महंगाई बढ़ गई है। ये मुद्दे सरकार के गले की फांस बन रहे हैं, विपक्ष इन मुद्दों पर सरकार खूब घेर रहा है।
