देश में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी गई है। शुक्रवार को सरकारी तेल कंपनियों ने यह फैसला लिया। यह बढ़ोतरी पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान संघर्ष की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ जाने के चलते की गई है।
दिल्ली और आसपास के इलाकों में CNG की कीमत भी ₹2 प्रति किलो बढ़ा दी गई है। अब दिल्ली में पेट्रोल ₹97.77 प्रति लीटर और डीजल ₹90.67 प्रति लीटर मिलेगा। अलग-अलग शहरों में स्थानीय टैक्स के कारण कीमतें थोड़ी अलग-अलग हैं।
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पेट्रोल-डीजल पर क्या घाटा उठा रहीं हैं कंपनियां?
तेल कंपनियां अभी भी भारी नुकसान झेल रही हैं। अधिकारियों के मुताबिक, पेट्रोल पर अभी भी 10 से 12 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 38 से 40 रुपये प्रति लीटर का घाटा है। ब्रेंट क्रूड की कीमत पहले 72 डॉलर प्रति बैरल थी, जो अब 108 डॉलर के आसपास पहुंच गई है।
रुपया अब तक कितना गिरा?
रुपया भी कमजोर होकर 95.74 रुपये प्रति डॉलर पर पहुंच गया है। यह कीमत बढ़ोतरी अप्रैल 2022 के बाद पहली बार हुई है। तब रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद दाम बढ़ाए गए थे। विधानसभा चुनाव खत्म होने के बाद यह बढ़ोतरी की गई है, जिसकी काफी चर्चा हो रही है।
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आपके शहर में पेट्रोल की कीमत क्या है?
- दिल्ली: ₹97.77
- कोलकाता: ₹108.74
- मुंबई: ₹106.68
- चेन्नई: ₹103.67
आपके शहर में डीजल की कीमत क्या है?
- दिल्ली: ₹90.67
- कोलकाता: ₹95.13
- मुंबई: ₹93.14
- चेन्नई: ₹95.25
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क्यों महंगा हुआ डीजल-पेट्रोल?
सरकार ने पेट्रोल निर्यात पर नया विंडफॉल टैक्स लगाया है, जबकि डीजल और विमान ईंधन के निर्यात टैक्स घटा दिए गए हैं। इसका मकसद घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता बनाए रखना है। विपक्षी पार्टियों ने इस बढ़ोतरी की आलोचना की है।
विपक्ष ने पेट्रोल-डीजल के बढ़े दाम पर क्या कहा?
कांग्रेस, DMK, SP और अन्य दलों ने कहा कि आम आदमी, गरीब, किसान और छोटे वाहन चालकों पर बोझ बढ़ गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के बाद सरकार ने वसूली शुरू कर दी है। बीजेपी ने जवाब देते हुए कहा कि यह पूरी तरह वैश्विक संकट का नतीजा है। भारत में बढ़ोतरी कई दूसरे देशों की तुलना में कम है और कीमतें लंबे समय तक स्थिर रहीं। सरकार ने लोगों से ईंधन बचाने, काम-काज घर से करने और अनावश्यक यात्रा कम करने की अपील की है।