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3 रुपये महंगा हो गया डीजल और पेट्रोल, अब कितने में मिलेगा?

देश के 5 राज्यों के चुनाव नतीजे आने के 11 दिन बाद डीजल और पेट्रोल के दाम में प्रति लीटर 3 रुपये का इजाफा हो गया है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit: ChatGPT

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देश में अब डीजल और पेट्रोल की कीमतों में इजाफा कर दिया गया है। चुनाव के समय ऐसी खबरें आई थीं कि चुनाव के बाद डीजल-पेट्रोल के दाम कम हो सकते हैं लेकिन तब सरकार ने इसे गलत खबर बताया था। अब तेल कंपनियों ने डीजल और पेट्रोल की कीमतों में एक साथ 3 रुपये का इजाफा कर दिया है। इसके चलते राजधानी दिल्ली में 94.77 रुपये में मिलने वाला एक लीटर पेट्रोल अब 97.77 रुपये में मिलेगा। वहीं, 87.67 रुपये में मिलने वाला एक लीटर डीजल अब 90.67 रुपये में मिलेगा।

 

ईरान-अमेरिका के बीच चल रहे टकराव के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होने वाली सप्लाई लंबे समय तक प्रभावित रही और इसका असर भी हुआ। हालांकि, भारत में तेल कंपनियों ने तेल की कीमतें नहीं बढ़ाई थीं। तेल कंपनियां नुकसान उठाकर तेल बेच रही थीं और उनके नुकसान की थोड़ी भरपाई करने के लिए भारत सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये की कटौती भी की थी ताकि जनता पर दबाव न पड़े।

 

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कहां कितने बढ़े दाम?

दिल्ली- 3 रुपये की बढ़ोतरी, पेट्रोल का दाम- 97.77 रुपये
कोलकाता- 3.29 रुपये की बढ़ोतरी, पेट्रोल का दाम-3.29 रुपये
मुंबई- 3.14 रुपये की बढ़ोतरी, पेट्रोल का दाम-106.68 रुपये
चेन्नई-2.83 रुपये की बढ़ोतरी, पेट्रोल का दाम- 103.67 रुपये

 

बढ़ता जा रहा था दबाव

दरअसल, तेल कंपनियों को अब सस्ता कच्चा तेल मिलने की स्थिति में भी तेल के दाम कम करने को नहीं कहा जाता है ताकि वे मुनाफा कमा सकें। बाद में जब कच्चा तेल महंगा होता है तब भी उन्हें तेल के दाम तुरंत नहीं बढ़ाने होते। यही वजह थी कि कई महीनों से कच्चा तेल महंगा होने के बावजूद डीजल-पेट्रोल के दाम में बदलाव नहीं हुआ था। इसी नियम के चलते साल 2022 से ही भारत में डीजल और पेट्रोल के दाम लगभग स्थिर थे। हालांकि, अब इसमें बढ़ोतरी हो गई है।

दो दिन पहले ही इसके संकेत केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने दिए थे और उन्होंने कहा था कि तेल के दाम हमेशा के लिए नहीं रोके जा सकते हैं। हरदीप सिंह पुरी का कहना था कि तेल कंपनियों को हर दिन 1000 करोड़ रुपये का नुकासन हो रहा है और उनकी अंडर रिकवरी 1.98 लाख करोड़ तक पहुंच गई हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि इस तिमाही में तेल कंपनियों का घाटा 1 लाख करोड़ के पार जा चुका है। हरदीप पुरी ने कहा था, 'कंपनियां ग्राहकों को महंगाई से बचाने के लिए यह नुकसान सह रही हैं। पिछले साल उन्होंने जो मुनाफा कमाया था, वह मौजूदा नुकसान में पूरी तरह से खत्म हो रहा है और कंपनियों कब तक इसे बर्दाश्त कर पाएंगी यह मेरे लिए चिंता का विषय है।'

 

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आपको बता दें कि भारत में इस्तेमाल होने वाले डीजल-पेट्रोल को तैयार करने के लिए जरूरी कच्चा तेल विदेश से मंगाया जाता है। पिछले साल की तुलना में इस कच्चे तेल की कीमत लगभग दोगुने से भी ज्यादा हो गई है। यही वजह है कि भारत के अलावा दुनिया के अन्य देशों में भी तेल के दाम में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के लंबे समय तक बंद रहने के कारण भी तेल की सप्लाई बाधित हुई और भारत को अन्य देशों से महंगा तेल खरीदना पड़ा। 

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