आम आदमी पार्टी इन दिनों गुजरात में जमकर मेहनत कर रही है। गुजरात विधानसभा चुनाव में अभी एक साल से भी ज्यादा का समय है लेकिन आम आदमी पार्टी के नेता लगातार गुजरात में डेरा डालकर बैठे हैं। गुजरात में तीन दशक से बीजेपी की सरकार है और कांग्रेस प्रमुख विपक्षी पार्टी बनी हुई है। अब आम आदमी पार्टी इस पैटर्न को बदलने की बात कर रही है और कह रही है कि पंजाब की तरह पार्टी बीजेपी-कांग्रेस से बाहर निकलर आम आदमी पार्टी को मौका दे। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत तमाम बड़े नेता गुजरात के दौरे कर रहे हैं।
ऐसे में लोगों के मन में एक बड़ा सवाल है कि क्या आम आदमी पार्टी के उभार से गुजारत में बीजेपी को नुकसान हो रहा है या फिर कांग्रेस पार्टी को। इसको लेकर राजनीतिक जानकार अलग-अलग दावे करते हैं कि आम आदमी पार्टी कितना नुकसान कर पाएगी लेकिन सभी का मानना है कि कांग्रेस की कीमत पर गुजरात में AAP विस्तार कर रही है। गुजरात में अप्रैल-मई में होने वाले निकाय चुनाव में पार्टी कांग्रेस और बीजेपी को पछाड़ने की रणनीति पर काम कर रही है। अगर निकाय चुनाव में आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस से अच्छा प्रदर्शन कर लिया तो अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को पार्टी बीजेपी बनाम आम आदमी पार्टी करने की कोशिश करेगी।
यह भी पढ़ें: 6 मई को BJP सरकार, 45 दिन में घुसपैठ बंद, TMC के खिलाफ BJP की चार्जशीट में क्या?
सर्वे में AAP ने कांग्रेस को पछाड़ा
गुजरात को लेकर सीआईएफ नाम की एक संस्था ने सर्वे किया है और इस सर्वे में सामने आया है कि गुजरात में AAP का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है। सर्वे के मुताबिक गुजरात में आम आदमी पार्टी का वोट शेयर 24.8 प्रतिशत तक पहुंच गया है। वहीं कांग्रेस का वोट शेयर गिरकर 17.3 प्रतिशत रह गया है। यानी आम आदमी पार्टी अब कांग्रेस को पीछे छोड़कर गुजरात की दूसरी सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बन चुकी है।
भारतीय जनता पार्टी की बात करें तो सर्वे के अनुसार, बीजेपी अभी 49.5 प्रतिशत वोट के साथ सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बनी हुई है। हालांकि, विपक्षी खेमे में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है और आम आदमी पार्टी और बीजेपी में सीधी टक्कर दिख रही है और इसमें कांग्रेस पिछड़ती हुई नजर आ रही है। सर्वे के मुताबिक गुजरात में आम आदमी पार्टी का वोट शेयर 24.8 प्रतिशत तक पहुंच गया है। वहीं कांग्रेस का वोट शेयर गिरकर 17.3 प्रतिशत रह गया है।
2022 में क्या रहे थे नतीजे?
2022 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को 182 में से 156 सीटें मिली थीं और कांग्रेस को 17 सीटें मिली थीं। वहीं, आम आदमी पार्टी राज्य में तीसरी बड़ी शक्ति के रूप में उभरी थी और पार्टी को 5 सीटों पर जीत मिली थी। इसके अलावा 4 सीटों पर अन्य उम्मीदवार विजयी रहे थे।
कांग्रेस के लिए क्यों खतरा है AAP?
कांग्रेस पार्टी के लिए आम आदमी पार्टी इसलिए बड़ा खतरा है क्योंकि AAP और कांग्रेस दोनों की नजर बीजेपी के विरोधी वोटों में है। 2017 के विधानसभा चुनाव में AAP का प्रभाव गुजरात में कम था और इसका असर कांग्रेस के वोट शेयर पर साफ दिखता है। कांग्रेस को 2017 में 41 प्रतिशत वोट हासिल किए थे लेकिन 2021 में जब AAP ने गुजारत में दमखम के साथ चुनाव लड़ा तो कांग्रेस पार्टी का वोट प्रतिशत गिरकर 27 प्रतिशत ही रह गया।
यह भी पढ़ें: 'देश के 2 खलनायक, एक मुसलमान, दूसरा सवर्ण', किस ओर है बृजभूषण का इशारा?
निकाय चुनाव में AAP ने लगाया दम
विस्तार की कोशिश में जुटी आम आमदी पार्टी का अगला टारगेट गुजरात है। गुजरात में राज्य चुनाव आयोग ने 15 नगर निगमों, 84 नगर पालिकाओं, 34 जिला पंचायतों और 260 तहसील पंचायत के चुनावों की तैयारी को लगभग पूरी कर ली है। राज्य में अप्रैल के पहले हफ्ते में चुनावों का ऐलान हो सकता है और मई में चुनाव हो सकते हैं। इन चुनावों के की अभी घोषणा का इंतजार ही है लेकिन आम आदमी पार्टी ने अपने 460 उम्मीदवारों की घोषणा भी कर दी है। पार्टी की योजना पूरे गुजरात में नगर निकायों की सभी 12,000 सीटों पर उम्मीदवार उतारने की है।
स्थानीय निकाय चुनाव आमतौर पर तो स्थानीय और राज्य यूनिट के नेता लड़ते हैं लेकिन आम आदमी पार्टी इन चुनावों को विधानसभा चुनाव की तरह गंभीरता से ले रही है। पार्टी के राज्य के नेताओं के साथ-साथ केंद्रीय नेतृत्व भी राज्य में सक्रिय है। पंजाब के सीएम और दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल गुजारत में रैलियां कर रहे हैं।
एक रैली में केजरीवाल ने आरोप लगाया कि पिछले 30 सालों में बीजेपी और कांग्रेस ने मिलकर गुजरात को लूटा है और सबसे ज्यादा नुकसान आदिवासी समाज को हुआ है। केजरीवाल ने कहा कि गुजरात की जनता अब बीजेपी के दमन के खिलाफ खड़ी हो चुकी है और आम आदमी पार्टी के साथ बदलाव लाने के लिए तैयार है। आम आदमी पार्टी के सक्रियता से गुजरात में बीजेपी से ज्यादा कांग्रेस पार्टी परेशान है। बीजेपी विरोधी वोट कांग्रेस के बजाय आम आदमी पार्टी की ओर शिफ्ट हो रहे हैं।
