भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पूर्व सासंद बृजभूषण शरण सिंह ने तंज कसते हुए देश के दो समुदायों को खलनायक बताया है। उन्होंने कहा है कि इस देश में दो समुदायों को खलनायक समझा जा रहा है, पहला समुदाय है मुसलमान, दूसरा समुदाय है सवर्ण। उन्होंने इशारा किया कि मुस्लिम और सवर्णों को नए जमाने में निशाना बनाया जा रहा है। यह बातें, बृजभूषण शरण सिंह ने तब कहीं हैं, जब बेटे प्रतीक भूषण गोंडा से विधायक हैं, उनके दूसरे बेटे कैसरगंज से सांसद हैं।
बृजभूषण शरण सिंह ने भारतीय जनता पार्टी सरकार पर ही निशाना साध दिया है। देशभर में भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ सवर्ण, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग वाले फैसले से नाराज रहे हैं। बीजेपी से सबकी शिकायत यह रही कि जानबूझकर बीजेपी ऐसे कैसे नियम लेकर आ सकती है, जो जाने-अनजाने में सवर्ण छात्रों के खिलाफ हो। बीजेपी पर मुस्लिम विरोध के भी आरोप लगते रहे हैं।
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बृजभूषण शरण सिंह, पूर्व सासंद, बीजेपी:-
आज इस देश के अंदर दो खलनायक हैं। मैं जानता हूं कि मेरी यह बात गहरी चोट करेगी। उनकी नजर में सारी समस्या मुसलमान ही है। वही है ही। लेकिन मैं कहना चाहता हूं। पहला खलनायक मुसलमान है। दूसरा खलनायक सवर्ण है।
एक तीर से कितने निशाने साध रहे बृजभूषण?
बृजभूषण शरण सिंह, अपनी ही पार्टी के खिलाफ बयान देने से हिचकते रहे हैं। वह विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नियमों को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना कर कर चुके हैं। वह इसे चूक बता गए हैं। यौन उत्पीड़न के आरोप लगने के बाद बीजेपी, उनसे दूरी बना रही है। कैसरगंज उनका चुनावी गढ़ है, फिर भी बीजेपी ने उनकी जगह, उनके बेटे को करण भूषण को उतारा। उन्हें हाशिए पर रख दिया। यह बात तब से ही बृजभूषण शरण सिंह को खटक रही है। उन्होंने साफ एलान किया है कि वह 2029 का लोकसभा चुनाव लड़ेंगे और कैसरगंज से ही लड़ेंगे। उनके बयानों को बीजेपी पर दबाव बनाने के तौर पर देखा जा रहा है।
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मुसलमान और सवर्ण को खलनायक क्यों बता रहे हैं?
बृजभूषण शरण सिंह, सधे राजनेता हैं। वह मुस्लिमों के खिलाफ कभी मुखर होकर बयान नहीं देते। वह यहां तक कहते हैं कि कैसरगंज में ही उन्हीं के वंश से कुछ लोग, मुस्लिम भी बने थे। कैसरगंज में बैंस मुसलमान हैं। कैसरगंज में मुस्लिम आबादी करीब 25 फीसदी है। बीजेपी के जनाधार से अलग, बृजभूषण शरण सिंह का अपना भी जनाधार है। बीजेपी हिंदुत्ववादी पार्टी है, राज्य की दूसरी सीटों पर मुस्लिमों का एक बड़ा हिस्सा, बीजेपी को पंसद नहीं करता है फिर भी कैसरगंज में बीजेपी के समर्थन में मुस्लिम वोट देते हैं। कैसरगंज में अखिलेश यादव का 'मुस्लिम-यादव' समीकरण भी कारगर नहीं हो पाता है। बृजभूषण ने इशारे-इशारे में यह जता दिया है कि पार्टी का स्टैंड कुछ भी हो, बृजभूषण शरण सिंह मुस्लिम समुदाय के साथ हैं।
दूसरी तरफ सवर्ण पर तंज कसने की भी एक वजह है। बृजभूषण सवर्णों के नेता कहे जाते हैं। क्षत्रिय समाज से आते हैं लेकिन सवर्ण समाज का समर्थन उन्हें मिला है। वह अयोध्या से लेकर गोंडा तक, अपनी रैलियां करते हैं, जनाधार मजबूत करने की कवायद में जुटे रहते हैं। सवर्ण बाहुल सीटों पर वह चुनाव प्रचार करने भी खूब जाते हैं। अब एक बार फिर वह खुद को सवर्णों के नेता के तौर पर पेश कर रहे हैं, जिससे बीजेपी पर दबाव बढ़े। यूजीसी पर फैसला, भले ही विश्वविद्यालय अनुदान आयोग का रहा हो लेकिन आलोचना के केंद्र में बीजेपी रही। बीजेपी के दिग्गज नेता चुप रहे, बृजभूषण ने मुखर होकर विरोध किया। कैसरगंज में सवर्ण वोटर भी मजबूत स्थिति में है। एक तरफ क्षत्रिय मजबूत स्थिति में है, दूसरी तरफ ब्राह्मण। दोनों समुदायों को साधने की कवायद वह करते रहे हैं। अब देखने वाली बात यह है कि पार्टी, उनके बयानों को कितनी गंभीरता से लेती है, उन्हें 2029 में मौका मिलता है या नहीं।