भारत की आध्यात्मिक परंपरा में एक ऐसे संत का नाम तेजी से उभरकर सामने आया है, जिन्होंने सनातन संस्कृति, श्रीकृष्ण भक्ति और सेवा के माध्यम से लाखों लोगों के जीवन को नई दिशा दी है। सद्गुरु रितेश्वर महाराज न सिर्फ एक आध्यात्मिक गुरु हैं, बल्कि वह समाज सुधारक, प्रेरक वक्ता और विचारक के रूप में भी पहचाने जाते हैं। वृंदावन स्थित श्री आनंदम धाम से लेकर देश-विदेश तक उनके प्रवचन, सामाजिक अभियान और सांस्कृतिक आयोजनों का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है।
सद्गुरु रितेश्वर महाराज भारत के जाने-माने आध्यात्मिक गुरु, प्रेरणादायक वक्ता और लेखक हैं। उनके प्रवचन और विचारों का असर न सिर्फ भारत में, बल्कि विदेशों में भी देखा जाता है। आध्यात्म, शिक्षा, विज्ञान और समाज सेवा के क्षेत्र में उनका योगदान महत्वपूर्ण माना जाता है।
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प्रारंभिक जीवन
सद्गुरु रितेश्वर महाराज का जन्म 5 जनवरी 1973 को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में हुआ। उनके पिता विजय नारायण और माता मंजू देवी दोनों शिक्षक थे। वह एक संस्कारी ब्राह्मण परिवार से आते हैं और बचपन से ही उनका झुकाव धर्म, आध्यात्म और सनातन परंपरा की ओर रहा।
उन्होंने वाराणसी से भूविज्ञान और संस्कृत में पोस्ट ग्रेजुएशन की शिक्षा प्राप्त की। पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने गहरी आध्यात्मिक साधना भी की। उत्तराखंड के जंगलों, त्रिकूट पर्वत, काशी, वृंदावन और ब्रज क्षेत्र में उन्होंने तपस्या की और देश के कई हिस्सों की धार्मिक यात्राएं कीं।
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श्री आनंदम धाम की स्थापना
सद्गुरु रितेश्वर जी महाराज ने वृंदावन में 'श्री आनंदम धाम' की स्थापना की। यह एक अंतरराष्ट्रीय और गैर-लाभकारी संस्था है, जो समाज कल्याण के कई कार्यों में सक्रिय है। इस संस्था के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, जल बचाव और हरियाली को बढ़ावा देने के लिए 'पानी बचाओ, पेड़ बचाओ, भविष्य बचाओ' जैसे अभियान चलाए जाते हैं।
इसके अलावा युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए नशा मुक्ति कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। 'लाडली प्रसादम' नाम से यहां नि:शुल्क भोजन सेवा भी चलाई जाती है, जिसमें रोजाना सैकड़ों जरूरतमंद लोगों को भोजन कराया जाता है। साथ ही श्रीमद्भागवत महापुराण के गूढ़ अर्थों पर शोध के लिए एक विशेष शोध संस्थान भी स्थापित किया गया है।
सनातन संस्कृति और शिक्षा पर विचार
सद्गुरु रितेश्वर जी महाराज सनातन शिक्षा पद्धति के प्रबल समर्थक हैं। उनका मानना है कि देश की शिक्षा व्यवस्था में ऐसा बोर्ड होना चाहिए, जो भारतीय संस्कृति, परंपराओं और मूल्यों को आगे बढ़ाए। वह कहते हैं कि श्रीकृष्ण ही आनंद का स्वरूप हैं और जब इंसान अपने हर कर्म को भगवान को समर्पित करता है, तो उसका जीवन सहज और आनंदमय बन जाता है।
प्रवचन और आयोजन
वह हर साल देश-विदेश में होने वाले कई धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेते हैं। राधा-माधव महोत्सव, गुरु पूर्णिमा जैसे आयोजनों में उनके प्रवचन सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। भारत के अलावा स्कॉटलैंड, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, नेपाल जैसे देशों में भी उनके कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
सम्मान और उपलब्धियां
सद्गुरु रितेश्वर जी महाराज को उनके आध्यात्मिक और सामाजिक कार्यों के लिए कई सम्मान मिले हैं। वर्ष 2021 में उन्हें 'भारत गौरव अवार्ड' से नवाजा गया। वहीं 2022 में उन्हें 14वें न्यूजमेकर्स अचीवमेंट अवार्ड में 'सर्वश्रेष्ठ आध्यात्मिक नेता' का सम्मान मिला। उनके जीवन और विचारों पर आधारित 'Life Beyond Complications' नामक पुस्तक भी प्रकाशित हो चुकी है।
विचार और संदेश
सद्गुरु रितेश्वर जी महाराज का मानना है कि जीवन संघर्ष से नहीं, बल्कि आनंद से आगे बढ़ता है। वह कहते हैं कि सच्ची सफलता खुश रहकर और श्रीकृष्ण के प्रेम और0 गीता के संदेशों को अपनाकर ही मिलती है। उनका उद्देश्य लोगों को सकारात्मक सोच, सेवा और भक्ति के रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित करना है।