पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में अब भारतीय जनता पार्टी के 'चाणक्य' कहे जाने वाले केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह उतर चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सिंगूर यात्रा के बाद अब बीजेपी ने आक्रामक कैंपनिंग शुरू की है। राज्य की 294 विधानसभा सीटों के लिए एक तरफ बीजेपी ने कमर कसी कसी है, दूसरी तरफ तृणमूल कांग्रेस की ओर से अभिषेक बनर्जी जमीन पर नजर आ रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि चुनाव अप्रैल-मई में होंगे लेकिन कांग्रेस की टॉप लीडरशिप, मिशन पश्चिम बंगाल से कन्नी काट रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ममता बनर्जी अभी दोनों धड़ाधड़ चुनावी रैलियों से बच रहे हैं। बीजेपी की तरफ से बैटिंग अमित शाह ने संभाली है, तृणमूल कांग्रेस की तरफ से पार्टी के महासचिव अभिषेक बनर्जी जमीन पर हैं। अभिषेक बनर्जी अपनी यात्राओं में 'जोतेई कोरो हमला, आबार जितबे बांग्ला' का नारा दे रहे हैं। उनका कहना है कि कितना भी हमला करोगे, बीजेपी एक बार फिर पश्चिम बंगाल हारेगी, टीएमसी जीतेगी।
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न राहुल दिख रहे, न ही नजर आ रहे मल्लिकार्जुन खड़गे
मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी दोनों पश्चिम बंगाल के पोस्टर में तो हैं लेकिन जमीन पर नहीं हैं। पश्चिम बंगाल कांग्रेस के अध्यक्ष शुभंकर सरकार जमीन पर नजर तो आ रहे हैं लेकिन वह ममता बनर्जी के खिलाफ मुखर होकर प्रचार नहीं कर रहे हैं। यह तय माना जा रहा है कि कांग्रेस के साथ उनका जमीनी गठबंधन फिलहाल नहीं होगा। कांग्रेस लेफ्ट के साथ मिलकर चुनाव लड़ सकती है। राज्य कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी, ममता बनर्जी के खिलाफ जमकर बोलते थे।
ममता केंद्र में इंडिया गठबंधन को समर्थन देती है, अधीर इस नीति के ही खिलाफ थे। राज्य में कांग्रेस ने उन्हें किनारे लगा दिया है। साल 2024 में हुए विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की तरफ से चुनावी मैदान में उतरे युसुफ पठान ने हरा दिया था। अब अधीर हाशिए पर हैं। राहुल गांधी हैं नहीं, कांग्रेस, बिना गठबंधन के ममता बनर्जी की पिछलग्गू पार्टी बनी नजर आ रही है।
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लेफ्ट हुमायूं कबीर से समझौता करने को मजबूर
पश्चिम बंगाल में 2026 विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गठबंधन की चर्चाएं तेज हो गई हैं। जनता उन्नयन पार्टी (JUP) के संस्थापक और निलंबित तृणमूल कांग्रेस विधायक हुमायूं कबीर ने CPI(M) और इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) के साथ चुनावी समझौता करने की इच्छा जताई है। ऐसा हो सकता है कि दोनों दल चुनावी गठबंधन कर लें।
हाल ही में कोलकाता के न्यू टाउन में CPI(M) के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम और हुमायूं कबीर के बीच हुई बैठक ने इस अटकल को हवा दी।
हुमायूं कबीर ने साफ कहा है कि कहा कि वह 15 फरवरी तक CPI(M) और ISF के साथ चुनावी समझौता तय करना चाहते हैं। कबीर ने सलीम से ISF से बात करने का अनुरोध भी किया है। करीब 10 दिन पहले ही ISF विधायक नौशाद सिद्दीकी ने कहा था कि तृणमूल और BJP को हराने के लिए जल्द से जल्द लेफ्ट फ्रंट और कांग्रेस के साथ गठबंधन जरूरी है।
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कैसे अमित शाह vs अभिषेक हुआ चुनाव?
पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के इकलौते बड़े चेहरे शुंभकर सरकार हैं, जिनकी लोकप्रियता ऐसी भी नहीं है कि बिना राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के वह राज्य में कमाल कर सकें। राहुल गांधी आखिरी बार पश्चिम बंगाल दौरे पर 2 फरवरी 2025 को गए थे। मल्लिकार्जुन खड़गे भी एक अरसे से पश्चिम बंगाल नहीं गए हैं। प्रियंका गांधी भी यहां नहीं आईं हैं। कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने पश्चिम बंगाल की कमान ही ममता बनर्जी भरोसे छोड़ दिया है।
कांग्रेस की तरफ से दो तरफा मुकाबले के लिए छोड़ दिए पश्चिम बंगाल में सिर्फ दो चेहरे जमीन पर नजर आ रहे हैं। एक अभिषेक बनर्जी, दूसरे गृहमंत्री अमित शाह। गृहमंत्री अमित शाह पश्चिम बंगाल में जीत के लिए '26 से जीते बीजेपी' का नारा दे रहे हैं। शनिवार को ही वह पश्चिम बंगाल के चुनावी दौरे पर थे, जहां वह तृणमूल कांग्रेस सरकार के खिलाफ जमकर बरसते नजर आए। वह सिलीगुड़ी में जनसभा को संबोधित किया, हजारों की भीड़ हुई। 30 जनवरी से 31 जनवरी तक वह पश्चिम बंगाल दौरे पर रहे।
अमित शाह बीते 2 महीनों मे 3 दिन पश्चिम बंगाल में गुजार चुके हैं। कोलकाता के बैरकपुर और बागडोगरा में उन्होंने जनसभाएं की हैं। 30 और 31 जनवरी को कोलकाता पहुंचे थे, फिर बैरकपुर गए और बागडोगरा में बैठक की। ऐसे ही 30 और 31 दिसंबर को भी वह कोलकाता पहुंचे। कोर समिति की बैठक ली, सांसदों और विधायकों के साथ बैठकें कीं। उन्होंने पार्टी में सौमिक भट्टाचार्य और दिलीप घोष के बीच सुलह तक करा दिया। अब उनकी पूरी नजर पश्चिम बंगाल पर है।
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दूसरी तरफ तृणमूल कांग्रेस के चुनावी कैंपेन में सबसे ज्यादा सक्रिय अभिषेक बनर्जी नजर आ रहे हैं। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन और आईपैक पर ईडी रेड के बाद जमीन पर उतरीं थीं, बीजेपी के खिलाफ प्रचार कर रहीं थीं, अब वह अभिषेक बनर्जी को आगे कर रहीं हैं। पार्टी के पोस्टर से लेकर पदयात्रा तक अभिषेक बनर्जी छाए हुए हैं। ममता बनर्जी ने 28 जनवरी को हुगली में एक चुनवाी जनसभा को संबोधित किया था। अभिषेक बनर्जी बजट सत्र में हिस्सा लेने दिल्ली आए हैं लेकिन दिल्ली आने से पहले उन्होंने खूब जनसभाएं की हैं। जमीन पर सबसे ज्यादा सक्रिय नेताओं मे वह शुमार हैं।
दो तरफा हो गया है चुनाव
पश्चिम बंगाल में लेफ्ट और कांग्रेस दोनों इस स्थिति में नजर नहीं आ रहे हैं कि खुद से चुनाव लड़ सकें। पश्चिम बंगाल में भले ही 27 फीसीदी मुसलमान हैं लेकिन हुमायुं कबीर इतने बड़े चेहरे नहीं हैं कि चुनाव को इकतरफा अपनी तरफ खींच सकें। तृणमूल कांग्रेस अल्पसंख्यकों की पहली पसंद है, चुनाव-दर-चुनाव यह साबित भी हुआ है। पश्चिम बंगाल वह राज्य है, जहां असदुद्दीन ओवैसी के नेृत्व वाली पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) की दाल नहीं गलती।
अब राज्य का सियासी समीकरण सिर्फ दो पार्टियों के बीच बंट चुका है। पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस है। राज्य में तृणमूल कांग्रेस की प्रचंड बहुमत से सरकार है। 213 विधायक हैं। भारतीय जनता पार्टी के पास 77 विधायक थे, अभी 70 से ज्यादा विधायक हैं, कई विधायक टीएमसी में वापस लौट गए हैं। कांग्रेस के पास 1 सीट है, राष्ट्रीय सेक्युलर मजलिस पार्टी के पास 1 विधायक है। वामदलों के पास एक भी सीट नहीं है। आंकड़े बता रहे हैं कि यह चुनाव सिर्फ बीजेपी बनाम TMC का है। अभी तक ऐसे ही समीकरण नजर आ रहे हैं।
