संजय सिंह, पटना: राज्यसभा चुनाव के बाद बिहार कांग्रेस में उठे सियासी तूफान ने अब निर्णायक मोड़ ले लिया है। पार्टी के तीन विधायकों पर गाज गिरना लगभग तय माना जा रहा है। इन विधायकों पर आरोप है कि उन्होंने राज्यसभा चुनाव के दौरान मतदान से दूरी बनाकर न सिर्फ पार्टी लाइन का उल्लंघन किया, बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से नेशनल डेमोक्रैटिक अलायंस (एनडीए) उम्मीदवार की राह भी आसान कर दी। अब इस पूरे प्रकरण में अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया तेज हो गई है।
मनिहारी के विधायक मनोहर प्रसाद सिंह ने भी आखिरकार कारण बताओ नोटिस का जवाब प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय को भेज दिया है। उनके जवाब के इंतजार में ही प्रदेश कांग्रेस की अनुशासन समिति की कार्रवाई अटकी हुई थी। इससे पहले वाल्मीकि नगर के सुरेंद्र कुशवाहा और फारबिसगंज के मनोज विश्वास अपना जवाब सौंप चुके थे। तीनों विधायकों के जवाब मिलने के बाद अब पार्टी नेतृत्व के पास कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है।
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प्रदेश नेतृत्व पर खड़े किए सवाल
सूत्रों की मानें तो तीनों विधायकों के जवाब ने कांग्रेस नेतृत्व को और ज्यादा सख्त रुख अपनाने पर मजबूर कर दिया है। पार्टी के अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि इन विधायकों के जवाब में कहीं भी पश्चाताप या गलती स्वीकारने का भाव नहीं दिखा। उल्टा, तीनों ने अपने-अपने तरीके से प्रदेश नेतृत्व पर ही सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने राज्यसभा चुनाव में हुई कथित गड़बड़ियों के लिए प्रदेश कांग्रेस की रणनीति और नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराया है। यही नहीं, जवाबों की भाषा और तेवर से ये भी संकेत मिल रहे हैं कि ये तीनों विधायक अब कांग्रेस में बने रहने के इच्छुक नहीं हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि जब कोई जन प्रतिनिधि खुलकर संगठन के खिलाफ खड़ा हो जाए और अनुशासनहीनता को स्वीकारने के बजाय चुनौती देने लगे, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी हो जाती है।
गौरतलब है कि राज्यसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने अपने सभी विधायकों को सख्ती से मतदान करने का निर्देश दिया था। बावजूद इसके, इन तीन विधायकों की गैरहाजिरी ने पार्टी की रणनीति को झटका दिया और विपक्ष को राजनीतिक बढ़त हासिल करने का मौका मिल गया। इस घटना के बाद ही प्रदेश कांग्रेस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीनों विधायकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया था और निर्धारित समय सीमा के भीतर जवाब मांगा था। अब जबकि तीनों के जवाब सामने आ चुके हैं, प्रदेश कांग्रेस की अनुशासन समिति किसी भी वक्त बड़ी कार्रवाई का ऐलान कर सकती है। माना जा रहा है कि पार्टी से निष्कासन या निलंबन जैसे कड़े कदम उठाए जा सकते हैं। इससे पहले भी कांग्रेस नेतृत्व कई बार अनुशासनहीनता के मामलों में सख्त रुख दिखा चुका है।
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कांग्रेस के भीतर सरगर्मी बढ़ी
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह मामला सिर्फ तीन विधायकों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कांग्रेस के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान और असंतोष को भी उजागर करता है। आने वाले दिनों में इस कार्रवाई के दूरगामी राजनीतिक असर देखने को मिल सकते हैं, खासकर ऐसे समय में जब पार्टी राज्य में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है। फिलहाल, सबकी नजरें कांग्रेस की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। क्या पार्टी ‘बागी तेवर’ दिखाने वाले इन विधायकों पर सख्त कदम उठाएगी या फिर कोई बीच का रास्ता निकाला जाएगा लेकिन इतना तय है कि इस प्रकरण ने बिहार की राजनीति में नई हलचल जरूर पैदा कर दी है।
