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बिहार में CM चेहरे पर सस्पेंस, NDA की बैठक से पहले JDU ने बताई अपनी मंशा

बिहार में नए सीएम के चेहरे पर अभी तक कोई फैसला नहीं हुआ है। एनडीए की बैठक में सभी दल एकमत होकर निर्णय लेंगे। मगर उससे पहले तमाम नामों की चर्चा होने लगी है।

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बिहार में सीएम चेहरे पर सस्पेंस। (Photo Credit: X/@NitishKumar)

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संजय सिंह, पटना। बिहार की सियासत में अगले मुख्यमंत्री को लेकर अटकलों का दौर तेज हो गया है, लेकिन तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं है। जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय कुमार झा ने साफ शब्दों में कह दिया है कि अभी यह तय नहीं हुआ है कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री किस दल से होगा या फिर कौन बनेगा। उन्होंने संकेत दिया कि यह फैसला एनडीए के सभी घटक दलों के बीच व्यापक विमर्श के बाद ही लिया जाएगा।

 एनडीए गठबंधन की होगी सरकार

संजय झा ने नीतीश कुमार को एनडीए का सर्वमान्य और अनुभवी नेता बताते हुए कहा कि उन्होंने बिहार को दो दशक से अधिक समय तक नेतृत्व दिया। उनके अनुभव और मार्गदर्शन का लाभ आगे भी गठबंधन को मिलता रहेगा। झा ने कहा कि भले ही नीतीश कुमार राज्यसभा की भूमिका में नजर आएं, लेकिन बिहार की राजनीति और विकास से उनका जुड़ाव पहले की तरह बना रहेगा। संसद सत्र के दौरान वे दिल्ली में रहेंगे, लेकिन बाकी समय बिहार में सक्रिय रहकर पार्टी और सरकार को दिशा देते रहेंगे।

 

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कई नाम पर होने लगी चर्चा

राजनीतिक गलियारों में इस बीच नए चेहरे को लेकर चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। खासकर राज्य की जातीय और सामाजिक समीकरणों को देखते हुए संभावित उम्मीदवारों के नाम सामने आने लगे हैं। माना जा रहा है कि कोयरी-कुर्मी वोट बैंक को ध्यान में रखते हुए बीजेपी नेता सम्राट चौधरी का नाम प्रमुखता से उभर रहा है। वे वर्तमान में बिहार की राजनीति में एक मजबूत ओबीसी चेहरा माने जाते हैं। इस चर्चा को और बल तब मिला जब हम (हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा) के प्रमुख जीतन राम मांझी ने भी कुछ दिन पहले सार्वजनिक रूप से सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाए जाने की वकालत की। 

 

मांझी के इस बयान ने सियासी हलकों में नई बहस छेड़ दी है और इसे एनडीए के भीतर संभावित शक्ति संतुलन के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, जदयू फिलहाल किसी भी नाम को लेकर जल्दबाजी में नहीं दिख रही है। पार्टी का जोर इस बात पर है कि पहले गठबंधन के सभी सहयोगी दलों के साथ विचार-विमर्श किया जाए और फिर सर्वसम्मति से निर्णय लिया जाए। इससे यह भी संकेत मिलता है कि एनडीए इस बार मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर रणनीतिक तरीके से आगे बढ़ना चाहती है, ताकि चुनावी समीकरणों को मजबूती दी जा सके।

 

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अभी भी बना हुआ है सस्पेंस

बिहार की राजनीति में मुख्यमंत्री पद हमेशा से सामाजिक समीकरण, जातीय संतुलन और राजनीतिक अनुभव के बीच संतुलन का विषय रहा है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि एनडीए अंततः किस नाम पर सहमति बनाता है। क्या अनुभवी नेतृत्व पर भरोसा कायम रहेगा या फिर किसी नए चेहरे को आगे बढ़ाया जाएगा।


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