चंडीगढ़ में कड़ाके की ठंड के बीच राजनीतिक पारा बढ़ गया है। मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर पदों के लिए चुनावों की घोषणा हो गई है। शेड्यूल के अनुसार, 29 जनवरी को चुनाव होंगे और इसी दिन मौजूदा मेयर को कार्यकाल खत्म हो रहा है। 29 जनवरी को पता चल जाएगा कि क्या चंडीगढ़ में फिर से भारतीय जनता पार्टी (BJP)अपना मेयर बना पाएगी या फिर आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस एक साथ आकर बीजेपी के इरादों पर पानी फेर देंगी। खास बात यह है कि दोनों पक्ष अभी बराबरी पर हैं। 

 

 नगर निगम में कुल 35 पार्षद हैं और किसी भी पार्टी को मेयर बनाने के लिए 19 वोट चाहिए। वोटिंग में चंडीगढ़ के सांसद को भी वोट करने का अधिकार होता है। इस समय चंडीगढ़ में कांग्रेस नेता मनीष तिवारी सांसद हैं। ऐसे में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी को फायदा हो सकता है लेकिन बीजेपी भी आसानी से हार मानने वाली नहीं है। कुछ दिन पहले ही आप के दो पार्षदों को बीजेपी ने अपनी पार्टी में शामिल कर लिया था, जिससे बीजेपी के पास 16 से 18 पार्षद हो गए हैं। ऐसे में अब बीजेपी को एक पार्षद की ही जरूरत है। 

 

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आंकड़ों का खेल

बीजेपी- 18 (16 बीजेपी पार्षद और 2 आप से शामिल हुए)
AAP- 11
कांग्रेस- 7
सांसद - 1 वोट कांग्रेस पार्टी

AAP-कांग्रेस साथ तो बीजेपी साफ

आंकड़ों से साफ है कि अगर AAP और कांग्रेस एक साथ गठबंधन नहीं करती तो बीजेपी के लिए मेयर बनाना आसान हो जाएगा। हालांकि, अगर AAP और कांग्रेस एक साथ आ जाते हैं तो बीजेपी के लिए मेयर चुनाव में जीत दर्ज करना आसान नहीं होगा। अकेले बीजेपी के पास अब 18 पार्षद हैं और एक और पार्षद का साथ मिल जाने से बीजेपी का मेयर बनना तय हो जाएगा। अगर AAP और कांग्रेस गठबंधन कर लेते हैं तो AAP के 11 और कांग्रेस के 7 पार्षदों के साथ-साथ सांसद का एक वोट मिलने से गठबंधन को जरूरी 19 वोट मिल जाएंगे। अगर ऐसा हुआ तो बीजेपी AAP के पार्षदों को तोड़ने के बावजूद भी मेयर नहीं बना पाएगी। 2021 में हुए चुनावों के बाद 3 बार बीजेपी मेयर बनाने में कामयाब रही है, जबकि एक बार AAP और कांग्रेस के गठबंधन प्रत्याशी को लंबी लड़ाई लड़ने के बाद जीत मिली थी। 

 

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पार्षद नहीं कर पाएंगे हेरफेर

2024 के बाद से चंडीगढ़ के मेयर चुनाव पर पूरे देश की नजर रहती है। 2024 में चंडीगढ़ में अनिल मसीह ने कैमरे के सामने ही मतपत्रों के साथ छेड़छाड़ की थी और 20 पार्षदों के समर्थन के बावजूद AAP और कांग्रेस के प्रत्याशी की जगह 15 सीटों वाली बीजेपी के मेयर को जीता दिया था। हालांकि, बाद में सुप्रीम कोर्ट ने अनिल मसीह को दोषी करार दिया और AAP उम्मीदवार को चंडीगढ़ का मेयर बनाया था। 2025 के चुनाव में भी AAP और कांग्रेस के पास 20 पार्षदों का समर्थन था लेकिन बीजेपी के उम्मीदवार को विजेता घोषित कर दिया गया था लेकिन इस बार ऐसा कुछ नहीं हो सकेगा। इस बार प्रशासन ने फैसला लिया है कि मेयर चुनाव में सीक्रेट वोटिंग नहीं होगी बल्कि सदन में हाथ उठाकर वोटिंग होगी। ऐसे में किसी भी पार्षद का वोट अमान्य होने और क्रॉस वोटिंग का खतरा खत्म हो जाएगा। 

 

AAP और कांग्रेस के सामने गठबंधन करना एक बड़ी समस्या है क्योंकि अगले साल पंजाब में विधानसभा चुनाव हैं और वहां दोनों पार्टियां एक दूसरे के खिलाफ लड़ रही हैं। ऐसे में दोनों पार्टी गठबंधन से परहेज कर रही हैं लेकिन बिना गठबंधन के चंडीगढ़ में मेयर पद जीतना भी मुश्किल है। इसके अलावा AAP और कांग्रेस को अपने पार्षदों को टूटने से बचाने की चुनौती भी होगी। AAP के दो पार्षद पहले ही बीजेपी का दामन थाम चुके हैं।