पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। विधानसभा चुनाव से पहली पार्टी की राज्यसभा सदस्य मौसम नूर शनिवार को कांग्रेस में शामिल हो गईं। नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में जयराम रमेश, महासचिव गुलाम अहमद मीर और पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने उनका स्वागत किया। मौसम नूर का संबंध पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के प्रभावशाली खान चौधरी परिवार से है।
2019 में मौसम नूर ने कांग्रेस को अलविदा कहा था। टीएमसी में शामिल होने के बाद उन्हें 20202 में राज्यसभा भेजा गया। इसी साल अप्रैल महीने से उनका राज्यसभा का कार्यकाल खत्म हो रहा है। अब उम्मीद जताई जा रही है कि मौसम नूर कांग्रेस की टिकट पर मालदा से विधानसभा चुनाव लड़ सकती हैं। वे 2009 से 2019 तक मालदा लोकसभा सीट से दो बार कांग्रेस की सांसद भी रहीं। माना जा रहा है कि मौसम नूर के आने से मुस्लिम बहुल मालदा में कांग्रेस को बढ़त मिल सकती है।
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मौसम नूर ने 2019 में मालदा उत्तर लोकसभा सीट से तीसरी बार चुनाव लड़ा था। मगर बीजेपी नेता खगेन मूर्मू ने उन्हें हरा दिया था। कांग्रेस ने इशा खान चौधरी को अपना प्रत्याशी बनाया था। खास बात यह है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में मौसम नूर ने खगेन मूर्मू को ही हराया था, तब खगेन सीपीएम की टिकट पर चुनाव लड़े थे। 2009 से पहले मालदा अकेले लोकसभा सीट थी। मगर परिसीमन के बाद मालदा उत्तर और मालदा दक्षिण नाम से दो अलग-अलग लोकसभा सीटों का गठन हुआ। यहां कांग्रेस का खूब दबदबा रहा है।
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बांग्लादेश की सीमा से सटा पश्चिम बंगाल का यह जिला मुस्लिम और आदिवासी बहुल है। मालदा सीट पर खान चौधरी परिवार का दबदबा रहा है। 1980 से 2005 तक गनी खान चौधरी यहां से लोकसभा पहुंचे। 2005 में उनके निधन के बाद भी परिवार का सियासी रसूख कम नहीं हुआ। मौसम नूर के चाचा गनी खान चौधरी इंदिरा गांधी सरकार में रेल मंत्री रहे। मौसम नूर की मां रूबी नूर सुजापुर सीट से दिन बार की विधायक रहीं।