डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला में भीषण बमबारी की। ट्रंप का दावा किया कि राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को पकड़ लिया गया है। इस बीच अमेरिकी उप विदेश मंत्री क्रिस्टोफर ने कहा कि निकोलस मादुरो को न्याय का सामना करना पड़ेगा। कुछ समय पहले ही ट्रंप प्रशासन ने मादुरो को पकड़ने पर 450 करोड़ रुपये का इनाम घोषित किया था।
पिछले छह महीने से अमेरिकी सेना वेनेजुएला की घेरेबंदी में जुटी थी। दिसंबर में ट्रंप ने धमकी दी थी कि मादुरो के पास सिर्फ गिने-चुने दिन बचे हैं। ऐसे में आइये समझते हैं कि अमेरिका और वेनेजुएला के बीच दुश्मनी क्या थी, ट्रंप को हमला करने पर मजबूर क्यों होना पड़ा?
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- डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन वेनेजुएला पर ड्रग्स कार्टेल में शामिल होने का आरोप लगाता है। उसका आरोप है कि वेनेजुएला की सरकार तस्करी के माध्यम से अमेरिका तक मादक पदार्थ पहुंचा रही है। 2 सितंबर से अब तक अमेरिका वेनेजुएला से जुड़ी 30 समुद्री नावों पर हमला कर चुका है। वहीं कई तेल टैंकरों को अपने कब्जे में ले चुका है। वेनेजुएला अमेरिका के इस कदम को 'तेल चोरी' बताता है। सिर्फ ड्रग तस्करी ही नहीं, हमले के पीछे कई अन्य वजह भी हैं।
- अमेरिका निकोलस मादुरो की सरकार को वैधानिक नहीं मानता है। उसका मानना है कि चुनाव में धांधली करके मादुरो राष्ट्रपति बने हैं। अमेरिका विपक्षी नेता एडमंडो गोंजालेज को असली राष्ट्रपति मानता है। इसके अलावा मादुरो सरकार ने मुख्य विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो पर चुनाव लड़ने से जुड़ा प्रतिबंध लगा दिया। हाल ही में उन्हें शांति का नोबेल पुरस्कार मिला है। अमेरिका मादुरो के इस कदम से भी खफा था। अमेरिका उन पर वोट चोरी से चुनाव जीतने का आरोप लगाता है।
- 2013 में मादुरो के राष्ट्रपति बनने के बाद करीब 80 लाख लोगों ने वेनेजुएला छोड़ा। बड़ी संख्या में शरणार्थी अमेरिका पहुंचे। ट्रंप का अमेरिका में अवैध वेनेजुएला प्रवासियों के लिए मादुरो को दोषी मानते हैं। अवैध प्रवासियों को देश से बाहर निकाला ट्रंप का प्रमुख चुनावी वादा था। इस वजह से भी मादुरो के खिलाफ ट्रंप अधिक सख्ती बरत रहे हैं।
- साल 2020 में अमेरिका की एक अदालत ने निकोलस मादुरो और उनके करीब एक दर्जन सहयोगियों पर नशीले पदार्थ की तस्करी में शामिल होने का अभियोग लगाया था। तब से अमेरिका की सरकार मादुरो की गिरफ्तारी की मांग कर ही है। 2025 में ही ट्रंप ने वेनेजुएला राष्ट्रपति की जानकारी देने पर इनाम की राशि दोगनी यानी 25 से 50 मिलियन डॉलर कर दिया था। ट्रंप ने वेनेजुएला के ट्रेन डे अरागुआ और कार्टेल डे लॉस सोल्स समहू को आंतकी संगठन घोषित किया था।
- अमेरिका कई वर्षों से निकोलस मादुरो को हटाना चाहता था, क्योंकि वह उन्हें तानाशाह मानता है। मादुरो का भी अमेरिका के खिलाफ रुख रहा है। वामपंथी विचारधारा वाले मादुरो साल 2013 में पहली बार राष्ट्रपति बने। वही अपनी पार्टी यूनाइटेड सोशलिस्ट पार्टी ऑफ वेनेजुएला में दबदबा हासिल करने से पहले एक बस ड्राइवर और यूनियन के नेता रह चुके हैं।
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अमेरिका ने कहां-कहां किया हमला?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक निकोलस मादुरो को अमेरिका सेना की डेल्टा फोर्स ने पकड़ा है। यह वही फोर्स है, जिसने 2019 में आईएसआईएस के सरगना आंतकी अबू बकर अल-बगदादी को ढेर किया था। उधर, वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो के प्रवक्ता के मुताबिक अमेरिका ने राजधानी काराकस स्थित फ़्यूरटे टिउना सैन्य अड्डा, ला कार्लोटा एयरबेस, सिग्नल एंटीना और ला गुएरा बंदरगाह को तबाह किया है।