अमेरिका सेना ने शनिवार (3 जनवरी) की रात करीब 1:50 बजे वेनेजुएला की राजधानी काराकास पर हमला किया। इसके बाद अमेरिका ने वेनेजुएला पर कई हमले किए। वेनुजुएला पर इस बमबारी के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को पकड़ लिया गया है। उन्हें देश से बाहर ले जाया जा रहा है। ट्रंप के मुताबिक अमेरिकी एजेंसियों ने इस ऑपरेशन को अंजाम दिया है। ट्रंप ने यह भी कहा है कि इस ऑपरेशन के खत्म होने के बाद पूरी डिटेल्स शेयर की जाएंगी।
अमेरका और वेनुजुएला के रिश्ते पिछले कुछ समय से तनावपूर्ण बने हुए थे। पिछले कुछ महीने से अमेरिका वेनेजुएला की नाकेबंदी करने में जुटा था। कुछ तेल टैंकरों पर हमला भी किया गया। अमेरिका ने वेनेजुएला पर ड्रग्स तस्करी के आरोप लगाए थे। ट्रंप पहले ही चेतावनी दे चुके थे कि अमेरिका, वेनेजुएला में कथित ड्रग तस्करी नेटवर्क के खिलाफ नई कार्रवाई की तैयारी कर रहा है और जमीन पर हमले जल्द ही शुरू होंगे और आज अमेरिका ने वेनेजुएला पर हमला कर दिया। इस हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया है कि कोलस मादुरो को पकड़ कर देश से बाहर निकाल दिया गया है लेकिन अभी तक इस बारे में जानकारी सामने नहीं आई है कि उन्हें कहां ले जाया गया है। आइए जानते हैं कि कौन हैं निकोलस मादुरो जो अमेरिका के लिए समस्या बन गए थे।
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2013 से वेनेजुएला के राष्ट्रपति
वेनेजुएला दक्षिणी अमरीका महाद्वीप में स्थित एक देश है। इसकी सीमा गुयाना, ब्राजील और कोलम्बिया से लगती है और इसके पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है। इस देश की सत्ता पर लंबे समय से निकोलस मादुरो काबिज हैं। उन्होंने 2013 में राष्ट्रपति ह्यूगो शावेज की मौत के बाद वेनेजुएला की कमान संभाली थी और तब से अब तक वह वेनेजुएला के सर्वोच्च पद पर बैठे हुए हैं। निकोलस मादुरा का राजनीतिक सफर वामपंथी आंदोलन से शुरू हुआ था। वह पूर्व राष्ट्रपति ह्यूगो शावेज के करीबी सहयोगी रहे। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक बस ड्राइवर और यूनियन ऑर्गेनाइजर के तौर पर की थी। ह्यूगो चावेज के कार्यकाल के दौरान मादुरो पहले विदेश मंत्री रहे और बाद में उन्हें उपराष्ट्रपति बना दिया गया था।
अमेरिका के खिलाफ रहे मादुरो
राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की पहचान अमेरिका के कट्टर विरोधी की है। बतौर राष्ट्रपति उन्होंने खुद को समाजवादी प्रोजेक्ट का रक्षक बताया और अमेरिका की मुखर होकर आलोचना की। उन्होंने बार-बार अमेरिका पर तख्तापलट की कोशिशों, आर्थिक तोड़फोड़ और उनकी सरकार को अस्थिर करने के लिए लगाए गए प्रतिबंधों का समर्थन करने का आरोप लगाया है। जब 2006 में उन्हें वेनेजुएला का विदेश मंत्री बनाया गया था तब भी उन्होंने अमेरिका के खिलाफ आक्रामक बयानबाजी की थी। हालांकि, अपने पड़ोसी देशों के साथ उन्होंने रिश्तों में सुधार किया था। कोलंबिया के साथ तनावपूर्ण संबंधों को सुधारने का पूरा क्रेडिट निकोलस मादुरो को ही जाता है।
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चुनावों में हेरफेर के आरोप
पूर्व राष्ट्रपति ह्यूगो शावेज ने अपने जीवन के आखिरी साल में निकोलस मादुरो को वेनेजुएला का उपराष्ट्रपति बना दिया था। उन्होंने अपनी मौत से पहले दिए आखिरी भाषण में वेनेजुएला की जनता से निकोलस मादुरो को अपना नेता चुनने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि जो मैं नहीं कर पाया उसे करने की क्षमता युवा नेता मादुरो में है। उनके इस ऐलान के कुछ दिन बाद ही उनकी मौत हो गई थी और इसके बाद निकोलस मादुरो को देश की कमान मिली। हालांकि, अपने पहले चुनाव में वह मामूली अंतर से ही जीत दर्ज कर पाए लेकिन बाद में उन्होंने अपना दबदबा बना लिया और एक दशक से भी ज्यादा लंबे समय से वह वेनेजुएला के राष्ट्रपति बने हुए हैं।
उन पर पश्चिम के देश और वेनेजुएला के विपक्षी नेता मादुरो पर चुनावों में हेरफेर के आरोप लगाते हैं। मादुरो पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने के आरोप लगाए जाते रहे हैं। हालांकि, विपक्ष और पश्चिमी देशों के इन आरोपों को मादुरो नकारते रहे हैं लेकिन इसके बावजूद 2024 के चुनावों में उनकी जीत को कई देशों ने मान्यता नहीं दी थी। जिन देशों ने मादुरो की जीत को मान्यता नहीं दी उनमें अमेरिका समेत, स्पेन और यूरोपियन संसद भी शामिल थी। ऑल इंडिया रेडियो की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और यूरोपियन संसद ने निकोलस मादुरो को दोबारा राष्ट्रपति चुने जाने को अवैध घोषित कर दिया है और निर्वासित नेता एडमंडो गोंजालेज उरुतिया को वेनेजुएला का राष्ट्रपति माना था।