अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शांतिदूत वाली अपनी छवि बनाने की कोशिश की। मई में भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष समेत आठ युद्ध रुकवाने का दावा करते हैं। यह बात अलग है कि भारत उनके दावे को खारिज करता है। पाकिस्तान और इजरायल ने ट्रंप का समर्थन किया और उन्हें शांति का मसीहा बताया। यहां तक कि उनके लिए नोबेल पुरस्कार की मांग भी कर दी। पिछले साल यानी 20 जनवरी 2025 को डोनाल्ड ट्रंप ने दूसरी बार राष्ट्रपति पद की शपथ ली थी। अपने एक ही साल के कार्यकाल में ट्रंप ने सात देशों पर हमला किया। यह आंकड़ा उनके युद्ध रोकवाने वाली संख्या से सिर्फ एक काम है।
आर्म्ड कॉन्फ्लिक्ट लोकेशन एंड इवेंट डेटा के मुताबिक अमेरिका ने 20 जनवरी 2025 के बाद विदेशी धरती पर कुल 622 बम धमाकों का अंजाम दिया। अमेरिकी विमान और ड्रोन से यह हमले किए गए। आइये एक नजर डालते हैं, उन सात देशों पर जहां ट्रंप के आने के बाद अमेरिकी सेना ने बमबारी की।
वेनेजुएला: अमेरिका की सेना पिछले साल यानी 2025 से ही वेनेजुएला को निशाना बना रही है। पिछले साल अधिकांश हमले वेनेजुएला की नावों और तेल टैंकरों पर किए गए। मगर 2026 के तीसरे दिन अमेरिकी सेना ने राजधानी काराकास पर भीषण बमबारी की। एयरपोर्ट, बंदरगाह और अहम सैन्य ठिकानों को तबाह किया गया। ट्रंप ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को पकड़ने का भी दावा किया है।
अमेरिका ने अगस्त महीने में वेनेजुएला के खिलाफ सेना जमा करना शुरू किया था। 2 सितंबर को पहली बार एक छोटी नाव पर हमला किया गया। अब तक अमेरिका 30 से अधिक नावों को तबाह कर चुका है। इनमें करीब 95 लोगों की जान गई।
यहां भी पढ़ें: धमाके पर धमाके, आसमान में मंडरा रहे विमान; वेनेजुएला में अमेरिका का हमला
सीरिया: हाल ही में सीरिया के पल्मायरा में दो अमेरिकी सैनिक और एक अनुवादक की हत्या कर दी गई थी। हत्या का आरोप आईएसआईएस पर लगा था। डोनाल्ड ट्रंप ने बदले की कार्रवाई की धमकी दी थी। 19 दिसंबर की रात अमेरिकी सेना ने आईएसआईएस से जुड़े 70 ठिकानों पर भीषण बमबारी की।
नाइजीरिया: अमेरिका अपने ही सहयोगी नाइजीरिया पर ईसाइयों के कत्लेआम का आरोप लगाता है। उसका कहना है कि आईएसआईएस के आंतकी ईसाई समुदाय को निशाना बना रहे हैं, जबकि सरकार कोई कदम नहीं उठा रही है। कुछ दिन पहले ट्रंप ने नाइजीरिया पर हमले की धमकी दी और 25 दिसंबर को क्रिसमस के दिन यह धमकी हकीकत में बदल गई। अमेरिकी एयर स्टाइक में आईएसआईएस के कई आंतकी मारे गए।
ईरान: 12 जून को इजरायल ने अचानक ईरान पर हमला कर दिया। उसके अहम सैन्य और परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया गया। 22 जून को संघर्ष में अमेरिका की एंट्री हुई। अमेरिकी नौसैना और वायुसेना ने ईरान के इस्फहान, फोर्डो और नतांज परमाणु ठिकानों पर बमबारी की। जवाब में ईरान ने भी कतर स्थित अमेरिकी बेस को निशाना बनाने की कोशिश की। हालांकि 12 दिन बाद 22 जून को ही दोनों के बीच युद्धविराम हो गया। इस संघर्ष में इजरायल को अपने 28 और ईरान को 1100 से ज्यादा नागरिकों को खोना पड़ा।
सोमालिया: अमेरिका अफ्रीकी देश सोमलिया में भी हमलों को अंजाम दे रहा है। अल-कायदा से जुड़े अल-शबाब और आईएसआईएस के खिलाफ पिछले साल फरवरी में अमेरिका ने बमबारी शुरू की। अब तक 111 हमलों को अंजाम दिया गया है। बता दें कि अमेरिका की सेना सोमाली की सेना को ट्रेनिंग देती है। इसके अलावा अल-शबाब के खिलाफ मिलकर कार्रवाई करती है। दक्षिण-मध्य सोमालिया में अल-शबाब और पुंटलैंड के पहाड़ी इलाकों में आईएसआईएस का कब्जा है।
यहां भी पढ़ें: अमेरिका ने पत्नी के साथ वेनेजुएला के राष्ट्रपति को पकड़ा, ट्रंप का दावा
यमन: ट्रंप प्रशासन पिछले साल मार्च से ही ऑपरेशन रफ राइडर के तहत यमन में हूती विद्रोहियों पर लगातार हमलों को अंजाम दे रहा है। दरअसल, गाजा पर इजरायल के हमले के बाद से ही हूती विद्रोही लाल सागर में अमेरिकी और इजरायली जहाजों को निशाना बना रहे हैं। अमेरिका ने जवाबी हमले में हूती विद्रोहियों के बंदरगाह, एयर डिफेंस सिस्टम, रडार सिस्टम और राजधानी सना पर बमबारी की। हालांकि 6 मई को ओमान की दखल के बाद से युद्धविराम लागू है।
इराक: ट्रंप के आने के बाद पिछले साल 13 मार्च को अमेरिकी सेना इराक में बमबारी की थी। हमला इराक के अल-अनबार प्रांत पर किया गया था। इसमें आईएसआईएल से जुड़े लोगों को निशाना बनाया गया था। अमेरिका ने यह हमला इराक की खुफिया एजेंसी के साथ मिलकर किया था। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट पर आईएसआईएस के एक भगोड़े नेता के मारे जाने की पुष्टि की थी।