उत्तर प्रदेश की सियासत में सत्तारूढ़ दल, खुलकर कभी एक-दूसरे जाति सूचक शब्दों से हमला नहीं करते थे लेकिन 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले ओम प्रकाश राजभर, नया दांव चल रहे हैं। वह महीनों से 'अहीर' समुदाय से भड़के हैं। किसी जमाने में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के कट्टर दोस्त रहे ओम प्रकाश राजभर, अब उनके सियासी दुश्मन हो गए हैं। यह दुश्मनी, सियासी कम, निजी दुश्मनी ज्यादा लग रही है।
ओम प्रकाश राजभर के निशाने पर 'अहीर' हैं। वह अहीर समुदाय के लोगों के खिलाफ खुलकर लिख रहे हैं। वह कह चुके हैं कि गरीबों की पीठ पर अहीरों की लाठी पड़ती है। कभी वह मुसलमानों को घेरते हैं, कभी अहीरों को। उत्तर प्रदेश की सियासत में समाजवादी पार्टी का कोर वोट बैंक, 'यादव और मुसलमान' कहे जाते हैं। इसी 'M-Y' फॉर्मूले के सहारे समाजवादी पार्टी ने कई बार यूपी में जीत का स्वाद चखा है।
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'PDA मतलब पीट देगा अहीर'
ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव के पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक (PDA) फॉर्मूले को पीट देगा अहीर फॉर्मूला बता दिया है। उनका कहना है कि अहीर, पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यकों को पीटता है, जातीय उत्पीड़न करने वाली सबसे बड़ी जाति अहीरों की है। उनके बयान पर बवाल छिड़ा है और यादव समाज के लोग, ओम प्रकाश राजभर से नाराज हैं।
ओम प्रकाश राजभर ने X पर लिखा, 'एक कहावत है 'उलटा चोर कोतवाल को डांटे।' अखिलेश यादव, 27 तारीख से चिल्ला रहे हो आप कि लखनऊ में हत्या हो गई। हत्या हो गई, हत्यारे की गिरफ्तारी नहीं हुई। अरे अखिलेश बाबू मिल गया हत्यारा, आपका अपना, आपका बहुत करीबी। सुना है गिरफ्तार आरोपी तो कोई यादव है न? आपकी समाजवादी लोहिया वाहिनी का उपाध्यक्ष? दूसरा वाला मुस्लिम है? दोनों आपके वोटर हैं। अखिलेश जी इन्हीं को तो आप बोलते है कि बच्चा है तू मेरा।'
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ओम प्रकाश राजभर, अध्यक्ष, सुहलदेव भारतीय समाज पार्टी:-
PDA यानी पीट देगा अहीर वाली फोटो डाल रहा हूं, जो आपके साथ है। यही लखनऊ हत्या का मास्टरमाइंड है, जिसके साथ आप शान से फोटो खिंचाए हैं। दूसरा वाला भी आपका ही पट्ठा है। जल्दी ही उसकी फोटो भी सार्वजनिक करूंगा।
क्यों यादव बनाम राजभर की हो गई है लड़ाई?
ओम प्रकाश राजभर ने 2 जून को एक टीवी चैनल पर दिए गए इंटरव्यू में कहा, 'समाजवादी पार्टी जब सत्ता में रहती है, जब अखिलेश यादव सत्ता में रहते हैं तब वह अपनी जाति का भला रहे हैं, जब सत्ता से बाहर आते हैं, तब पिछड़ों की याद आती है। 3 सितंबर 2013 को हाई कोर्ट ने कहा था कि पिछड़ी जातियों के लिए लागू आरक्षण का लाभ सिर्फ पिछड़ी जातियां ले रहीं हैं। अखिलेश यादव, सिर्फ अपनों को फायदा देते हैं।'
ओम प्रकाश राजभर का कहना है कि अहीर और मुसलमानों की पार्टी समाजवादी पार्टी हो गई है। इस फॉर्मूले की वजह से समाजवादी पार्टी, किसी भी पिछड़े वर्ग का ध्यान नहीं देती। नाऊ, बढ़ई, विश्वकर्मा, राजभर,कुर्मी जैसी जातियां, अखिलेश यादव की नजर में नहीं हैं। ओम प्रकाश राजभर, इसे सियासी मुद्दा बनाना चाहते हैं। यादव बनाम अन्य ओबीसी का राग, वह बीते कई महीनों से अलाप रहे हैं।
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क्यों खुलकर जाति वाला दांव चल रहे हैं ओम प्रकाश राजभर?
उत्तर प्रदेश की जातीय राजनीति में ओम प्रकाश राजभर और अखिलेश यादव के बीच खुली जंग, गैर-यादव OBC वोट बैंक को लेकर है। ओम प्रकाश राजभर, खुद को गैर यादव ओबीसी वर्ग का नेता बताते हैं। उनका कहना है कि यादव, दूसरी पिछड़ी जातियों का उत्पीड़न करते हैं। ओपी राजभर, राजभर समुदाय से आते हैं। यह गैर यादव ओबीसी में यह जाति मजबूत स्थिति में है। करीब 3 से 4 फीसदी वोट बैंक है। ओम प्रकाश राजभर का तर्क है कि समाजवादी पार्टी की PDA रणनीति असल में यादव-केंद्रित है।
उनका कहना है कि अखिलेश यादव के शासन में गैर-यादव OBC को पर्याप्त हिस्सेदारी नहीं मिली, जबकि यादव समुदाय को खूब फायदे मिले। OBC में सबसे बड़ा और SP का कोर वोट बैंक है। ओम प्रकाश राजभर अब 2027 के चुनाव से पहले गैर-यादव OBC को एकजुट कर अपना अलग वजूद मजबूत करना चाहते हैं। समाजवादी पार्टी पर निर्भरता कम हो और BJP गठबंधन में ज्यादा सीटें मिलें।
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राजभर वोटों में कैसे सेंध लगा रहे हैं अखिलेश यादव?
अखिलेश यादव समाजवादी पार्टी के पारंपरिक यादव-मुस्लिम वोट बैंक को बचाना चाह रहे हैं। वह गैर-यादव OBC में सेंध लगाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने अपनी पार्टी में सीमा राजभर जैसी नेताओं को आगे बढ़ाया है। अगर राजभर जैसे छोटे OBC वर्ग, समाजवादी पार्टी से अलग होकर स्वतंत्र या BJP के साथ मजबूत हुए तो SP का OBC वोट बिखर सकता है। यह उनके लिए 3 से 4 प्रतिशत वोट बैंक का खिसकना होगा। अखिलेश यादव, 2027 में पूर्वांचल की दर्जनों सीटों पर वोट शेयर बढ़ाना चाहते हैं। अगर राजभर वोट साथ आए तो उनका काम आसान हो सकता है। ओम प्रकाश राजभर की नजर, अखिलेश यादव के इसी दांव पर है।
