भारतीय सुहेलदेव समाज पार्टी (सुभासपा) धीरे-धीरे ही सही लेकिन उत्तर प्रदेश की सियासत की एक अहम कड़ी बनती जा रही है। पार्टी मुखिया अपने बयानों से लेकर अपनी राजनीतिक बयानों की वजह से लगातार राज्य की राजनीति के केंद्र में रहते हैं। इन दिनों पार्टी प्रमुख ओम प्रकाश राजभर दो मोर्चे पर राजनीति कर रहे हैं। एक तरफ वह रोजाना मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी और उसके अध्यक्ष अखिलेश यादव पर हमला कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ वह जिलों में घूम-घूमकर पार्टी संगठन की बैठकें कर रहे हैं।
सुभासपा की इन बैठकों में ओपी राजभर पार्टी कार्यकर्ताओं को जरूरी निर्देश दे रहे हैं। वह पार्टी के संगठन को मजबूत करने की बात कर रहे हैं, ताकि आगामी विधानसभा चुनाव में एक भी वोट जाया ना जाने पाए। साथ ही राजभर मुस्लिम और दलित वोटरों को रिझाने के लिए भी इन समाजों से नेताओं को पार्टी में शामिल कर रहे हैं।
सपा-बीजेपी को साधने की रणनीति?
योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री ओपी राजभर अपनी इन दोनों चालों से समाजवादी पार्टी और बीजेपी दोनों को साधने की रणनीति पर भी काम कर रहे हैं। दरअसल, अभी तक के उनके बयानों और कदमों को देखने के बाद लगता है कि वह आगामी चुनाव बीजेपी के साथ ही रहकर लड़ेंगे। मगर, सियासी समीकरण बिगड़ने पर वह सपा के साथ भी गठबंधन में चुनाव लड़ सकते हैं।
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जहां सीटों और पद, उस ओर झुकाव
सुभासपा के पिछले कदमों को देखने के बाद तो यही प्रतीत होता है कि राजभर किसी एक गठबंधन के साथ में रहकर चुनाव नहीं लड़े, बल्कि उन्हें जहां जिस गठबंधन में अधिक सीटें और पद मिला राजभर उसी के हो लिए। ऐसे में राज्य की सियासत में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए ओपी राजभर किसी भी गठबंधन में रहकर ज्यादा से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ना चाहते हैं। इसके लिए वह जमीन पर काम भी कर रहे हैं। वह अपनी दावेदारी मजबूत कर रहे हैं।
17 सीटों पर राजभर की दावेदारी
यूपी विधानसभा चुनावों में अब एक साल से कम का समय बचा है। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी चर्चा में हैं। 2022 में ओम प्रकाश राजभर समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा था। उनकी पार्टी के खाते में 18 सीटें आई थीं। इनमें से एक सीट पर चुनाव चिन्ह सपा का था, तो कुल मिलाकर 17 सीटों पर राजभर की पार्टी ने ताकत दिखाते हुए छह सीटें जीतीं थीं। वहीं, मिश्रिख और धनगटा विधानसभा सीटों पर सुभसपा दूसरे नंबर पर रही थी।
यही वजह है कि ओपी राजभर इन्हीं 17 सीटों पर अपनी पार्टी की दावेदारी मजबूत कर रहे हैं। चुनावों से पहले एनडीए गठबंधन में ओपी राजभर उन्हीं 17 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे या और ज्यादा सीटों पर दावेदारी पेश करेंगे, इसको लेकर अभी से राजनीतिक चर्चाओं शुरू हो गई हैं।
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2022 में क्या था हाल?
समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में ओपी राजभर ने अपनी पारम्परिक सीट गाजीपुर की जहूराबाद से चुनाव लड़ा था और भारी मतों से जीत हासिल की थी। उन्हें जहूराबाद में 1,14,860 वोट जबकि बीजेपी उम्मीदवार कालीचरण राजभर को 69,228 वोट मिले थे। सुभासपा ने 2022 के चुनाव में कुल 12,52,925 वोट हासिल किये थे जो कुल वोट प्रतिशत का 1.36 फीसदी था।
ओपी राजभर पूर्वांचल की राजभर जाति के वोटों पर अपनी सियासत करते हैं। वह दावा करते हैं कि वह पूर्वांचल में सीटें जीत नहीं सकते तो किसी भी दल का समीकरण तो बिगाड़ ही सकते हैं। यही वजह है कि उन्होंने पिछले चुनाव में पूर्वांचल में अपनी ताकत दिखाई थी और यहां बीजेपी कई सीटें उनके समीकरणों की वजह से हारी थी। खासकर गाजीपुर , मऊ, जौनपुर, बलिया और बस्ती जिलों में उनकी पार्टी का खासा असर देखने को मिला था।
इन 6 सीटों पर मिली थी जीत
- जहूराबाद (गाजीपुर): ओम प्रकाश राजभर ने बीजेपी को 45,632 वोटों के मार्जिन से हराया
- जखनिया (SC,गाजीपुर): त्रिवेणी राम ने बीजेपी के रामराज वनवासी को 36,865 वोटों के मार्जिन से हराया
- मऊ: अब्बास अंसारी ने बीजेपी को 38,000 वोटों के मार्जिन से हराया
- बेल्थरा रोड (SC,बलिया): हंसू राम ने बीजेपी को 5,500 वोटों के मार्जिन से हराया
- जफराबाद (जौनपुर): जगदीश नारायण ने बीजेपी को 6,000 वोटों के मार्जिन से हराया
- महादेवा (SC,बस्ती): दुधराम ने बीजेपी के रवि कुमार सोनकर को 5,495 वोटों के मार्जिन से हराया
इन दो सीटों पर दूसरे नंबर पर रही सुभासपा
पूर्वांचल में सुभासपा का स्ट्राइक रेट बेहतर था, लेकिन कई सीटों पर उसे निराशा भी मिली, लेकिन सीतापुर की की मिश्रिख सीट पर दूसरे स्थान पर रही थी। यहां से बीजेपी ने जीत दर्ज की, जबकि सुभासपा के मनोज रागुवंशी को 79,627 वोट मिले और वे 11,465 वोटों से हार गए थे। इसके अलावा धनघटा आरक्षित सीट से भी सुभासपा दूसरे नंबर पर रही। यहां बीजेपी से हार का अंतर 10,553 वोट का ही रहा। इसके आलावा देवरिया की सलेमपुर (SC), शोहरतगढ़ से भी दूसरे नंबर पर रही थी, जबकि रामकोला और अजगरा सीटों पर भी सुभासपा ने कड़ी टक्कर दी थी।
बता दें कि ओपी राजभर ने 2017 और 2022 का विधानसभा चुनाव अखिलेश यादव के साथ में मिलकर लड़ा था और उन्हें चुनावों में फायदा मिला। लेकिन 2027 के चुनाव में बीजेपी उन्हें इन हालातों में कितनी सीटें देगी यह देखने वाली बात होगी।