लखनऊ। उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में विधानसभा के चुनाव होने हैं। इसको लेकर बीजेपी ने अभी से ही तैयारियां शुरू कर दी हैं। बूथ प्रबंधन से लेकर संगठन अध्यक्ष अभी से अपने-अपने संगठनों के पदाधिकारियों के साथ बैठक कर उन्हें दिशा-निर्देश दे रहे हैं। मंगलवार को प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी सभी जिलों के जिलाध्यक्षों के साथ बैठक करेंगे।
वर्ष 2022 में बीजेपी ने अपना दल व निषाद पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में बीजेपी दोबारा सरकार बनाने में कामयाब रही थी। ओपी राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी और जयंत चौधरी की राष्ट्रीय लोक दल ने समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। बीजेपी की सरकार बनने के बाद राजभर और जयंत चौधरी ने सपा का दामन छोड़कर बीजेपी से हाथ मिला लिया था।
सामंजस्य बनाए रखना बड़ी चुनौती
इसके बाद जयंत चौधरी केंद्र सरकार में मंत्री बन गए और ओपी राजभर योगी सरकार में मंत्री बनाए गए। ऐसे में बीजेपी के सहयोगी दल आगामी विधानसभा चुनाव में अपनी-अपनी पार्टियों के लिए अधिक से अधिक टिकटों की मांग करेंगे। बीजेपी के लिए सहयोगी दलों को अपने खेमे में बनाए रखना और सामंजस्य बनाए रखना बड़ी चुनौती होगा।
यह भी पढ़ें: पंजाब में AAP को एक और झटका! CM भगवंत मान के भाई ने थामा BJP का दामन
पश्चिम की जाट सीटों पर रालोद का दबदबा
पश्चिम यूपी के जनपद मुजफ्फरनगर, बागपत, मेरठ, शामली और गाजियाबाद की सीटें जाट बाहुल्य हैं। यहां पर राष्ट्रीय लोक दल का लंबे समय से दबदबा चला आ रहा है। वर्ष 2022 के चुनाव में रालोद ने सपा से गठबंधन करके 33 सीटों पर चुनाव लड़ा था। इसमें वह 9 सीटें जीतने में कामयाब रही थी। ऐसे में वह बीजेपी से 2027 के चुनाव में पार्टी के लिए अधिक से अधिक सीटों की मांग करेगी।
पूर्वांचल में नौ जिलों में सुहेलदेव पार्टी मजबूत
पूर्वांचल के जनपद आजमगढ़, मऊ, बलिया, गाजीपुर, वाराणसी, देवरिया, गोरखपुर, अयोध्या और देवीपाटन मंडल में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी का संगठन मजबूत है। वर्ष 2022 में सपा के साथ गठबंधन कर पार्टी ने 17 सीटों पर चुनाव लड़ा और 6 पर जीत हासिल की थी। ऐसे में आने वाले विधानसभा चुनाव में पार्टी के मुखिया बीजेपी से इन जिलों में पार्टी को अधिक टिकट देने की मांग करेंगे।
यह भी पढ़ें: फ्रंटल संगठन और विभाग अधूरे, UP में कैसे मजबूत हो पाएगी कांग्रेस?
पांच जिलों में निषाद समाज की सर्वाधिक संख्या
पूर्वांचल के जनपद गोरखपुर, आजमगढ़, मऊ, वाराणसी और प्रयागराज में निषाद समाज के लोगों की संख्या काफी है। पिछले चुनाव में निषाद पार्टी ने बीजेपी के साथ गठबंधन में 16 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़कर 5 सीटों पर जीत हासिल की थी। निषाद पार्टी भी आगामी विधानसभा चुनाव में पहले से अधिक सीटें दिए जाने की मांग करेगी। बीजेपी के लिए पुराने सहयोगी दलों को अपने साथ बनाए रखना और टिकट वितरण में संतुलन बनाना चुनौती होगा।
अपना दल की कुर्मी वोटरों पर अच्छी पकड़
वहीं, पूर्वांचल के जनपद मिर्जापुर, सोनभद्र, प्रतापगढ़, भदोही तथा बुंदेलखंड के बांदा, झांसी और जालौन में कुर्मी वोटरों की संख्या अधिक है। यहां अनुप्रिया पटेल की पार्टी अपना दल का संगठन मजबूत है। पार्टी ने पिछले चुनाव में बीजेपी के साथ गठबंधन करके 17 सीटों पर चुनाव लड़ा और 12 सीटों पर जीत हासिल की थी। पार्टी की मुखिया अनुप्रिया पटेल आगामी चुनाव में 17 से अधिक सीटों की मांग कर सकती हैं।
