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फ्रंटल संगठन और विभाग अधूरे, UP में कैसे मजबूत हो पाएगी कांग्रेस?

उत्तर प्रदेश में 6 सांसदों वाली कांग्रेस पार्टी के फ्रंटल संगठन लंबे समय से अधूरे पड़े हैं। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि 2027 में कांग्रेस किसके बलबूते चुनाव लड़ेगी? 

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यूपी कांग्रेस दफ्तर, Photo Credit: Social Media

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देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस उत्तर प्रदेश में संगठनात्मक कमजोरी से जूझ रही है। पश्चिम बंगाल और असम विधानसभा चुनावों में करारी हार के बाद भी पार्टी नेतृत्व ने अब तक कोई बड़ा सबक नहीं लिया है। साल 2027 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं लेकिन प्रदेश में कांग्रेस का संगठन अभी तक पूरी तरह खड़ा नहीं हो पाया है।

 

करीब दो साल और नौ महीने से अजय राय प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं लेकिन डेढ़ साल से प्रदेश कार्यकारिणी भंग चल रही है। जिला और विधानसभा स्तर पर भी अधिकांश समितियों का गठन नहीं हो सका है। ऐसे में पार्टी कार्यकर्ताओं में निराशा का माहौल देखा जा रहा है। वहीं, दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) लोकसभा और विधानसभा चुनावों में लगातार सफलता के बाद बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने में जुटी हुई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि कांग्रेस समय रहते संगठनात्मक ढांचे को मजबूत नहीं करती तो 2027 में बीजेपी का मुकाबला करना उसके लिए बेहद कठिन साबित हो सकता है।

 

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39 फ्रंटल संगठन और विभाग अब भी अधूरे

उत्तर प्रदेश कांग्रेस में कुल 39 फ्रंटल संगठन, विभाग और प्रकोष्ठ हैं। प्रदेश नेतृत्व ने कुछ प्रकोष्ठों में नियुक्तियां की हैं लेकिन बड़ी संख्या में विभाग अब भी खाली पड़े हैं। कई संगठनों में जिम्मेदार पदाधिकारी तक नहीं हैं। अनुसूचित जाति विभाग, मानवाधिकार विभाग, पूर्व सैनिक विभाग, अल्पसंख्यक विभाग, प्रचार एवं प्रकाशन विभाग, पिछड़ा वर्ग विभाग, असंगठित श्रमिक विभाग, चिकित्सा प्रकोष्ठ और खेलकूद प्रकोष्ठ जैसे कई महत्वपूर्ण विभाग अभी भी सक्रिय नेतृत्व का इंतजार कर रहे हैं।

लोकसभा में बेहतर प्रदर्शन लेकिन संगठन कमजोर

साल 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन कर 17 सीटों पर चुनाव लड़ा था। इनमें पार्टी को 6 सीटों पर जीत मिली थी। राहुल गांधी ने रायबरेली सीट से जीत दर्ज की जबकि अमेठी से किशोरी लाल शर्मा ने बीजेपी की तत्कालीन सांसद स्मृति ईरानी को हराकर बड़ी जीत हासिल की थी। इसके अलावा, सहारनपुर से इमरान मसूद, अमरोहा से दानिश अली, जालौन से प्रदीप जैन आदित्य और तारिक अनवर जैसे नेताओं ने पार्टी को मजबूती दी।

 

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प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस के पास वर्तमान में केवल दो विधायक हैं। रामपुर खास सीट से अराधाना मिश्रा उर्फ मोना और महाराजगंज की फरेंदा सीट से विरेन्द्र चौधरी ने साल 2022 में जीत दर्ज की थी।

बड़े चेहरे की कमी भी चुनौती

 

प्रदेश कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती मजबूत नेतृत्व की मानी जा रही है। प्रदेश अध्यक्ष अजयराय के अलावा फिलहाल ऐसा कोई बड़ा चेहरा नजर नहीं आ रहा जो पूरे प्रदेश में पार्टी को मजबूती दे सके। प्रदेश कार्यालय में चर्चा है कि इसी माह संगठन का गठन किया जा सकता है। वहीं कुछ नेताओं के बीच नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर भी अटकलें चल रही हैं। अब देखना यह होगा कि कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनाव नए नेतृत्व के सहारे लड़ती है या फिर मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व में ही चुनावी मैदान में उतरती है।

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