राजनीतिक गलियारों में इन दिनों पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासत गरमाई हुई है। जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद केसी त्यागी ने आखिरकार पार्टी छोड़ दी है और राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) में शामिल हो गए हैं। उनके साथ उनके बेटे अम्बरीष त्यागी ने भी आरएलडी का दामन थाम लिया है। आरएलडी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने रविवार को दिल्ली में दोनों नेताओं को औपचारिक रूप से पार्टी की सदस्यता दिलाई। यह कदम जेडीयू से केसी त्यागी के लंबे समय से चले आ रहे मतभेदों का परिणाम माना जा रहा है।

 

केसी त्यागी पिछले कई दशकों से बिहार की राजनीति में सक्रिय रहे हैं। वह जेडीयू के गठन के समय से ही पार्टी के मजबूत स्तंभों में शुमार थे। वर्ष 2003 में जब समता पार्टी और जनता दल का विलय होकर जेडीयू बना, तब जॉर्ज फर्नांडिस, शरद यादव और नीतीश कुमार के साथ त्यागी भी प्रमुख चेहरों में शामिल थे। उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और प्रवक्ता के रूप में लंबे समय तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। नीतीश कुमार के साथ उनका करीबी रिश्ता रहा, लेकिन हाल के वर्षों में संबंधों में खटास आई।

 

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रिन्यू नहीं कराई सदस्यता

इस साल जनवरी में केसी त्यागी ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की मांग की थी, जिस पर जेडीयू ने तीखी प्रतिक्रिया दी। पार्टी ने सार्वजनिक रूप से कहा कि त्यागी के बयान आधिकारिक नहीं हैं और यह स्पष्ट नहीं कि वे अब पार्टी में हैं भी या नहीं। इसके बाद मार्च में जेडीयू के सदस्यता अभियान के दौरान त्यागी ने अपनी सदस्यता का नवीनीकरण नहीं कराया। 17 मार्च को उन्होंने औपचारिक रूप से पार्टी से दूरी बना ली। त्यागी ने कहा कि वर्तमान जेडीयू में उनके विचारों के लिए जगह नहीं बची है, हालांकि नीतीश कुमार के प्रति उनका सम्मान बरकरार है।

यूपी की तरफ होगा फोकस

अब आरएलडी में शामिल होने से केसी त्यागी का राजनीतिक फोकस उत्तर प्रदेश की ओर शिफ्ट हो गया है। उनके अनुभव और संगठनात्मक कौशल से आरएलडी को मजबूती मिलने की उम्मीद है, खासकर पश्चिमी यूपी में जहां चौधरी चरण सिंह की विरासत मजबूत है। अम्बरीष त्यागी के शामिल होने से युवा वर्ग में पार्टी की पकड़ बढ़ सकती है। अम्बरीष पहले 2022 विधानसभा चुनाव में बीजेपी से जुड़े थे, लेकिन अब पिता के साथ आरएलडी में हैं।

 

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जयंत चौधरी ने किया स्वागत

जयंत चौधरी ने दोनों का स्वागत करते हुए कहा कि त्यागी जैसे अनुभवी नेता पार्टी को नई ऊर्जा देंगे। यह घटना एनडीए के भीतर पश्चिमी यूपी की सियासत को प्रभावित कर सकती है, जहां 2027 के विधानसभा चुनाव में आरएलडी अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश में है। केसी त्यागी के इस फैसले से जेडीयू में भी हलचल मची है, क्योंकि वे पार्टी के पुराने और प्रभावशाली चेहरों में से एक थे।