महाराष्ट्र के नगर निकायों के चुनावों के नतीजे सामने आ रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और शिवेसना का गठबंधन ज्यादातर निकायों में जीत हासिल करता दिख रहा है। ऐसे में लातूर शहर काफी चर्चा में है। वही लातूर जो पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख का गढ़ हुआ करता था। चुनाव प्रचार के दौरान भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने कह दिया था कि यहां से विलासराव देशमुख की यादें इस शहर से मिटा देनी हैं। इस पर उनके बेटे और अभिनेता रितेश देशमुख ने कहा था कि उनके पिता का नाम लोगों कि दिलों में है और उसे कोई मिटा नहीं सकता है। अब लातूर में कांग्रेस पार्टी जीत हासिल करती दिख रही है।

 

लातूर नगर निगम में कुल 70 सीटें हैं। चुनाव में जीत के लिए 36 सीटों पर जीत की जरूरत थी। इस चुनाव में कांग्रेस ने 43 सीटों पर जीत हासिल करके इतिहास रच दिया है और फिर से लातूर नगर निगम पर अपना कब्जा जमा लिया। दूसरे नंबर पर रही बीजेपी को कुल 22 सीटों पर जीत मिली है। कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ी वंचित बहुजन अघाड़ी ने 4 सीटों पर जीत हासिल की है। वहीं, शिवेसना और शिवसेना (UBT) का यहा खाता नहीं खुला है।

 

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क्या बोल गए थे रवींद्र चव्हाण?

 

रवींद्र चव्हाण ने कहा था, 'आपके उत्साह को देखकर मैं 100 पर्सेंट कह सकता हूं कि अब विलासराव देशमुख की यादें इस शहर से मिटा दी जाएंगी।' इस बयान पर बवाल बढ़ा तो रवींद्र चव्हाण ने अपने बयान पर माफी भी मांग ली थी। उन्होंने कहा था, 'मैंने विलासराव देशमुख की आलोचना नहीं की। कांग्रेस विलासराव देशमुख के नाम पर वोट मांग रही है। विलासराव देशमुख बड़े नेता थे और उन्होंने मुख्यमंत्री के रूप में काम किया। अगर मेरे इस बयान से मेरे अच्छे मित्र और उनके बेटे की भावनाएं आहत हुई हैं तो मैं उनसे माफी मांगता हूं।'

 

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इस बयान के बाद रितेश देशमुख ने एक वीडियो जारी करके कहा था, 'मैं हाथ जोड़कर कहना चाहता हं कि जो लोग जनता के लिए जीते हैं, उनके नाम लोगों के दिल में गहरी छाप छोड़ जाते हैं। लिखे हुए को मिटाया जा सकता है लेकिन ऐसी गहरी छाप को नहीं।' रितेश देशमुख के भाई और कांग्रेस के नेता अमित देशमुख ने कहा कि यह टिप्पणी बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और इससे सभी लातूरवासियों की भावनाएं आहत हुई हैं।