उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन के सहयोगी निषाद पार्टी अब राज्य में अलग सियासी दांव चल रही है। संजय निषाद, कभी समाज की बेटियों के लिए रोते हैं, कभी समाजवादी पार्टी की सरकार में किए गए कथित दमन को लेकर इंसाफ की मांग करते हैं। वह मुख्यमंत्री योगी की तारीफ भी करते हैं, साथ ही यह भी जता देते हैं कि निषादों के साथ अच्छा नहीं हो रहा है। वह गोरखपुर से लेकर मेरठ तक, एक के बाद एक रोड शो और जनसभाएं कर रहे हैं।

अब निषाद पार्टी के मुखिया संजय निषाद, निषादों के लिए अनुसूचित जाति का दर्जा मांग रहे हैं। उन्होंने यहां तक कह गया है कि अगर अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले सरकार निषाद समुदाय को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की जगह अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा नहीं देती, तो वह भारतीय जनता पार्टी (BJP) को निषाद जाति का दुश्मन घोषित कर देगी।  उन्होंने करीब 2 सप्ताह पहले, एक सार्वजनिक सभा में रो दिया था और दावा किया था कि निषादों पर जुल्म हो रहा है।

यह भी पढ़ें: '4 साल मौज किया, अब याद आईं बहन-बेटियां...', संजय निषाद पर भड़के क्यों हैं लोग?

संजय निषाद, अध्यक्ष, निषाद पार्टी:-
हमारे लोगों का वोट छीना जा रहा है। हमारी बहन-बेटियों की इज्जत लूटी जा रही है। हमें मजबूत होना होगा। आप सभी से इतना कहूंगा कि अपनी निषाद पार्टी के लिए खड़े हो जाओ। अपनी पार्टी को मजबूत करो।

संजय निषाद की नजर में एंटी निषाद कौन?

योगी आदित्यनाथ सरकार में मत्स्य मंत्री संजय निषाद ने शनिवार को पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि उन्होंने पहले ही बहुजन समाज पार्टी (BSP), समाजवादी पार्टी (SP) और कांग्रेस को 'एंटी-निषाद' करार दे दिया है। इन पार्टियों ने कभी नदी-नालों पर निर्भर रहने वाले समुदायों का सम्मान नहीं किया।

निषाद समाज पर क्या सोचते हैं संजय निषाद?

संजय निषाद ने बताया कि निषाद समुदाय की हालत अनुसूचित जातियों से भी बदतर है, लेकिन उत्तर प्रदेश में इन्हें ओबीसी में रखा गया है। जबकि देश के एक दर्जन से ज्यादा राज्यों में नाविक और मछुआरे समुदायों को एससी का दर्जा मिला हुआ है। बंगाल, असम और त्रिपुरा जैसे राज्य इसके उदाहरण हैं।

 

यह भी पढ़ें: 'संजय निषाद को हटा दो', निषाद पार्टी के नेता ने पोस्ट लिख की खुदकुशी

 

 

संजय निषाद को उम्मीद क्या है?

संजय निषाद, बार-बार सार्वजनिक मंचों से कह रहे हैं, 'हम एनडीए के साथ हैं क्योंकि केंद्र और राज्य में उनकी सरकार है। वे जल्दी फैसले ले सकते हैं। हमें उम्मीद है कि जल्द ही नोटिफिकेशन जारी हो जाएगा, जिसमें निषाद जाति को एससी में शामिल किया जाएगा। इससे समुदाय को सरकारी नौकरियों, कॉलेजों में दाखिले और चुनावी सीटों पर आरक्षण मिल सकेगा।'

संजय निषाद, यूपी के निषाद बाहुल जिलों में दौरा कर रहे हैं। 

कितना मजबूत है निषाद समाज?

संजय निषाद ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में निषाद समुदाय की आबादी 9 प्रतिशत है, हालांकि सरकारी आंकड़ों में यह सिर्फ 2 प्रतिशत से थोड़ी ज्यादा बताई जाती है। उन्होंने कहा कि पहले हम सम्मान की लड़ाई लड़ रहे थे। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हमें 'निषाद जी' कहकर सम्मान देते हैं।

संजय निषाद ने कहा, 'अब हम सुरक्षा चाहते हैं, जिसकी कोशिश सरकार कर रही है। तीसरी जरूरत समृद्धि की है, जो एससी आरक्षण मिलने से ही पूरी हो सकती है। इससे हमें नौकरियां मिलेंगी, पंचायत और विधानसभा चुनाव में एससी सीटों से लड़ सकेंगे और समुदाय तरक्की कर सकेगा।'

यह भी पढ़ें: '7 दरोगाओं का हाथ-पैर तुड़वाकर', मंच से संजय निषाद की पुलिस को धमकाया

क्या योगी सरकार की मुश्किलें बढ़ाएंगे संजय निषाद?

संजय निषाद, रह-रहकर यह जता दे रहे हैं कि राज्य में निषाद, बड़ी सियासी ताकत हैं, जिन्हें नजर अंदाज नहीं किया जा सकता है। निषाद पार्टी का यह बयान 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल बढ़ा रहा है।

कितनी बड़ी ताकत हैं निषाद?

उत्तर प्रदेश की राजनीति में निषाद समुदाय की कई उपजातियां हैं। मल्लाह, केवट, बिंद, कश्यप जैसी जातियां, निषाद में आती हैं। यह प्रभावशाली वोट बैंक, जिसका पूर्वांचल और मध्य उत्तर प्रदेश के जिलों में दबदबा है। अगर संजय निषाद की मांग की वजह से यह समाज, योगी सरकार पर दबाव बढ़ाता है और मांगे पूरी नहीं होती हैं तो बीजेपी को नुकसान पहुंच सकता है। 

निषाद पार्टी की पकड़, गोरखपुर, संतकबीरनगर, महाराजगंज, देवरिया, कुशीनगर, मऊ, जौनपुर, गाजीपुर, बलिया, वाराणसी, प्रयागराज और मिर्जापुर जैसे जिलों में हैं। राजनीतिक विश्लेषक बताते हैं कि प्रदेश की लगभग 60 से 70 विधानसभा सीटों पर निषाद मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं। इनमें से करीब 20-25 सीटों पर इस समुदाय की जनसंख्या इतनी अधिक है कि वे सीधे तौर पर हार-जीत तय करते हैं। संजय निषाद, इस समुदाय के चर्चित नेता हैं।