पंजाब में 14 जनवरी का दिन धार्मिक, ऐतिहासिक और राजनीतिक दृष्टि से अहम होता है। हर साल माघ के महीने में मकर संक्रांति के दिन पंजाब के मुक्तसर साहिब में माघी मेले का आयोजन किया जाता है। इस मेले में पंजाब की राजनीति की झलक भी देखने को मिलती है। हर राजनीतिक पार्टी इस मेले में अपनी शक्ति दिखाने की कोशिश करती है। इस साल भी 2027 में होने वाले चुनाव से पहले कई राजनीतिक दल इस मेले में अपनी सियासी कॉन्फ्रेंस करने जा रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) 2027 में पंजाब एंट्री के लिए अपने मिशन की शुरुआत इसी मेले से करने जा रही है। वहीं, आम आदमी पार्टी (AAP) और शिरोमणि अकाली दल (शिअद) जैसे दल भी अपना शक्ति प्रदर्शन करेंगे।
माघी मेला मुक्तसर युद्ध के 40 सिख योद्धाओं की याद में मनाया जाता है। 1705 के 'मुक्तसर के युद्ध' में 40 सिख योद्धाओं (जिन्हें चाली मुक्ते भी कहा जात है) ने गुरु गोबिंद सिंह जी के साथ मुगल सेना के खिलाफ युद्ध में अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। गुरु गोबिंद सिंह जी ने इन्हें मुक्त घोषित किया। इसी कारण इस जगह का नाम भी मुक्तर पड़ा। माघ महीने की मकरसक्रांति के दिन श्रद्धालु यहां स्थित सरोवर में सन्नान करने आते हैं। गुरुद्वारों में कीर्तन और अखण्ड पाठ होते हैं। इसके साथ ही पारंपरिक मेला भी लगता है, जिसमें कुश्ती और अन्य खेलों का आयोजन किया जाता है।
यह भी पढ़ें-- किन शर्तों पर BJP के साथ NDA में वापसी चाहता है अकाली दल? मुश्किलें समझिए
राजनीतिक लिहाज से अहम मेला
पंजाब की राजनीति में यह मेला बहुत महत्तव रखता है। इस दिन मेले के साथ-साथ यहां राजनीतिक अखाड़े भी लगते हैं। इस दिन राज्य का हर राजनीतिक दल इस मेले में अपना शक्ति प्रदर्शन करने की कोशिश करता है। दशकों से पंजाब के मुख्यमंत्री से लेकर नेता प्रतिपक्ष और अन्य पार्टियों के दिग्गज नेता यहां पहुंचकर रैली करते हैं। इस दिन राजनीतिक भाषणों के जरिए नेता अपनी पार्टी की नीतियां, वादे और संदेश जनता तक पहुंचाते हैं। पंजाब की राजनीति में सिख पंथ, शहादत, पंथक मुद्दे और पंजाब की अस्मिता राजनीति के केंद्र में रहे हैं, इसलिए माघी मेला भावनात्मक रूप से जनता को जोड़ने का प्रभावी माध्यम बन गया है। कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि अगले एक साल की राजनीति की दिशा इसी मेले में दिखाई दे जाती है।
पहली बार दम दिखाएगी बीजेपी
शिरोमणि अकाली दल पंजाब की राजनीति में एक बार फिर वापसी करने की तैयारी कर रहा है। इस मेले में शक्ति प्रदर्शन की तैयारी शिअद पार्टी लंबे समय से कर रही है। मुक्तसर मेले की इस कॉन्फ्रेंस से शिअद अगले साल होने वाले पंजाब विधानसभा चुनावों का बिगुल फुंकने जा रही है। शिअद नेता सुखबीर बादल ने कहा कि इस कॉन्फ्रेंस के जरिए पंजाब की राजनीति में एक नई शुरुआत होगी और राज्य में शिअद की वापसी का संदेश दिया जाएगा।
बता दें कि शिअद ने अपने राजनीतिक सम्मेलनों को उस वक्त भी बंद नहीं किया जह 2017 में अकाल तख्त के जत्थेदार ने मुक्तसर मेले में राजनीति को दूर रखने के लिए कहा था। उन्होंने राजनीतिक सम्मेलनों का आयोजन ना करने की अपील की थी। इसके बाद से कांग्रेस समेत कई दलों ने सियासी कॉन्फ्रेंस बंद कर दी थी लेकिन शिअद ने यह परंपरा जारी रखी। शिअद ने कहा कि माघी मेले में हमेशा राजनीतिक गतिविधियां होती रही हैं, यहां तक कि 1920 से पहले भी यहां राजनीतिक सम्मेलन होते आए हैं। उस वक्त अकाली दल अस्तित्व में आया ही नहीं था।
यह भी पढ़ेंः कांग्रेस से लाकर लगाया दांव, पंजाब में BJP के कितने काम आए 'बाहरी' नेता?
दम दिखाने को तैयार बीजेपी
पंजाब की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी अपनी जगह नहीं बना पा रही है। अकाली दल से अलग होने के बाद पार्टी हाशिए पर चली गई है। 2022 के विधानसभा चुनावों और 2024 के लोकसभा चुनावों के साथ-साथ उपचुनावों और स्थानीय निकाय चुनावों में बीजेपी को करारी हार मिली है। पंजाब बीजेपी के कई नेता अब अपने दम पर पार्टी को आगे बढ़ाने की बात कर रहे हैं और इसी कड़ी में पहली बार बीजेपी अपने स्तर पर मुक्तसर मेले में सियासी कॉन्फ्रेंस करने जा रही है। इस कॉन्फ्रेंस में पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर, केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू, राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग समेत राज्य के कई बड़े नेता शामिल हो सकते हैं।
अब तक बीजेपी अकाली दल के साथ मंच शेयर करती रही है। बीजेपी के कई बड़े नेता इस मेले में अकाली दल के साथ मंच पर नजर आ चुके हैं लेकिन इस बार परिस्थितियां अलग हैं। इस बार अकाली दल और बीजेपी का गठजोड़ नहीं है। ऐसे में बीजेपी ने पहली बार अपने लेवल पर मुक्तसर मेले में राजनीतिक कॉन्फ्रेंस करने का फैसला किया है। बीजेपी इस कॉन्फ्रेंस के जरिए पंजाब के मूड का अंदाजा लगाने की कोशिश करेगी और इसके बाद अपनी रणनीति 2027 विधानसभा चुनाव के लिए तैयार करेगी। बीजेपी की नजर अकाली दल की कॉन्फ्रेंस पर भी रहेगी क्योंकि दोनों पार्टियों के साथ आने की अटकले लग रही हैं।
AAP करेगी शक्ति प्रदर्शन
पंजाब में 2022 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने बंपर जीत दर्ज की थी। अब AAP सरकार को चार साल हो चुके हैं और अगले साल होने वाले चुनाव में पार्टी फिर से 2022 वाला प्रदर्शन दोहराने की कोशिश करेगी। इसलिए मुक्तर मेले में पार्टी अपना शक्ति प्रदर्शन करेगी। जब आम आदमी पार्टी ने 2016 में पंजाब में एंट्री करने का एक बड़ा संदेश देना था तो अरविंद केजरीवाल दिल्ली से इस मेले में AAP की कॉन्फ्रेंस में शामिल होने आए थे। 2016 में आम आदमी पार्टी ने अन्य राजनीतिक दलों से ज्यादा भीड़ जुटाकर सब को चौंका दिया था। हालांकि, 2017 के बाद पार्टी ने सियासी कॉन्फ्रेंस बंद कर दी थी लेकिन इस साल पार्टी ने शक्ति प्रदर्शन करने का मन बना लिया है।
इस कॉन्फ्रेंस में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल शामिल होंगे। दोनों अपनी सरकार के पिछले चार सालों के काम गिनवाएंगे और अगले एक साल के साथ-साथ अगले विधानसभा चुनाव के लिए एजेंडा भी सेट करेंगे। माना जा रहा है कि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान इस मंच से आज कुछ बड़ी घोषणा भी कर सकते हैं।
यह भी पढ़ें-- ना-ना करते भी साथ आ जाएंगे बीजेपी और अकाली दल? गुपचुप हो रहा है सर्वे
कांग्रेस नहीं करेगी कॉन्फ्रेंस
बीजेपी, आम आदमी पार्टी, शिरोमणि अकाली दल के अलावा पंजाब की स्थानीय पार्टियां भी इस मेले में सियासी कॉन्फ्रेंस करने जा रही हैं। हालांकि, कांग्रेस इस साल भी इस मेले में सियासी कॉन्फ्रेंस नहीं करेगी। 2017 के बाद पार्टी ने इस मेले में राजनीतिक कॉन्फ्रेंस करना बंद कर दिया है। पंजाब कांग्रेस इन दिनों मनरेगा को लेकर बड़ी रैलियां कर रही है ऐसे में पार्टी मुक्तसर मेले में सियासी कॉन्फ्रेंस इस साल भी नहीं करेगी। पंजाब कांग्रेस के प्रधान राजा वड़िग ने कहा कि कांग्रेस अकाल तख्त साहिब के आदेश के अनुसार धार्मिक मौकों पर कोई राजनीतिक कॉन्फ्रेंस नहीं करती है। हालांकि, माना जा रहा है कि कांग्रेस माघी मेले के बाद मुक्तसर में कोई बड़ी कॉन्फ्रेंस कर सकती है।
कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि आज पंजाब की राजनीति का सियासी पारा बढ़ने वाला है। सभी राजनीतिक दल 2027 के विधानसभा चुनाव का बिगुल मुक्तसर से बजाएंगे। विपक्ष पंजाब सरकार पर हमला बोलेगा और अपना एजेंडा जनता के सामने रखेगा। वहीं, आम आदमी पार्टी अपनी सरकार के काम जनता के बीच लेकर जाएगी और संभव है कि सीएम भगवंत मान कोई बड़ी घोषणा करके अपने पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश करें।
