भारतीय जनता पार्टी वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले जातीय और सामाजिक समीकरणों को धार देने में जुट गई है। प्रदेश सरकार में जल्द ही छह नए मंत्रियों को शपथ दिलाने की तैयारी की जा रही है। इसमें पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी, पूजा पाल, मनोज पांडे, कृष्णा पासवान, अशोक कटारिया, राजेश्वर सिंह या अन्य को मौका मिल सकता है।
सूत्रों के मुताबिक कौशाम्बी की चायल विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतने वाली पूजा पाल मंत्री बनने की दौड़ में सबसे आगे मानी जा रही हैं। अगस्त 2025 में सपा से निष्कासित होने के बाद से वह भाजपा नेताओं के लगातार संपर्क में हैं। माना जा रहा है कि भाजपा पाल समाज के वोटरों को साधने के लिए उन्हें बड़ा दायित्व दे सकती है।
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पति की हत्या के बाद रखा राजनीति में कदम
पूजा पाल ने वर्ष 2005 में पति एवं पूर्व विधायक राजू पाल की हत्या के बाद सक्रिय राजनीति में कदम रखा था। वर्ष 2007 में वह पहली बार बसपा के टिकट पर विधायक बनी थीं। 2017 का चुनाव हारने के बाद वह 2019 में समाजवादी पार्टी में शामिल हो गईं और 2022 का विधानसभा चुनाव सपा के टिकट पर जीतकर विधानसभा पहुंचीं। पाल समाज के वोटरों पर उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है।
ब्राह्मण व गुर्जर वोटरों को साधने की तैयारी
भाजपा प्रदेश में ब्राह्मण व गुर्जर वोटरों को साधने की कवायद में जुट गई है। रायबरेली के ऊंचाहार से सपा के बागी विधायक मनोज पांडे ब्राह्मणों का बड़ा चेहरा हैं। ऐसे में ब्राह्मणों को अपने पक्ष में रखने के लिए उनका मंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है। पश्चिमी यूपी के गुर्जर समुदाय के विधायक अशोक कटारिया भी मंत्री की रेस में हैं।
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कृष्णा पासवान का नाम भी रेस में
फतेहपुर से महिला कोटे से दलित पासी समुदाय की विधायक कृष्णा पासवान भी मंत्री बनाई जा सकती हैं। वह खागा विधानसभा सीट से विधायक हैं। केंद्र से प्रदेश सरकार तक बीजेपी महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाने पर जोर दे रही है।
