तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लिए मुश्किलों के दिन शुरू हो गए हैं। ममता बनर्जी की अगुवाई वाली पार्टी, जो 15 साल तक पश्चिम बंगाल में सत्ता में रही, मई 4 को हुए विधानसभा चुनाव में सिर्फ 80 सीटों पर सिमट गई। अब पार्टी में खुले विद्रोह ने स्थिति और खराब कर दी है।

इस हफ्ते TMC के 58 विधायकों ने ममता बनर्जी के आदेशों के खिलाफ खुली बगावत कर दी। उन्होंने विधानसभा में मुख्य विपक्षी दल बनने का दावा किया और पार्टी को दो हिस्सों में बांट दिया। यह TMC के 30 साल के इतिहास में पहली बड़ी फूट है। ममता बनर्जी ने 1998 में कांग्रेस छोड़कर यह पार्टी बनाई थी।

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विद्रोह का नेतृत्व कौन कर रहा है?

विद्रोही विधायकों का नेतृत्व कर रहे हैं ऋतब्रत बनर्जी। उन्हें हाल ही में पार्टी से निकाल दिया गया था। बुधवार को विधानसभा स्पीकर से मिलने के बाद ऋतब्रत बनर्जी ने खुद को विपक्ष का नेता घोषित कर दिया। स्पीकर ने भी उनके दावे को स्वीकार कर लिया।

ऋतब्रत बनर्जी, नेता विपक्ष, पश्चिम बंगाल:-
हम 58 विधायक TMC के चुनाव चिह्न पर जीते थे। अब हम असली TMC हैं।

मुस्लिम विधायकों को भी नहीं पसंद ममता बनर्जी

विद्रोहियों में TMC के करीब आधे मुस्लिम विधायक भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि वे ममता बनर्जी को अपना मुख्य सलाहकार बनाना चाहते हैं, लेकिन उनके भतीजे और पार्टी के महासचिव अभिषेक बनर्जी से कोई संबंध नहीं रखेंगे।

ममता के घर हुई बैठक, नतीजा क्या निकला?

शुक्रवार को ममता बनर्जी के कलकत्ता स्थित आवास पर पार्टी की बैठक बुलाई गई। विद्रोहियों के अलावा सिर्फ 8 विधायक ही पहुंचे। इनमें मदन मित्रा, कुणाल घोष, फिरहाद हाकिम, सोभनदेव चट्टोपाध्याय जैसे नेता शामिल थे। साथ में कुछ सांसद भी थे।

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TMC अब कोर्ट जाएगी?

TMC ने स्पीकर के फैसले को गैरकानूनी बताया है। पार्टी सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा, 'हम सोमवार को हाईकोर्ट में याचिका दायर करेंगे।' उन्होंने आरोप लगाया कि BJP TMC कार्यकर्ताओं को निशाना बना रही है।

संख्या गणित में कहां खड़ी है TMC?

TMC के पास लोकसभा में 28 और राज्यसभा में 13 सांसद हैं, लेकिन विधानसभा में यह विद्रोह पार्टी के लिए बड़ा झटका है। पार्टी अब सड़क पर भी संघर्ष करने की बात कर रही है।

क्या होगा आगे?

यह संकट TMC के भविष्य पर सवाल खड़ा कर रहा है। 30 साल पुरानी पार्टी पहली बार इतने बड़े पैमाने पर बंट रही है। ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी अब इस विद्रोह से कैसे निपटते हैं, इसी पर देश के सियासत की नजरें टिकी हैं।