विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में बीजेपी ने मंत्रिमंडल विस्तार में छह नए चेहरों को शामिल करके सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश की। रविवार को राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने भूपेंद्र सिंह चौधरी, मनोज पांडेय, कृष्णा पासवान, कैलाश सिंह राजपूत, सुरेंद्र दिलेर और हंसराज विश्वकर्मा को मंत्री पद की शपथ दिलाई। वहीं राज्य मंत्री अजीत पाल और सोमेंद्र तोमर को स्वतंत्र प्रभार सौंपा गया है।

 

रायबरेली की ऊंचाहार विधानसभा सीट से विधायक मनोज पांडे और पूर्व बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने कैबिनेट मंत्री पद की शपथ ली। अजीत पाल सिंह और सोमेंद्र तोमर को राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार बनाया गया है। सुरेंद्र दिलेर, हंसराज विश्वकर्मा, कैलाश राजपूत और कृष्णा पासवान को राज्य मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

 

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यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ के दूसरे कार्यकाल का पहला कैबिनेट विस्तार 5 मार्च 2024 को हुआ था। तब दारा सिंह चौहान, सुभासपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर, बीजेपी के सुनील शर्मा और राष्ट्रीय लोकदल के अनिल कुमार ने मंत्री पद की शपथ ली थी। 

 

उत्तर प्रदेश विधानसभा में कुल विधायकों की संख्या 403 दिन है। नियम के मुताबिक यूपी कैबिनेट में मंत्रियों की अधिकतम संख्या 60 हो सकती है। अभी 54 मंत्री थे। छह नए मंत्रियों के साथ यह संख्या 60 हो जाएगी। 

 

विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने मंत्रिमंडल के सहारे सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश की। कहा जा रहा है कि ब्राह्मण सरकार से नाराज थे। ऐसे में उन्हें मनाने का इंतजाम भी इस विस्तार में किया गया है। 

 

हंसराज विश्वकर्मा: हंसराज विश्वकर्मा वाराणसी से एमएलसी हैं। विश्वकर्मा समाज से आने वाले हंसराज को मंत्री बनकर यूपी सरकार ने बड़ा संदेश दिया है। हंसराज विश्वकर्मा पिछले 10 वर्षों से वाराणसी में बीजेपी जिलाध्यक्ष भी हैं। 1969 में कंचनपुर में जन्मे हंसराज साल 1989 से बीजेपी से जुड़े हैं। 2014 में वाराणसी में पीएम मोदी के प्रचार में भी अहम भूमिका निभाई थी।

 

कृष्णा पासवान: पासवान समाज से जुड़ी कृष्णा पासवान की गिनती जमीन से जुड़े नेताओं में होती है। उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से मंत्री तक का सफर तय किया तो उनके गृह जनपद में खुशी की लहर दौड़ पड़ी। कृष्णा पासवान ने पहली बार किशनपुर विधानसभा सीट से चुनाव जीता था। 2008 में परसीमन के बाद खागा आरक्षित सीट से चुनाव लड़ा। यहां से 2012, 2017 और 2022 में चुनाव जीता।

 

मनोज पांडे: 2008 में परिसीमन के बाद ऊंचाहार विधानसभा सीट अस्तित्व में आई। 2012 में पहला चुनाव हुआ। तब से यहां मनोज पांडेय का कब्जा है। ऊंचाहार से तीन बार विधानसभा चुनाव जीत चुके मनोज पांडे को बड़ा ब्राह्मण चेहरा माना जाता है। सरकार के इस कदम को ब्राह्मणों को साधने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।  

 

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सुरेंद्र दिलेर: अलीगढ़ की खैर सीट से 2024 में सुरेंद्र दिलेर ने पहली बार उपचुनाव जीतकर विधायक बने। उनकी तीन पीढ़ियां बीजेपी से जुड़ी हैं। उनके बाबा किशनलाल दिलरे चार बार सांसद और छह बार विधायक रहे। पिता राजवीर सिंह दिलेर भी हाथरस से लोकसभा सदस्य थे। इगलास विधानसभा सीट से विधायक बने। हालांकि 2024 में उनके निधन के बाद पार्टी ने सुरेंद्र दिलेर को मैदान में उतारा था।  

 

कैलाश राजपूत: लोधी राजपूत समाज से आने वाले कैलाश राजपूत को योगी मंत्रिमंडल में जगह मिली है। वे कन्नौज की तिर्वा विधानसभा सीट से विधायक हैं। कैलाश ने साल 1996 में पहली बार विधानसभा चुनाव जीता था। 2007 में बसपा के टिकट पर चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे। 2017 और 2022 का चुनाव बीजेपी की टिकट पर जीता। बीजेपी ने कैलाश को कैबिनेट में जगह देकर लोधी राजपूत समाज को साधा है।

 

भूपेंद्र चौधरी: जाट समाज से आने वाले भूपेंद्र सिंह चौधरी यूपी बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष हैं। पहली योगी कैबिनेट में पंचायती राज मंत्री भी थे। अब विधानसभा चुनाव से पहले उन्हें दोबारा कैबिनेट मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई है। 2022 में चौधरी को एमएलसी बनाया गया था। किसान परिवार से आने वाले चौधरी की पढ़ाई-लिखाई मुरादाबाद में हुई।

 

इनका बढ़ा कद: कैबिनेट विस्तार में मेरठ दक्षिण के विधायक सोमेंद्र तोमर का कद बढ़ा है। अभी तक वह ऊर्जा और अतिरिक्त ऊर्जा विभाग के राज्यमंत्री थे। मगर अब उन्हें स्वतंत्र प्रभार सौंपा गया है। ठीक इसी तरह कानपुर देहात के सिकंदरा सीट से विधायक अजीत पाल योगी आदित्यनाथ राज्य मंत्री विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी थे। अब उनका भी सरकार में कद बढ़ा है और राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार बनाया गया है।