सोमवार को सम्पन्न हुए राज्यसभा चुनाव में बीजेपी के उम्मीदवारों का बोलबाला रहा। देश में खाली हुई 37 राज्यसभ सीटों में से 26 उम्मीदवार निर्विरोध पहले ही जीत गए थे। बची हुई 11 सीटों के लिए चुनाव हुए इसमें 11 में से 9 सीटें बीजेपी ने जीत लीं और तीन सीटें ही विपक्ष को नसीब हुईं। यह चुनाव हरियाणा, बिहार और ओडिशा में हुए। कांग्रेस ने दो और बीजू जनता दल (BJD) ने एक सीट पर जीत हासिल की।
ओडिशा की 4 सीटों में से 3 एनडीए और 1 बीजेडी उम्मीदवार ने जीती। हरियाणा की दो सीटों में से एक पर बीजेपी और एक पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की। इस बीच चाहे कांग्रेस हो आरजेडी हो या बीजेडी सभी के विधायकों ने एनडीए के समर्थन में क्रॉस वोटिंग की। इसमें ओडिशा की बाराबती-कटक सीट से कांग्रेस विधायक सोफिया फिरदौस का भी नाम शामिल है। सोफिया के इस कदम से कांग्रेस सकते में है।
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पहली मुस्लिम महिला विधायक
सोफिया फिरदौस ओडिशा विधानसभा के लिए चुनी जाने वाली पहली मुस्लिम महिला विधायक हैं। फिरदौस ने बीजेपी के पूर्ण चंद्र महापात्रा को 8,001 वोटों के अंतर से हराया था। ऐसे में आइए जानते हैं कि अपनी ही पार्टी कांग्रेस को झटका देने वाली सोफिया फिरदौस कौन हैं?
सोफिया फिरदौस कौन हैं?
- सोफिया फिरदौस 34 साल की एक युवा नेत्री हैं। वह राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखती हैं। सोफिया कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मोहम्मद मोकिम की बेटी हैं। कांग्रेस ने फिरदौस को 2024 के ओडिशा विधानसभा चुनाव में उनके पिता मोकिम की जगह टिकट दिया। चुनाव में वह भारी वोटों के अंतर से जीत गई थीं।
- सोफिया फिरदौस के ने कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। उन्होंने 2022 में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, बैंगलोर से एग्जीक्यूटिव जनरल मैनेजमेंट प्रोग्राम का कोर्स भी पूरा किया।
- सोफिया को 2023 में कन्फेडरेशन ऑफ रियल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन्स ऑफ इंडिया (CREDAI) के भुवनेश्वर चैप्टर का अध्यक्ष चुना गया था। वह CREDAI महिला विंग के लिए पूर्वी जोन कोऑर्डिनेटर के तौर पर भी काम करती हैं।
- सोफिया की शादी बिजनेसमैंन शेख मेराज उल हक से हुई है। वह ओडिशा की पहली महिला मुख्यमंत्री नंदिनी सत्पथी के नक्शेकदम पर चल रही हैं। नंदिनी सत्पथी 1972 में से विधायक चुनी गई थीं।
ओडिशा में बीजेपी
बता दें कि 2024 के ओडिशा विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने ने 147 में से 78 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया था। इस चुनाव में तत्कालीन मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की करारी हार हुई थी और बीजू जनता दल का 24 साल का शासन खत्म हो गया था। लोकसभा चुनावों में भी बीजेपी ने ओडिशा की 21 में से 20 सीटों पर जीत दर्ज की थी।
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