भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता बृजभूषण शरण सिंह इन दिनों खूब चर्चा में हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में अपनी ही पार्टी से टिकट न पाने वाले बृजभूषण अब किसी सदन के सदस्य नहीं हैं लेकिन लगातार खबरों में बने हुए हैं। अब उनका एक सवाल उनकी ही पार्टी बीजेपी की चिंता बढ़ा रहा है। इस बीच लखनऊ से उड़ती-उड़ती खबरें आई हैं कि बृजभूषण की नजदीकी समाजवादी पार्टी से बढ़ रही है। कभी सपा के नेता रहे बृजभूषण के बारे में अखिलेश यादव ने भी कहा है कि क्या परस्थितियां बनेंगी यह तो समय बताएगा। ऐसे में बृजभषूण की एक चेतावनी, संसद न जा पाने की उनकी कसक और उनके एलान ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में खलबली मचा रखी है।

 

महिलाओं पहलवानों के आरोपों से घिरे बृजभूषण सिंह को बीजेपी ने 2024 में टिकट नहीं दिया था। उनकी जगह पर उनके बेटे करण भूषण को टिकट दिया था। इस बात पर बृजभूषण किसी तरह सहमत तो हो गए थे लेकिन बाद में उन्होंने इसे साजिश करार दिया। वह एक इंटरव्यू में कह भी चुके हैं कि जिस सदन से उन्हें निकाला गया, वहां वह कम से कम एक बार लौटकर जरूर जाएंगे।

सपा में जाएंगे बृजभूषण सिंह?

अक्सर बीजेपी की नीतियों पर सवाल उठाने वाले बृजभूषण शरण सिंह कई बार कई फैसलों को लेकर मुखर रहे हैं। चाहे वह यूजीसी का मुद्दा हो या फिर कट्टर हिंदुत्व की राजनीति, बृजभूषण ने कई बार ऐसी बातें बोली हैं जिनसे बीजेपी को तकलीफ होती है। हाल ही में वह एक ऐसे मंच पर थे जहां उत्तर प्रदेश के कई क्षत्रिय नेता थे। इसी मंच से उन्होंने कहा कि अगर उनकी जरूरत ना हो तो बता दें, वह 2027 और 2029 में दिखा देंगे। कहा जा रहा है कि वह क्षत्रियों के साथ-साथ सवर्णों की भी बात कर रहे थे।

 

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हाल ही में दैनिक भास्कर अखबार ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि बृजभूषण शरण सिंह चुनाव से ठीक पहले समाजवादी पार्टी में जा सकते हैं और उनकी अखिलेश यादव से बातचीत भी चल रही है। इसी रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों की बातचीत अंतिम दौर में हैं और सितंबर-अक्तूबर में बृजभूषण सिंह सपा में शामिल हो सकते हैं। रोचक बात है कि कई मौकों पर बृजभूषण शरण सिंह अखिलेश यादव की तारीफ कर चुके हैं। इतना ही नहीं, अखिलेश और समाजवादी पार्टी की ओर से भी बृजभूषण सिंह के खिलाफ बयानबाजी नहीं की जाती है।  

पुराना है रिश्ता

दैनिक भास्कर से बातचीत में बृजभूषण शरण सिंह ने कहा है, 'मैं अभी बीजेपी में हूं। मुझे कांग्रेस से भी ऑफर मिला था लेकिन मैंने इनकार कर दिया। मुलायम सिंह यादव से मेरे अच्छे रिश्ते रहे हैं और अखिलेश यादव से भी अच्छे हैं। भविष्य को लेकर कोई भी फैसला समर्थकों की राय के आधार पर लिया जाएगा।'

 

बता दें कि साल 2008 में बीजेपी से निकाले जाने के बाद बृजभूषण सिंह ने समाजवादी पार्टी ज्वाइन कर ली थी और 2009 में उसी के टिकट पर सांसद बने थे। वह 2012 तक सपा में ही थे लेकिन 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी में शामिल हो गए थे।

 

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कुनबा बढ़ाने की तैयारी

बृजभूषण सिंह के एक बेटे करण भूषण कैसरगंज के सांसद हैं। वहीं, दूसरे बेटे प्रतीक भूषण बीजेपी के विधायक हैं। अब बृजभूषण सिंह की बेटी शालिनी सिंह बीते कुछ महीनों में तेजी से सक्रिय हुई हैं और वह नोएडा से चुनाव लड़ने की बात भी कह रही हैं। कहा जा रहा है कि अपने परिवार के अन्य सदस्यों को भी राजनीति की तैयारी में लगे बृजभूषण अपना राजनीतिक वजन बढ़ाने में जुटे हैं। अपने पुराने संबंधों के आधार पर वह समाजवादी पार्टी में भी मौका देख रहे हैं। 

 

दूसरी तरफ दलितों और पिछड़ों को अपने साथ लेकर मजबूती से चल रही समाजवादी पार्टी को भी कुछ दमदार सवर्ण नेताओं की जरूरत है। राजा भैया, अभय सिंह और ऐसे कई अन्य नेताओं के साथ छोड़ देने के चलते समाजवादी पार्टी में क्षत्रिय और ब्राह्णण नेताओं की कमी दिखती है। ऐसे में अगर उसके साथ बृजभूषण शरण सिंह जैसा नेता आता है तो गोंडा-बलरामपुर के अलावा आसपास के कई जिलों और क्षत्रिय बहुल सीटों पर भी इसका असर पड़ सकता है। साथ ही, योगी आदित्यनाथ के पीछे खड़ी दिखी ठाकुर नेताओं की फौज में भी सेंध लग सकती है।

अखिलेश ने क्या कहा?

इन खबरों के बाद जब अखिलेश यादव से बृजभूषण सिंह के बारे में सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा, 'मैं आपको अगर सच बताऊं तो बीजेपी की सरकार में पीडीए के इतने लोग तैयार हैं कि सबकुछ छोड़ना चाहते हैं। इतने पीड़ित हैं, दुखी हैं, अपमानित हो रहे हैं। जहां आपने उन पूर्व सांसद और गोंडा के जो नेता रहे हैं, हमारे साथ में भी रहे हैं। राजनीतिक परिस्थितियां क्या बनती हैं और राजनीति में क्या मोड़ आएंगे, यह तो वही बेहतर बना सकते हैं।'