भारत निर्वाचन आयोग को लिखे सुनेत्रा पवार के पत्र ने महाराष्ट्र में नया सियासी बखेड़ा खड़ा कर दिया है। पत्र में प्रफुल पटेल और सुनील तटकरे का नाम तो है, लेकिन उनके संगठनात्मक पदों का उल्लेख नहीं है। इसके बाद यह सवाल उठने लगा कि क्या दोनों नेताओं को उनके पद से हटा दिया गया है? प्रफुल पटेल अभी तक राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के कार्यकारी अध्यक्ष थे। मगर पत्र में उनके नाम के आगे सिर्फ राज्यसभा लिखा है। वहीं एनसीपी के महाराष्ट्र अध्यक्ष सुनील तटकरे के नाम के आगे लोकसभा लिखा है। संगठनात्मक पद का कोई उल्लेख नहीं है।

 

एनसीपी राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनेत्रा पवार ने 29 अप्रैल को चुनाव आयोग को पत्र लिखा था। इसमें राष्ट्रीय कार्यकारिणी के 22 सदस्यों की जानकारी थी। पत्र में सुनेता पवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष, उनके बेटों पार्थ को महासचिव और जय पवार को राष्ट्रीय सचिव बताया गया है। इसमें छगन भुजबल और दिलीप वलसे-पाटिल को शामिल किया गया है, लेकिन दोनों को कोई संगठनात्मक पद नहीं दिया गया है। 

 

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तकनीकी गलती हुई: सुनेत्रा पवार

महाराष्ट्र की डिप्टी सीएम और एनसीपी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनेत्रा पवार ने पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को सौंपी गई सूची में कुछ तकनीकी गलतियां हैं। इन्हें जल्द ही ठीक कर लिया जाएगा। टाइम्स ऑफ इंडिया ने अपनी रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया कि पार्थ और जय ने सुनील तटकरे बात की और जल्द ही एक बैठक आयोजित करने का अनुरोध किया। 

 

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दूसरी बार दोनों नेताओं के संगठनात्मक पदों का उल्लेख नहीं

अब सवाल यह उठ रहा है कि अगर यह गलती है तो दोबारा कैसे हुई? क्योंकि 10 मार्च को भी सुनेत्रा पवार ने चुनाव आयोग को पत्र लिखा था। इसमें भी प्रफुल पटेल और सुनील तटकरे के संगठनात्मक पदों का उल्लेख नहीं था। 14 सदस्यों की सूची में सुनेत्रा पवार का नाम राष्ट्रीय अध्यक्ष और शिवाजीराव गर्जे को कोषाध्यक्ष बताया गया था।